दिल्ली में सस्ती बिजली के सरकारी दावों के बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने बिजली सब्सिडी के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2022-23 की अवधि से संबंधित रिपोर्ट के अनुसार, सब्सिडी का लाभ वास्तविक और पात्र उपभोक्ताओं तक सीमित करने के लिए पर्याप्त जांच नहीं की गई। कैग ने पाया कि लंबे समय से शून्य बिजली खपत वाले कनेक्शनों पर भी सरकार ने 42.26 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी।
रिपोर्ट के अनुसार, 2014-15 के बाद दिल्ली में बिजली टैरिफ में संशोधन नहीं हुआ। बिजली खरीद की लागत और उपभोक्ताओं से वसूली के बीच अंतर बढ़ने से डिस्कॉम की नियामक परिसंपत्तियां बढ़ती गईं। इनकी राशि 2019-20 के 9,063 करोड़ से बढ़कर 31 मार्च 2021 तक 27,200.37 करोड़ हो गई। कैग ने चेताया कि इस अंतर का समय पर समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में उपभोक्ताओं पर भारी टैरिफ बढ़ोतरी का बोझ पड़ सकता है या सरकार को राजकोष से बड़ी रकम देनी पड़ सकती है।






