दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के दक्षिणी परिसर के पास सत्य निकेतन की एक संकरी गली में लड़कों के छात्रावास के रूप में इस्तेमाल हो रही 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत रविवार को भरभरा कर ढह गई। जमींदोज हुई इस इमारत हादसे में सात लोगों की मौत हो गई। इस हादसे का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें बिल्डिंग गिरने के बाद धूल का गुबार उठता दिख रहा है।
सत्य निकेतन इमारत ढहने पर कॉकरोच जनता पार्टी ने की यह मांगें
सत्य निकेतन इमारत ढहने पर कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि जवाबदेही न होने से ऐसी घटनाएं बार-बार होती हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी इसे हर साल होने वाली घटना बताया। पार्टी ने सात मांगें रखी हैं, जिसमें स्वतंत्र आपराधिक जांच पहली है। सीजेपी के मुताबिक, सिर्फ़ इस घटना की ही नहीं, बल्कि पीजी मालिकों, नेताओं और दूसरे लोगों के बीच बने बड़े नेटवर्क की भी जांच होनी चाहिए। दूसरी मांग यह है कि सरकार को दिल्ली और पूरे देश की सभी इमारतों का इंजीनियरिंग-लेवल का स्ट्रक्चरल ऑडिट करवाना चाहिए, जिसमें स्कूलों, कॉलेजों और उन जगहों पर खास ध्यान दिया जाए जहां छात्र पढ़ते और रहते हैं। देश का भविष्य हमारे युवा हैं। उन्हें सुरक्षित माहौल देना हर किसी की ज़िम्मेदारी है। तीसरी मांग उन 13 ज़िला कमेटियों के बारे में है जो हौज़ रानी घटना के बाद बनाई गई थीं। उनका काम ऐसी सभी इमारतों का ऑडिट करना, सरकार को रोज़ाना और हफ़्ते की रिपोर्ट भेजना और नियमों को लागू करना था। ऐसा नहीं हुआ। तीन महीने बीत चुके हैं और कमेटी निष्क्रिय हो गई हैं। हमने जांच की, तो पता चला कि काम नहीं हुआ है। इसलिए, इन कमेटियों के सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने चाहिए, जिसमें यह जानकारी हो कि कितने सर्वे किए गए, कितनी इमारतें सील की गईं, क्या कार्रवाई की गई।
हरिराम की पत्नी हैं पीजी की मालकिन
घटना के विरोध में एबीवीपी का प्रदर्शन
दिल्ली में छात्रों की आवासीय सुविधाओं पर उच्चस्तरीय संयुक्त बैठक
दिल्ली के मंत्री आशीष सूद ने बताया कि उपराज्यपाल और संबंधित विभागों के साथ संयुक्त बैठक हुई। बैठक में पुलिस और NDRF की तैनाती पर चर्चा हुई। प्रतिक्रिया समय को कम करने के तरीकों पर भी विचार किया गया। छात्रों की आवासीय सुविधाओं में कमी दूर करने पर भी बात हुई। जस्टिस गाबा समिति की रिपोर्ट के आधार पर पीजी और कोचिंग संस्थानों के विनियमन पर भी चर्चा हुई।






