मन की बात- बिहार का मखाना पहुंच रहा ग्रीस: मन की बात कार्यक्रम में बोले पीएम मोदी, त्योहारी मौसम के लिए की क्या अपील?

प्रधानमंत्री मोदी ने आकाशवाणी से ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश-विदेश के लोगों से अपने विचार साझा किए। यह मासिक रेडियो कार्यक्रम की 139वीं कड़ी है। पीएम मोदी मे इस कार्यक्रम में कहा कि आज से 12 वर्ष पहले इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी ये यात्रा निरंतर जारी है। इस यात्रा के सहयात्री और मार्गदर्शकआप ही हैं।

 

 

देशवासियों को दी त्योहारों की शुभकामनाएं

पीएम मोदी ने कहा, ”आने वाले दिनों में दिवाली, छठ महापर्व और कई दूसरे त्योहारों की रौनक रहेगी। आप स्वस्थ और सुरक्षित रहकर पूरे परिवार के साथ त्योहार मनाएं, और, दूसरों को भी अपनी खुशी में शामिल करें। मैं आप सभी को आने वाले त्योहारों की शुभकामनाएं देता हूं। मुझे हमेशा की तरह आपके संदेशों और सुझावों का इंतजार रहेगा। आपके सुझावों से ‘मन की बात’ को नए विषय मिलते हैं, नई दिशा मिलती है।”

 

 

पीएम मोदी ने किया भाई परमानंद जी का जिक्र

उन्होंने कहा, ”भारत की माटी में ऐसे कितने ही महान व्यक्तित्व पैदा हुए जिन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। ऐसे ही एक महान व्यक्तित्व हैं- भाई परमानंद जी। कुछ ही दिनों बाद 4 नवंबर को हम उनकी 150वीं जयंती मनाएंगे। भाई परमानंद जी की प्रेरणा और आदर्श का बड़ा स्त्रोत था आर्य समाज से उनका गहरा जुड़ाव। 20वीं सदी के बिल्कुल शुरुआती कालखंड में ही भाई परमानंद जी आर्य समाज के काम से दक्षिण अफ्रीका गए थे। वहां उनकी मुलाकात पूज्य बापू से भी हुई थी। उन्होंने गुयाना में गिरमिटिया समाज के बीच भी काम किया, जो उस समय आर्य समाज का एक बड़ा केंद्र था। मुझे भी गुयाना की अपनी यात्रा के समय आर्य समाज के स्मारक पर जाने का सौभाग्य मिला था | भाई परमानंद जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई थी। कहा जाता है कि भाई परमानंद जी ने ही लाला हरदयाल जी को अमेरिका जाने के लिए मनाया था। वे गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से भी एक थे । आजादी की लड़ाई में उनका प्रभाव इतना ज्यादा था कि अंग्रेजों ने उन्हें काला पानी की सजा दे दी थी। उनकी एक किताब है ‘आपबीती: काले पानी की कारावास कहानी’। स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को समझने के लिए ये किताब जरूर पढ़नी चाहिए। भाई परमानंद जी ने सजा खत्म होने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में कदम बढ़ाया। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि उन्होंने वीर भगत सिंह को भी पढ़ाया था। बाद के समय में वे कई वर्षों तक हिन्दू महासभा से भी जुड़े रहे। यानि गांधी जी से लेकर गुयाना तक, गदर से लेकर अंडमान तक उनका व्यक्तित्व बहुत प्रेरणादायक है। मैं भाई परमानंद जी को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। युवा साथियों से मेरा आग्रह है कि वे उनके बारे में जानें और दूसरों को भी प्रेरित करें।”

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महर्षि वाल्मीकि की सीखों पर डाला प्रकाश

