गुजरात के अहमदाबाद से लगभग दो सौ किलोमीटर दूर बनासकांठा जिले में बसा वडिया गांव आज भी ऐसी दर्दनाक और कड़वी सच्चाई से जूझ रहा है, जहां की लड़कियों के सामने केवल दो ही विकल्प बचे हैं-या तो बचपन की सगाई या फिर जिस्मफरोशी का दलदल।
लगभग 750 की आबादी वाले इस गांव में आज भी हर सुबह पुरुष (पिता, भाई या पति) पालनपुर-थराद राजमार्ग पर कतार में खड़े होकर ट्रक चालकों और राहगीरों को अपनी ही घर की महिलाओं के लिए ग्राहक के रूप में तलाशते हैं, जबकि देह व्यापार में लिप्त महिलाएं घरों के अंदर ही रहती हैं।
वर्ष 2012 में विचर्टा समुदाय समर्थन मंच संस्था की संस्थापक मित्तल पटेल और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रयासों से गांव में पहला सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया गया था। तब से लेकर अब तक कई परिवारों ने इस धंधे को छोड़ दिया है। बोरवेल और झीलों को पुनर्जीवित करने, कृषि भूमि को उपजाऊ बनाने और परिवारों को अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराने जैसे प्रयासों से लोगों को आय के नए साधन मिले हैं।





