राजस्थान के अजमेर से भाजपा सांसद और मोदी सरकार में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी खीरे की खेती के नाम पर करीब 99 लाख रुपये की सब्सिडी को लेकर चर्चाओं में आ गए हैं। मंत्री का दावा है कि उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा है। इस दौरान उन्होंने मीडिया के कई सवालों के जवाब भी दिए। जानते हैं…
सवाल- आपके नाम पर NHB की योजना के तहत लगभग 99.60 लाख की सब्सिडी स्वीकृत होने की जानकारी सामने आई है। क्या यह सही है?
जवाब: जी, मुझे योजना के तहत सब्सिडी मिली है। इसमें कुछ भी छिपा हुआ नहीं है। मैंने अपने प्रोजेक्ट पर सार्वजनिक रूप से बोर्ड लगाया हुआ है, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि यह परियोजना NHB की सहायता से संचालित है।
सवाल- इस सब्सिडी के संबंध में उठ रहे सवालों पर आपका क्या कहना है?
जवाब: अगर मेरे मन में कुछ गलत होता तो मैं इसे सार्वजनिक नहीं करता। सब कुछ नियमों के अनुसार और पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ है।
सवाल- आपने इस परियोजना के लिए आवेदन कब किया था?
जवाब- मैंने इस परियोजना के लिए वर्ष 2018 में आवेदन किया था। यह कोई हालिया आवेदन नहीं है, बल्कि कई वर्षों से चल रही प्रक्रिया का परिणाम है।
सवाल- क्या इस परियोजना में आपका स्वयं का निवेश भी है?
जवाब- बिल्कुल। मैं स्वयं किसान हूं और इस परियोजना के लिए मैंने बैंक से ऋण भी लिया है। यह केवल सब्सिडी आधारित परियोजना नहीं है, इसमें मेरा अपना निवेश भी शामिल है।
सवाल- क्या इस परियोजना की स्वीकृति सामान्य प्रक्रिया के तहत हुई?
जवाब- हां, परियोजना की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और पात्रता के अनुसार पूरी की गई है। मुझे किसी विशेष छूट या विशेष सुविधा का लाभ नहीं मिला।
सवाल- हितों के टकराव को लेकर उठ रहे सवालों पर आपका क्या जवाब है?
जवाब- मेरे खिलाफ लगाए जा रहे कई दावे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। योजना की प्रक्रिया नियमों के अनुसार होती है और व्यक्तिगत स्तर पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया।
सवाल- क्या आप इस परियोजना से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने को तैयार हैं?
जवाब- जहां तक सरकारी नियम अनुमति देते हैं, पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है। मेरे प्रोजेक्ट पर लगी सूचना भी इसी पारदर्शिता का प्रमाण है।
सवाल- आम किसानों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
जवाब- सरकार की योजनाएं सभी पात्र किसानों के लिए हैं। जो भी किसान पात्रता की शर्तें पूरी करते हैं, वे आवेदन करें और आधुनिक बागवानी अपनाकर इन योजनाओं का लाभ उठाएं।






