Post Views: 36,592
उत्तराखंड की नगर पालिका, नगर पंचायतों में क्लर्क, सफाई निरीक्षक, अकाउंट कर्मचारी, कर अधीक्षकों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी (ईओ) बनाने के आदेश पर शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा तीन दिन में ही पलट गए। उन्होंने सचिव शहरी विकास को तत्काल सभी तैनाती आदेश रद्द करने के निर्देश दिए, जिसके बाद अपर सचिव एवं निदेशक शहरी विकास विनोद गिरी गोस्वामी ने सभी आदेश निरस्त कर दिए।
शहरी निकायों में आयोग से आए ईओ को नगर निगमों में प्रभारी एसएनए बनाकर उनकी जगह खाली पदों पर दूसरे संवर्ग के कर्मचारियों को प्रभारी ईओ बनाने का समाचार अमर उजाला ने 23 जुलाई के अंक में क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर कर्मियों को बना दिया अधिशासी अधिकारी से प्रकाशित किय गया। इस खबर ने इस पूरे प्रकरण का खुलासा किया था। इसके बाद 24 जुलाई को आयोग से चयनित नौ ईओ को बनाया प्रभारी एसएनए और 25 जुलाई को उठ रहे सवाल, किस आधार पर दिए निकायों में ईओ के प्रभार समाचार प्रकाशित किए।
मामले में शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने पहले ही दिन कहा था कि ये पूर्व की व्यवस्था है। हमारे पास ईओ के पद रिक्त हैं, इसलिए तैनातियां दी गई है। शनिवार को मंत्री राम सिंह कैड़ा पलट गए।
उन्होंने सचिव शहरी विकास नितेश झा को एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि 17 जुलाई को 34 जो ईओ, प्रभारी ईओ के तबादले किए गए थे। उन्हें तत्काल रद्द किया जाता है। जिसके बाद शासन हरकत में आया। दोपहर बाद अपर सचिव एवं निदेशक शहरी विकास विनोद गिरी गोस्वामी ने इन सभी तैनातियों का आदेश रद्द कर दिया।
उधर, उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने मंत्री के इस फैसले की सराहना करते हुए मांग उठाई है कि ईओ के जो भी पद रिक्त हैं, उन पर भर्ती का अधियाचन तुरंत राज्य लोक सेवा आयोग को भेजा जाए। ताकि युवाओं को मौका मिल सके।