दुनिया को भारत पर भरोसा, अब दिखाना होगा दम, UK इंडिया बिजनेस काउंसिल की बैठक में बोले पीयूष गोयल

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केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के सदस्यों के साथ दोपहर के भोजन पर बैठक की। इसके साथ ही प्रमुख वैश्विक संगठनों के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की।

चर्चा का उद्देश्य क्या है?
केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि चर्चा का मुख्य उद्देश्य नए अवसरों को खोलना था। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, ‘यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के सदस्यों के साथ एक संवादात्मक लंच मीटिंग हुई, जिसमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा ग्रुप, एचएसबीसी,  प्रूडेंशियल और बेकर मैकेंजी सहित प्रमुख वैश्विक संगठनों के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ भारत-यूके विकास एजेंडा को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। चर्चा का मुख्य केंद्र नए अवसरों को खोलना, निवेश में तेजी लाना और साझा विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को और मजबूत करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करना था।’

 

परिवर्तनकारी विकास की वकालत करते हुए और उद्योग जगत के नेताओं से अब तक अनछुए क्षेत्रों में विस्तार करने और उद्यम करने का आग्रह करते हुए गोयल ने कहा है कि दुनिया को भरोसा है कि भारत यह कर सकता है और उसे करना ही चाहिए। ब्रिटेन की यात्रा पर आए केंद्रीय मंत्री ने बिजनेस प्लेनरी सेशन में भाग लिया, जहां उन्होंने व्यापार, निवेश और आर्थिक विकास के अवसरों पर चर्चा करने के लिए उद्योग जगत के नेताओं और हितधारकों के साथ बातचीत की।

 

किसने भारत के साथ अन्याय किया है?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फिच, मूडीज और एसएंडपी जैसी वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने भारत के साथ अन्याय किया है। उन्होंने भारत की विकास गाथा के साथ-साथ देश के मजबूत बुनियादी सिद्धांतों और उसकी क्षमताओं को पर्याप्त रूप से मान्यता नहीं दी है। उन्होंने ब्रिटेन को निर्यात बढ़ाने का आह्वान किया। इसके साथ ही कहा कि वहां बहुत संभावनाएं हैं। भारत को बाजार में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने की जरूरत है।

केंद्रीय मंत्री ने 15 जुलाई को भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) के आगामी कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने तेजी से प्रगति करने के लिए सहयोग, समन्वय और साझेदारी पर जोर दिया। मंत्री ने उच्च विकास महत्वाकांक्षा रखने और उसी के अनुरूप कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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उन्होंने कहा ‘मुझे पूरा विश्वास है कि अब हम जो कुछ भी हासिल करेंगे। वह बहुत मूल्यवान साबित होगा। अक्सर हम अपने आरामदेह माहौल में भटक जाते हैं और समय बीत जाता है। फिर हम वही घिसी-पिटी सोच में पड़ जाते हैं कि 5, 7 या 10% की वृद्धि होने पर ही सफलता का दावा कर लेते हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार आमतौर पर 4 से 6% या 5% की दर से बढ़ता है। अगर एक राष्ट्र के रूप में हमारी महत्वाकांक्षा का स्तर यही रहा, तो यह उस भरोसे का घोर विश्वासघात होगा जो आज दुनिया हम पर रखती है।


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