मेघालय में हनीमून के दौरान पति की हत्या की आरोपी सोनम रघुवंशी के आचरण पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़े सवाल उठाए हैं। शीर्ष अदालत ने सोनम रघुवंशी को कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण कर मुकदमे का सामना करने का सुझाव दिया। मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली सोनम को जून, 2025 में अपने व्यवसायी पति राजा रघुवंशी की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। यह जोड़ा पिछले साल 23 मई को मेघालय के सोहरा इलाके में छुट्टियों के दौरान लापता हो गया था। इसके बाद 2 जून, 2025 को राजा का शव एक गहरी खाई में मिला।
- जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सोनम रघुवंशी से पूछा- पति पर हमले के बाद आपने क्या किया?
- पीठ ने कहा- जमानत पर गुण-दोष के आधार पर आदेश देंगे या सोनम को आत्मसमर्पण का निर्देश देंगे।
सोनम के वकील को दो-टूक, सरेंडर करो या मुकदमे…
शीर्ष अदालत ने साफ किया कि वह या तो गुण-दोष के आधार पर विचार कर आदेश पारित करेगी या सोनम को आत्मसमर्पण कर मुकदमे का सामना करने का निर्देश देगी। पीठ ने सोनम के वकील से कहा, हम यह बात आपके सामने इसलिए रख रहे हैं ताकि आपको अचानक कोई हैरानी न हो और साथ ही आप हमारी सोच भी समझ सकें। आप अपने मुवक्किल से निर्देश लेकर अदालत के सामने वापस आएं।
गलत धारा लिखी होने के कारण सोनम को मिली थी जमानत
हाईकोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत इस आधार पर बरकरार रखी थी कि पुलिस गिरफ्तारी के उचित लिखित आधार देने में विफल रही। गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) (हत्या की सजा) के बजाय गलती से धारा 403 दर्ज हो गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने न्यायिक दिमाग का इस्तेमाल न करना करार दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि यह केवल एक क्लर्क के टाइपिंग की गलती थी और हत्या के इतने गंभीर मामले में केवल इस आधार पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
अभी अभियोजन के आरोपों की विस्तृत जांच नहीं
मंगलवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वह इस स्तर पर अभियोजन पक्ष के आरोपों की विस्तृत जांच का इच्छुक नहीं है। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी। दूसरी ओर, सोनम के वकील ने तर्क दिया कि इस मामले को मीडिया ने तूल दिया है और इसमें केवल परिस्थितिजन्य सबूत ही हैं।
जमानत पर रोक से इन्कार कर चुका है सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 3 जुलाई को हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया था। 9 जुलाई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस सवाल को बड़ी पीठ को भेजने का संकेद दिया था कि क्या महज टाइपिंग की गलती के कारण किसी गिरफ्तारी को अवैध ठहराया जा सकता है और आरोपी को जमानत दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया था कि वह इस बात की बारीकी से जांच करेगा कि क्या अरेस्ट मेमो में टाइपिंग की गलती के आधार पर सोनम को जमानत देना हाईकोर्ट के लिए सही था।
राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया, शादी के तुरंत बाद यह जोड़ा हनीमून के लिए मेघालय गया था। आरोपी महिला पति को पहाड़ियों में एक सुनसान जगह पर ले गई। सोनम के प्रेमी की ओर से किराए पर लिए गए तीन लोग भी उनके पीछे पहुंचे। वहां पति की हत्या कर दी गई और उसके बाद शव को खाई में फेंक दिया गया। मौत खाई में फेंकने से नहीं, बल्कि पहले ही हत्या कर देने से हुई थी। आरोपी महिला मौके से भाग गई और बाद में गाजीपुर में अपने प्रेमी के कहने पर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सोनम अपनी गिरफ्तारी के कारणों से पूरी तरह वाकिफ थी।






