उत्तराखंड निकाय चुनाव: हल्द्वानी- 7 निकायों के रिजल्ट में साख नहीं बचा सके 6 माननीय, भाजपा को सिर्फ एक ही जगह मिली जीत, खड़े हुए सवाल

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नैनीताल जिले के सात निकायों में केवल एक निकाय में भाजपा कमल का फूल खिला पाई। पार्टियों की ओर से अपने विधायकों को निकाय चुनाव जिताने का जिम्मा दिया गया था। चुनाव परिणामों ने जहां भाजपा शीर्ष नेतृत्व के माथे पर बल ला दिया है वहीं भाजपा के माननीय भी अपनी प्रतिष्ठा नहीं बचा पाए। सिर्फ हल्द्वानी में भाजपा की जीत हुई है। हालांकि नगर निगम होने के चलते यह भाजपा के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। जिले में भाजपा के पांच विधायक और कांग्रेस का एक विधायक है। सत्ताधारी भाजपा के लिए निकाय चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण था कि 2027 में फिर विधानसभा चुनाव सामने है।

 

बंशीधर भगत के लिए कहीं से राहत, कहीं से टेंशन
भाजपा के कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत के पास पालिका परिषद कालाढूंगी और नगर निगम हल्द्वानी में पार्टी प्रत्याशी की जीत का जिम्मा था। हालांकि कालाढूंगी में पार्टी का प्रदर्शन खास नहीं रहा और वह तीसरे नंबर पर काबिज रही लेकिन हल्द्वानी में पार्टी प्रत्याशी के मेयर का चुनाव जीतने के बाद बंशीधर भगत का कद और बढ़ गया है। हल्द्वानी में मेयर के लिए भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर होने के बाद भी भाजपा की जीत कहीं न कहीं विधायक के कुशल राजनीतिज्ञ की छाप छोड़ गई।

जनता के बीच पकड़ में कमजोर रहे विधायक सुमित
सुमित हृदयेश जिले में एकमात्र कांग्रेस विधायक हैं। 40 वार्डों वाले हल्द्वानी नगर निगम में कांग्रेस ने इस बार ललित जोशी को प्रत्याशी बनाया था। नगर निगम के आधे से ज्यादा वार्ड हल्द्वानी विधानसभा क्षेत्र में आने के कारण हल्द्वानी विधायक सुमित की प्रतिष्ठा दांव पर थी। कांग्रेस पदाधिकारी और विधायक ललित जोशी को जीत नहीं दिला सके। हालांकि ललित ने शुरुआती राउंड में भाजपा प्रत्याशी को कड़ी टक्कर दी।

 

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लालकुआं विधायक नहीं दिला पाए भाजपा को जीत
लालकुआं विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट के विधानसभा क्षेत्र में हल्द्वानी नगर निगम के चार वार्ड आते हैं। इनमें 18,061 मतदाता हैं। हल्द्वानी मेयर की सीट को छोड़ दिया जाए तो लालकुआं नगर पंचायत में वह भाजपा को जीत नहीं दिला सके। भाजपा के बागी प्रत्याशी ने जीत दर्ज कर पार्टी के टिकट प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए वहीं, चुनाव परिणाम ने लालकुआं विधायक के लिए आने वाले पंचायत चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव बना दिया है।

विधायक सरिता की साख पर भी पानी फिरा
नैनीताल और भवाली की सीट भी इस बार कांग्रेस के पाले में गई। दोनों पालिकाओं में भाजपा को जिताना विधायक सरिता आर्या के लिए कड़ा इम्तिहान रहा लेकिन वह अपने कद के अनुरूप प्रदर्शन करने में असफल रहीं। दोनों सीटों पर भाजपा की हार से जहां कार्यकर्ताओं को निराशा मिली वहीं विधायक की साख पर कहीं न कहीं सवालिया निशान छोड़ गई। नैनीताल और भवाली नगर पालिका नैनीताल विधानसभा क्षेत्र में आती है।

मिथक नहीं तोड़ पाए रामनगर विधायक
रामनगर नगर पालिकाध्यक्ष पद का चुनाव भाजपा कभी नहीं जीती है। इस बार भी यह मिथक बरकरार रहा। यहां निर्दलीय प्रत्याशी ने चुनाव में जीत दर्ज कर पार्टियों को आइना दिखाने का काम किया है। ज्यादा दावेदार होने के चलते कांग्रेस ने यहां किसी को टिकट नहीं दिया था। अपनी सरकार और भाजपा का विधायक होने के बाद भी पार्टी इस बार भी इतिहास बनाने से चूक गई। यह परिणाम कहीं न कहीं भाजपा विधायक की चिंता भी जरूर बढ़ा गए।

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कैड़ा दूसरी बार भी पार्टी को नहीं दिला सके जीत
आठ साल से भाजपा का चेहरा रहे भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा भीमताल पालिका के चुनाव में पार्टी को जीत नहीं दिला सके। नगर पंचायत से नगर पालिका में बदला यह निकाय लगातार दूसरी बार कांग्रेस की झोली में गया है। पार्टी का विधायक होने के बाद भी हार भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के लिए मंथन का विषय जरूर बन गया है।


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