दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा। वर्ष 2025 के चुनाव परिणाम को दोहराते हुए एबीवीपी ने चार में से तीन प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की। अध्यक्ष पद पर यश डबास, सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्यराज सिंह ने जीत दर्ज कर तीनों पद एबीवीपी के खाते में डाल दिए, जबकि एनएसयूआई इस बार एक भी सीट नहीं जीत सकी। उपाध्यक्ष पद पर एनएसयूआई से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन ने बड़ी जीत दर्ज की। डूसू में 17 साल बाद किसी निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई है।
खुलने ही नहीं दिया एनएसयूआई का खाता, निर्दलीय दीपांशु की जीत ने दिखाया आईना
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में चारों केंद्रीय सीटों पर वापसी की कोशिश कर रही एनएसयूआई का चुनावी गणित आपसी कलह और बगावत ने बिगाड़ दिया। टिकट बंटवारे से नाराज दावेदारों के मैदान में उतरने का सीधा असर संगठन के प्रत्याशियों पर पड़ा। नतीजा यह रहा कि एनएसयूआई एक भी केंद्रीय सीट अपने नाम नहीं कर सकी। सबसे बड़ा उलटफेर उपाध्यक्ष पद पर हुआ, जहां एनएसयूआई से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज कर संगठन को बड़ा झटका दिया।
अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई ने राजस्थान के मीणा समुदाय से विजय शंकर मीणा को मैदान में उतारकर डूसू चुनाव में लंबे समय से चर्चा में रहने वाले जाट-गुर्जर समीकरण को चुनौती देने की कोशिश की। हालांकि नतीजों में जातीय समीकरण का असर फिर दिखाई दिया। जाट उम्मीदवार यश डबास ने 24,576 वोट हासिल किए, जबकि विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। दसंयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के राजपूत समुदाय से आने वाले लक्ष्य राज सिंह विजयी रहे। उन्होंने एनएसयूआई के बागी विशेष यादव को हराया।
चुनाव परिणामों के बाद एनएसयूआई भी मान रही है कि संगठन की अंदरूनी खींचतान का फायदा एबीवीपी को मिला। चुनाव से पहले दीपांशु शौकीन, विशेष यादव और समर्थ बेनीवाल समेत कई दावेदारों की टिकट को लेकर नाराजगी सामने आई थी। एनएसयूआई के अनुसार, दीपांशु को अध्यक्ष पद का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने यश डबास के सामने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। वह उपाध्यक्ष पद से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन संगठन ने उनकी जगह वीर चतरथ को टिकट दिया।
डूसू चुनाव में नोटा ने कई प्रमुख सीटों के चुनावी गणित पर असर डालने की संभावनाएं पैदा की हैं। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पर कुल 23,942 छात्रों ने नोटा का विकल्प चुना। इन सभी सीटों पर नोटा को मिले मत विजेता और निकटतम प्रतिद्वंद्वी के बीच जीत के अंतर से अधिक रहे।
हॉस्टल, सुरक्षित आवास और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों के बीच हुए चुनाव में अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के यश डबास ने एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को 2,053 मतों के अंतर से हराया। यश डबास को 24,576, जबकि विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। शुरुआत में दोनों के बीच कड़ा मुकाबला रहा। कई चरणों में दोनों उम्मीदवारों के बीच अंतर बेहद कम रहा, जिससे मुकाबला आखिरी दौर तक रोमांचक बना रहा। हालांकि, बाद के चरणों में एबीवीपी ने बढ़त मजबूत कर ली। गौरतलब है कि पिछले 16 वर्षों में 11 बार एबीवीपी ने अध्यक्ष पद पर कब्जा किया है।
उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने एकतरफा जीत दर्ज की। उन्होंने एबीवीपी के ईशू मौर्या को 13,705 मतों के बड़े अंतर से हराया। शुरुआत से ही दीपांशु की बढ़त मजबूत रही। एनएसयूआई ने इस सीट पर वीर चतरथ को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें 4,313 वोट ही मिले। यह संख्या नोटा को मिले 4,359 वोट से भी कम रही। 17 साल बाद किसी निर्दलीय को जीत मिली है। वर्ष 2009 में एबीवीपी समर्थित मनोज चौधरी ने अध्यक्ष पद जीता था।
सचिव पद पर एबीवीपी की रिया छाबड़ी ने एनएसयूआई की नम्रता चौधरी को 6,789 मतों से पराजित किया। रिया को 21,650 और नम्रता को 14,869 वोट मिले। दोनों संगठनों ने इस पद पर महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था।
संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के लक्ष्यराज सिंह ने समाजवादी पार्टी के छात्र संगठन के उम्मीदवार विशेष यादव को 827 मतों से हराया। लक्ष्यराज को 16,615, जबकि विशेष यादव को 15,778 वोट मिले। विशेष यादव एनएसयूआई से टिकट की मांग कर रहे थे।
मतगणना शनिवार सुबह आठ बजे निर्धारित समय पर शुरू हुई। कुल 20 राउंड की गणना के बाद शाम करीब चार बजे परिणाम घोषित किए गए। शुरुआती रुझानों में अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई और एबीवीपी के बीच कड़ा मुकाबला रहा। कई राउंड में दोनों के बीच अंतर बेहद कम रहा। 13वें राउंड के बाद एबीवीपी ने बढ़त बनानी शुरू की और 17वें राउंड के बाद यश डबास की जीत लगभग तय हो गई।
इस चुनाव में नोटा को भी बड़ी संख्या में वोट मिले। नोटा को कुल 23,942 मत मिले, जबकि आइसा और एसएफआई के चारों उम्मीदवारों को मिलाकर 22,331 वोट ही प्राप्त हुए।
| पद | एनएसयूआई | एबीवीपी | आइसा-एसएफआई | निर्दलीय |
|---|---|---|---|---|
| अध्यक्ष | 22,523 | 24,576 | 5,377 | – |
| उपाध्यक्ष | 4,313 | 16,910 | 2,383 | 30,615 |
| सचिव | 14,869 | 21,650 | 8,734 | – |
| सहसचिव | 15,206 | 16,615 | 5,837 | 15,778 |
कुल नोट: 23,942
छात्रों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता
यह जीत समन्वय, राष्ट्रभक्ति और संगठन की सामूहिक शक्ति की जीत है। अब छात्रों की सुरक्षा मेरी पहली प्राथमिकता होगी। सत्या निकेतन की घटना को देखते हुए हर कॉलेज, हॉस्टल और पीजी की सुरक्षा जांच जरूरी है। ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए काम करूंगा। पिछली बार की तरह इस बार भी 3-1 से जीत मिली है। अगली बार चारों सीटें जीतने का लक्ष्य रहेगा। यश डबास, डूसू अध्यक्ष, एबीवीपी
यह जीत दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के मुझ पर अटूट विश्वास, मेरी कड़ी मेहनत और जमीनी संघर्ष का परिणाम है। चुनाव के दौरान मैंने छात्रों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया। अब छात्रों से किए वादों को पूरा करना मेरी जिम्मेदारी है। उनकी समस्याओं को डूसू के सामने मजबूती से उठाऊंगा। डूसू को छात्रों के प्रति जवाबदेह बनाने और उनकी आवाज बनने के लिए लगातार काम करूंगा। – दीपांशु शौकीन, डूसू उपाध्यक्ष, निर्दलीय
यह जीत मेरे लिए बेहद खुशी का क्षण है। छात्रों ने मुझ पर भरोसा जताया है और इसे कायम रखना मेरी जिम्मेदारी है। महिला सुरक्षा मेरी पहली प्राथमिकता होगी। पीजी, हॉस्टल और कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने के साथ छात्रों की रोजमर्रा की समस्याओं पर भी काम करूंगी। राजनीतिक मुद्दों से अलग छात्रों की वास्तविक समस्याओं को प्राथमिकता दूंगी और उनके समाधान के लिए लगातार आवाज उठाऊंगी। – रिया छाबड़ी, डूसू सचिव, एबीवीपी
अंतरराष्ट्रीय हैंडबाल खिलाड़ी होने के नाते डीयू में खेल सुविधाओं को बेहतर करना मेरी प्राथमिकता रहेगी। स्पोर्ट्स कोटे से दाखिला लेने वाले छात्रों समेत सभी खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं दिलाने के लिए काम करूंगा। खिलाड़ियों को अभ्यास, खेल सामग्री और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी नहीं होने दूंगा। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का बेहतर माहौल मिले, इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने उनकी समस्याएं मजबूती से उठाऊंगा। लक्ष्यराज सिंह, डूसू संयुक्त सचिव, एबीवीपी
डूसू चुनाव का परिणाम विद्यार्थियों के विश्वास और एबीवीपी की मेहनत का परिणाम है। हमारे कार्यकर्ताओं ने पूरी एकजुटता के साथ लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ा। विद्यार्थियों ने समरसता, राष्ट्रहित और छात्रहित के मुद्दों पर अपना भरोसा जताया है। अभाविप छात्रों की समस्याओं को लेकर लगातार काम करती रहेगी और इस जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाएगी। – डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी, राष्ट्रीय महामंत्री, एबीवीपी
डूसू चुनाव में आइसा-एसएफआई गठबंधन ने तीसरी ताकत के रूप में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। छात्रों ने बड़ी संख्या में हमारे उम्मीदवारों को समर्थन दिया। हमारा मानना है कि शिक्षा, समानता और छात्र अधिकारों के मुद्दों पर सभी लोकतांत्रिक संगठनों को एकजुट होकर काम करना चाहिए। हम छात्र हितों के लिए अपना आंदोलन आगे भी जारी रखेंगे।– आइसा






