उत्तराखंड ऐसा पहला राज्य बनेगा जिसका हाईकोर्ट तहसील में होगा, अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

त्तराखंड हाईकोर्ट के नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरण की प्रक्रिया केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि यह देश की न्यायिक व्यवस्था के इतिहास में भी एक नया अध्याय जोड़ देगी। हाईकोर्ट हल्द्वानी स्थानांतरित होने पर उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन जाएगा, जहां हाईकोर्ट न तो राज्य की राजधानी में होगा और न ही किसी जिला मुख्यालय में, बल्कि यह एक तहसील में होगा।

देश के अधिकांश राज्यों में हाईकोर्ट संबंधित राज्य की राजधानी में स्थित हैं। कुछ प्रदेशों में ऐसा नहीं है तो वहां वे संबंधित जिले के मुख्यालय वाले शहर में स्थापित हैं, लेकिन हल्द्वानी जिला मुख्यालय नहीं है। वह वर्तमान में नैनीताल जिले का सबसे बड़ा शहर और आर्थिक केंद्र तो है, लेकिन प्रशासनिक दृष्टि से जिला मुख्यालय नैनीताल में है। ऐसे में हाईकोर्ट का हल्द्वानी जाना एक अनूठा उदाहरण बनेगा। उत्तराखंड का गठन वर्ष 2000 में हुआ था और तब से हाईकोर्ट नैनीताल में कार्यरत है। अब आधुनिक न्यायिक अवसंरचना, बेहतर संपर्क और विस्तृत भूमि उपलब्ध होने के कारण इसके हल्द्वानी स्थानांतरण के प्रयास चल रहे हैं।

राजधानी नहीं तो जिला मुख्यालय, लेकिन हल्द्वानी दोनों नहीं

नैनीताल। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, लखनऊ, जयपुर, भोपाल, पटना, रांची, रायपुर, चंडीगढ़, हैदराबाद, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, श्रीनगर-जम्मू जैसे अधिकांश हाईकोर्ट राज्य की राजधानियों में स्थित हैं। कुछ अपवाद अवश्य हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रयागराज में है जबकि राजधानी लखनऊ है। इसी प्रकार पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़ में है, जो दोनों राज्यों की साझा राजधानी है। कटक व अन्य कुछ हाईकोर्ट भी अपने-अपने जिला मुख्यालयों में स्थित हैं। हल्द्वानी इस दृष्टि से अलग होगा क्योंकि यह न तो उत्तराखंड की राजधानी है और न ही किसी जिले का प्रशासनिक मुख्यालय।

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नैनीताल की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा व्यापक असर
नैनीताल। हाईकोर्ट केवल एक न्यायिक संस्था नहीं है, बल्कि इससे हजारों लोगों की आजीविका भी जुड़ी हुई है। पिछले लगभग 26 वर्षों में नैनीताल की स्थानीय अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा हाईकोर्ट की गतिविधियों पर आधारित हो गया है। सबसे अधिक प्रभाव अधिवक्ताओं, उनके चैंबरों, स्टेनोग्राफरों, टाइपिस्टों, दस्तावेज तैयार करने वाले कर्मचारियों, कोर्ट से जुड़े कर्मचारियों, होटल व्यवसाय, टैक्सी संचालकों, रेस्तरां, स्टेशनरी दुकानों और किराये के मकानों पर पड़ने की संभावना है। प्रतिदिन राज्य के विभिन्न जिलों से सैकड़ों अधिवक्ता, पक्षकार और सरकारी अधिकारी नैनीताल पहुंचते हैं। इनमें से बड़ी संख्या होटल, गेस्ट हाउस रेस्टोरेंट और स्थानीय परिवहन का उपयोग करते हैं। हाईकोर्ट के स्थानांतरण के बाद यह पूरा आवागमन हल्द्वानी की ओर स्थानांतरित हो जाएगा।

नैनीताल का पर्यटन उद्योग मुख्य रूप से गर्मी और छुट्टियों के मौसम पर निर्भर रहता है, लेकिन वर्षभर होटल और गेस्ट हाउसों को हाईकोर्ट से जुड़े आगंतुकों के कारण भी नियमित ग्राहक मिलते रहे हैं। इनके कम होने से छोटे होटल, लॉज और भोजनालयों की आय प्रभावित हो सकती है।

किराये के मकानों की घट सकती है मांग
नैनीताल। हाईकोर्ट के कारण अनेक अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी और कर्मचारी वर्षों से नैनीताल में किराये पर रहते हैं। स्थानांतरण के बाद इन आवासों की मांग में गिरावट आने की संभावना है, जिससे स्थानीय मकान मालिकों की आय प्रभावित हो सकती है।

भावनात्मक जुड़ाव था महत्वपूर्ण, घट जाएगा नैनीताल का रुतबा भी
नैनीताल केवल हाईकोर्ट का वर्तमान परिसर नहीं है, बल्कि राज्य गठन के बाद न्यायिक परंपराओं का साक्षी भी रहा है। लगभग ढाई दशक से अधिक समय में यहां अनेक ऐतिहासिक फैसले हुए और यह न्यायिक पहचान का प्रतीक बन गया। इसलिए स्थानांतरण केवल भवन बदलने का मामला नहीं, बल्कि नैनीताल की सामाजिक और आर्थिक पहचान में भी बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है। हाईकोर्ट के कारण नैनीताल का नाम देश दुनिया में विशेष सम्मान का पात्र बन चुका था और नैनीताल के लिए गौरव का विषय था। प्रादेशिक और राष्ट्रीय मीडिया में हाईकोर्ट के उल्लेख के साथ बार-बार नैनीताल का नाम सम्मान के साथ आता था। अब नैनीताल को वह रुतबा भी खोना पड़ेगा।
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