आगरा के खेरागढ़ स्थित उटंगन नदी में बृहस्पतिवार को मां दुर्गा की मूर्ति विसर्जित करने आए गांव कुसियापुर डूगरवाला के 13 युवक गहरे पानी में डूब गए। हादसे से अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद एक युवक विष्णु को बचा लिया। डेढ़ घंटे बाद पुलिस की मदद से दो युवकों ओमपाल और गगन के शव निकाले गए जबकि देर रात एक अन्य किशोर मनोज का शव मिल गया। अब भी 9 का पता नहीं चल सका है। इनमें पांच नाबालिग हैं। दशहरा पर हुए इस हादसे से इलाके में मातम पसर गया।

सूचना पर जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी और डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा माैके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नदी के पास सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। पुलिस तैनात होती तो हादसा बच सकता था। गुस्साए लोगों ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीम के नहीं पहुंचने पर जाम लगा दिया। पुलिस अधिकारियों के समझाने पर 2 घंटे बाद ग्रामीण शांत हुए।
हादसा दोपहर 1 बजे हुआ। खेरागढ़ के गांव कुसियापुर में चामड़ माता के मंदिर के पास नवरात्र में मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित की गई थी। दशहरा पर मूर्ति के विसर्जन के लिए गांव के 40-50 पुरुष, महिलाएं और बच्चे उटंगन नदी के पास पहुंचे। इनमें विष्णु (20), ओमपाल (25), गगन (24), हरेश (20), अभिषेक (17), भगवती (22), ओके (16), सचिन पुत्र रामवीर (26), सचिन पुत्र ऊना (17), गजेंद्र (17) और दीपक (15) गहरे पानी में चले गए।

ग्रामीणों के मुताबिक सभी डूबने लगे। बचाव के साधन नहीं होने की वजह से वह लोग कुछ नहीं कर सके। बाद में कुछ ग्रामीणों ने हिम्मत की और पानी में कूदकर विष्णु को बाहर निकाल लिया। हालत गंभीर होने पर उसे आगरा एसएन मेडिकल काॅलेज की इमरजेंसी रेफर कर दिया गया।
बाकी के डूबने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। करीब डेढ़ घंटे बाद ओमपाल और गगन को पानी से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। नदी में डूबे अन्य 9 युवकों की तलाश के लिए 6 घंटे बाद एसडीआरएफ की टीम पहुंची। पुलिस ने भी गोताखोरों की मदद से तलाश की लेकिन रात तक किसी का पता नहीं चल सका था। सभी के परिवारों में कोहराम मचा है।

हाथ पकड़कर बढ़ रहे थे आगे
गांव कुशियापुर में 4 फुट की दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने के बाद हर दिन आस्था का सैलाब उमड़ रहा था। 10 दिन तक सुबह-शाम की आरती के बाद गांव की गलियों में देवी के गीतों से माहाैल भक्तिमय हो जाता था। दशहरा आया तो प्रतिमा विसर्जन के लिए क्या बड़े, क्या छोटे, सब नदी किनारे चल पड़े। मगर हादसे की जानकारी आई तो पूरे गांव में करुण क्रंदन गूंज उठा।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उटंगन नदी में कई गड्ढे हैं। विसर्जन के लिए सभी हाथ पकड़कर आगे बढ़ रहे थे। अचानक एक का हाथ फिसला। उसके साथ ही सभी पानी में समा गए। उटंगन नदी में जिस स्थान पर डूबने की घटना हुई, वहां से गांव कुशियापुर तीन किलोमीटर की दूरी पर है। गांव के लोगों ने बताया कि नदी पर आने के बाद मूर्ति को पानी में ले जाना था। इसके लिए 11 से 15 युवक और किशोर तैयार हुए। किनारे के पास पानी काफी कम था। इस कारण अंदर चले गए। बाद में पानी गहरा होने लगा। मगर मूर्ति भी 4 फुट की थी। इस पर बीच पानी में ले जाना चाह रहे थे।

थाना खेरागढ़ क्षेत्र में उटंगन नदी के किनारे मूर्ति विसर्जन स्थल बनाया था जहां पर पुलिस की ड्यूटी लगी थी। मूर्ति विसर्जन स्थल से कुछ दूर आगे बीच नदी में जाकर लोगों ने मूर्ति विसर्जन किया। वहां पर कुछ लोग डूब गए। सूचना पर पुलिस पहुंची। स्थानीय गोताखोर और लोगों की मदद से रेस्क्यू आपरेशन शुरू किया गया। दो की मृत्यु हुई है। एक को बचाया गया है। – अतुल शर्मा, डीसीपी पश्चिमी जोन