उन्होंने कहा, ”कल 26 अक्तूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती है। हजारों वर्ष बीत गए, लेकिन महर्षि वाल्मीकि की रामायण आज भी हमें कुछ नया सिखाती है । महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से हमें जीवन की गहरी सीख दी है। एक ओर वे निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश देते हैं, तो दूसरी ओर सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता का महत्व समझाते हैं। वाल्मीकि रामायण में भगवान राम का चरित्र इन मूल्यों का बहुत सुंदर उदाहरण है। भगवान राम ने माता शबरी के प्रेम और भक्ति को अपनाया। निषादराज की मित्रता को सम्मान दिया। सबको साथ लेकर चलने का भाव, ये आदर्श आज भी हमें दिशा दिखाते हैं। इस भावना का प्रतिबिंब अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भी दिखाई देता है। वहां महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी के मंदिर भी बनाए गए हैं। मुझे संतोष है कि अयोध्या में एयरपोर्ट का नाम भी महर्षि वाल्मीकि जी के नाम पर ही रखा गया है। ये प्रयास हमारी उसी महान परंपरा को समृद्ध करते हैं, जिसमें सेवा, समरसता और करुणा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।”

नॉर्थ-ईस्ट में कैसे बढ़ी मोटे अनाज की खेती?

उन्होंने कहा, ”आप सभी को याद होगा कि भारत के आह्वान पर साल 2023 को ‘इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स’ के रूप में मनाया गया था। इसे पूरी दुनिया में बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। इस पहल के जरिए लोगों ने जाना कि सुपर फूड श्रीअन्न, यानि मिलेट्स, हमारी अपनी संस्कृति से कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं। नॉर्थ-ईस्ट में भी मिलेट्स की खेती की एक समृद्ध परंपरा रही है। लेकिन समय के साथ लोग इससे दूर हो रहे थे। अब ये स्थिति बदल रही है। मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले में खांडुली नाम का एक गांव है। यहां कई पीढ़ियों से मिलेट्स, स्थानीय खान-पान परंपरा का अहम हिस्सा रहे हैं। लेकिन कुछ समय से, यहां इनकी खेती करने वाले किसानों की संख्या कम हो रही थी, ऐसे में, यहां की दो सहेलियों ने एक नई पहल की। उन्होंने मिलेट्स से नए प्रोडक्ट्स बनाने पर ध्यान दिया। मिलेट्स का वैल्यू एडिशन करते हुए उन्होंने कुकीज, केक और मफिंस के साथ-साथ मिलेट्स से बने बेबी फूड भी तैयार किए | इससे मिलेट्स से बने प्रो़क्ट्स की बिक्री बढ़ी और मिलेट्स की मांग भी बढ़ने लगी | ऐसे में यहां के किसानों ने भी फिर से मिलेट्स की खेती करना शुरु कर दिया है।”

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उन्होंने कहा, ”मेघालय के ही पश्चिम गारो हिल्स जिले के सादोलपाड़ा गांव में भी कुछ नए प्रयास हो रहे हैं। यहां के किसान चेकजिंग संगमा ने, मिलेट्स का महत्व समझते हुए आधुनिक तरीकों से इसकी खेती शुरु की है। इससे उनकी आय भी बढ़ी है और गांव में भी एक जागरुकता आई है। इसी तरह नगालैंड के कोहिमा का एक गांव है केजोमा। इस गांव में एक दशक से भी ज्यादा समय से मिलेट्स की खेती बंद थी। इसके चलते यहां एक पूरी पीढ़ी इस पारंपरिक फसल से अनजान रह गई। सोचिए, जिस फसल को उनके दादा-दादी उगाते थे, उसे गांव वाले ही भूलने लगे। साल 2024 में यहां के लोगों ने मिलेट्स की खेती फिर से शुरू की। 2025 में केजोमा ने अपना पहला मिलेट्स फेस्टिलव मनाया।”

पीएम मोदी बोले- पटेल जयंती पर रन फॉर यूनिटी से मदबूत होती है एकता

उन्होंने कहा, ”कुछ ही दिनों बाद 31 अक्तूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है। इस दिन को देश ‘एकता दिवस’ के तौर पर मनाता है। इस अवसर पर देशभर में ‘एकता दौड़’ यानि ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन होता है | ‘रन फॉर यूनिटी’ हमारी एकता को मजबूत करने का, देश के प्रति अपने संकल्प को दोहराने का, एक बहुत बड़ा मौका है। मेरा आप सभी से आग्रह है कि इस बार भी ‘रन फॉर यूनिटी’ में बढ़-चढ़कर के हिस्सा लें। अपने परिवार, अपने मित्रों और आस-पास के लोगों को भी अपने साथ जोड़ें।”

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