UP: गंगा एक्सप्रेसवे में लगा रिकॉर्ड लोहा, इतने में खड़े हो जाएं 5 बुर्ज खलीफा-30 एफिल टावर, जानिए…

उत्तरप्रदेश का महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे अपने आकार और तकनीक के साथ-साथ निर्माण सामग्री के पैमाने को लेकर भी नए कीर्तिमान बना रहा है। इस एक्सप्रेसवे में इस्तेमाल हुआ लोहा इतना अधिक है कि उससे दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा जैसी करीब पांच इमारतें खड़ी की जा सकती हैं। यही नहीं, यह मात्रा एफिल टावर जैसे लगभग 30 टावर बनाने के लिए भी पर्याप्त है।

 

यूपीडा के मुताबिक गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण में करीब 2.20 लाख टन से अधिक स्टील का इस्तेमाल किया गया है। तुलना करें तो दुबई स्थित बुर्ज खलीफा के निर्माण में लगभग 55000 टन स्टील लगा था। इस हिसाब से गंगा एक्सप्रेसवे में लगा स्टील लगभग पांच बुर्ज खलीफा के बराबर है। वहीं, पेरिस के एफिल टावर में महज 7,300 टन लोहे का उपयोग हुआ था। यानी गंगा एक्सप्रेसवे में इस्तेमाल स्टील से करीब 30 एफिल टावर खड़े किए जा सकते हैं।

अगर देश के अन्य बड़े प्रोजेक्ट से तुलना करें, तो द्वारका एक्सप्रेसवे में भी बड़े पैमाने पर स्टील का उपयोग हुआ, लेकिन गंगा एक्सप्रेसवे का आंकड़ा उससे भी कहीं अधिक है, जो इसकी विशालता को दर्शाता है। करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक फैला है और 12 जिलों को जोड़ता है। 

गंगा एक्सप्रेसवे की खासियत :

14 मेजर ब्रिज, 7 रेलवे ओवरब्रिज और 32 फ्लाईओवर
165 से अधिक छोटे पुल और 450 से अधिक अंडरपास
लगभग 500 मिमी मोटी मल्टी-लेयर सड़क संरचना

तकनीक और गुणवत्ता में भी आगे

गंगा एक्सप्रेसवे में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम, स्विस सेंसर तकनीक से रियल-टाइम क्वालिटी चेक और स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट और सुरक्षा सिस्टम से पूरा मार्ग लैस है। इससे न सिर्फ निर्माण की गुणवत्ता बेहतर हो रही है, बल्कि भविष्य में यात्रा भी अधिक सुरक्षित और आरामदायक होगी।

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