दिल्ली में प्रदर्शन और हिंसा: डिजिटल सुरागों पर पुलिस की पैनी नजर, कथित चैट से कड़ियां जोड़ने में जुटीं टीमें

Spread the love

कॉकरोच जनता पार्टी के चलो संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा की जांच में दिल्ली पुलिस ने एक नया मोड़ लिया है। पुलिस प्रदर्शनकारियों के कुछ कथित चैट संदेशों और एक सीक्रेट एप के इस्तेमाल की पड़ताल कर रही है। यह जांच उन संदेशों पर केंद्रित है, जिनमें संभावित इंटरनेट बंदी की स्थिति में संपर्क बनाए रखने की तैयारी और आंदोलन के लिए जान देने जैसी बातें कही गईं हैं।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ता किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इन कथित चैट संदेशों की प्रामाणिकता और उनमें शामिल व्यक्तियों की पहचान का सत्यापन किया जा रहा है। पुलिस पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सामने आए संदेश वास्तविक हैं और किसी गलत सूचना या दुष्प्रचार का हिस्सा। एक वरिष्ठ पुलिस सूत्र ने बताया कि कुछ कथित संदेशों में इंटरनेट सेवाएं बाधित होने की स्थिति में संपर्क बनाए रखने और प्रदर्शन के दौरान सूचनाओं के आदान-प्रदान के वैकल्पिक तरीकों पर चर्चा की गई है। यह दर्शाता है कि प्रदर्शनकारियों ने संभावित इंटरनेट शटडाउन के लिए पहले से ही योजना बनाई थी।

पुलिस को जांच में पता लगा है कि समूह चैट उस समय के आसपास की हैं जब हिंसा हुई थी। पुलिस के अनुसार, इस हिंसा में 118 पुलिसकर्मी और 70 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। इसके अलावा 15 से 20 सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचा था। एक संदेश में कहा गया है कि प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने के बाद फोन में नेटवर्क नहीं हो सकता है, जैसा कि पिछली बार भी हुआ था, क्योंकि पुलिस ने नेटवर्क जैमर का इस्तेमाल किया था। इसलिए, जिस समूह के साथ प्रदर्शनकारी आए हैं, उसके संपर्क में बने रहना अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने ऐसे कुछ मोबाइल एप्स का भी सुझाव दिया था जो ब्लूटूथ सिग्नल के जरिए काम कर सकते हैं। इन एप्स के लिंक भी उसी चैट में साझा किए गए थे। पुलिस इन एप्स की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। एक अन्य संदेश में यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि समूह के सभी लोगों के फोन में वही एप पहले से इंस्टॉल हो और प्रदर्शन स्थल में प्रवेश करने से पहले सभी आपस में जुड़ जाएं। यह दर्शाता है कि प्रदर्शनकारियों ने एक संगठित तरीके से संचार की योजना बनाई थी।

अन्य साक्षयों का विश्लेषण किया जा रहा
पुलिस के अनुसार, उन डिजिटल सामग्रियों का विश्लेषण सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन से प्राप्त वीडियो, मोबाइल फोन से बनाए गए वीडियो और जांच के दौरान एकत्र किए गए अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ किया जा रहा है। यह एक व्यापक जांच का हिस्सा है जिसमें विभिन्न प्रकार के साक्ष्यों को एक साथ जोड़ा जा रहा है। संदेशों में कुछ राजनीतिक टिप्पणियां और लोगों को आंदोलन में शामिल होने के आह्वान भी शामिल है। एक संदेश में तो यह दावा किया गया कि अगला दिन मोदी सरकार का आखिरी दिन होगा। कुछ अन्य संदेशों में आंदोलन के दौरान जान देने तक की तैयारी जताई गई है। पुलिस इन टिप्पणियों के संदर्भ की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे केवल व्यक्तिगत विचार थे या प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं से जुड़े किसी समन्वित प्रयास का हिस्सा थे।

फॉरेंसिक जांच भी करवाई जा रही
पुलिस के अनुसार डिजिटल संचार की फॉरेंसिक जांच जारी है और साइबर विशेषज्ञ संदेशों की उत्पत्ति, प्रसार तथा प्रामाणिकता की पुष्टि करने में जांचकर्ताओं की सहायता कर रहे हैं। हर संदेश को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने से पहले उसका तकनीकी सत्यापन किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार जांच पूरी तरह साक्ष्य आधारित है और आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के दौरान एकत्र पुष्टिकारक सामग्री पर निर्भर करेगी। पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों को ध्यान में रख रही है।

Spread the love
और पढ़े  दिल्ली एम्स- एम्स का कमाल, 70 वर्षीय ब्रेन डेड महिला के दोनों गुर्दे 56 वर्षीय मरीज में प्रत्यारोपित
  • Related Posts

    जनगणना में पूछे जाएंगे कौन से 40 सवाल?,जाति क्या, कोविड टीका कहां लगवाया?, गृह मंत्रालय ने जारी की सूची

    Spread the love

    Spread the loveकेंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के दौरान जनसंख्या की गणना के चरण में पूछे जाने वाले 40 सवालों की सूची जारी कर दी है। सरकारी आदेश के मुताबिक,…


    Spread the love

    आप छोड़ने पर हरभजन का बड़ा खुलासा:- बोले- मेरी बात नहीं सुनी गई..

    Spread the love

    Spread the loveपूर्व क्रिकेटर और भाजपा नेता हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने की वजह पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि ‘आप’ में उनके…


    Spread the love