आहट बड़ी आपदा की?: नासिक में फिर कांपी धरती, महाराष्ट्र में एक महीने में 25 से ज्यादा बार लगे भूकंप के झटके

महाराष्ट्र के नासिक जिले में सोमवार को कुछ हिस्सों में भूकंप के दो हल्के झटके महसूस किए गए। यह जानकारी अधिकारियों ने दी। उन्होंने कहा कि शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें किसी की जान नहीं गई और न ही कोई संपत्ति का नुकसान हुआ।

कब झटके महसूस किए गए? 
बता दें कि नासिक राज्य की राजधानी मुंबई से 180 किलोमीटर दूर है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, सुबह 5.06 बजे और दोपहर 12.40 बजे  2.5 और 3 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। इसकी गहराई पांच किलोमीटर नीचे दर्ज किए गए है।

क्या पहले भी महसूस किए गए झटके? 
जिला प्रशासन के अनुसार, जिले के पेठ, सुरगाणा और डिंडोरी तालुका के कुछ हिस्सों में झटके महसूस किए गए। इससे पहले, नासिक में 25 से 28 जुलाई के साथ-साथ 6, 8, 10 और 14 अगस्त को भी भूकंप के झटके दर्ज किए गए थे। उस समय सुरगाणा तालुका के भादर और डिंडोरी तालुका के नानाशी में घरों की दीवारों में दरारें आ गई थीं।

 

 

दो हफ्तें से लगातार आ रहे हैं भूकंप
बता दें कि महाराष्ट्र में पिछले दो हफ्तें से लगातार छोटे-छोटे भूकंप आ रहे हैं। सबसे तेज झटके नासिक और पालघर में महसूस किए गए हैं। एक्सपर्ट्स इसे अर्थक्वेक स्वार्म (भूकंपों का झुंड) कहते हैं। आसान शब्दों में कहें तो, यह भूकंपों का एक झुंड हो सकता है।

 

कितनी बार भूकंप आए?
पिछले एक महीना में महाराष्ट्र में भूकंप के 25 से ज्यादा झटके महसूस किए गए। इनकी तीव्रता 2 से 4.3 के बीच थी। ये भूकंप जमीन के नीचे लगभग 5 से 8 किलोमीटर की गहराई पर आए।

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सबसे तेज कहां आया भूकंप? 
इस दौरान सबसे तेज भूकंप 8 अगस्त को नासिक में आया, जिसकी तीव्रता 4.3 थी। यह भूकंप 5 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया था।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने क्या निर्देश दिया था? 
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले हफ्ते प्रशासन को निर्देश दिया था कि वे नासिक और पालघर जिलों में भूकंपीय गतिविधियों का व्यापक आकलन करें और लोगों, ख़ासकर छात्रों के बीच जागरूकता अभियान तेज करें।

 

 

अर्थक्वेक स्वार्म क्या है?
जानकारी के अनुसार, जब किसी इलाके में कम समय के अंदर बार-बार छोटे-छोटे भूकंप आते हैं, तो इसे अर्थक्वेक स्वार्मजा कहा जाता है। आम तौर पर, किसी बड़े भूकंप के बाद आस-पास छोटे झटके महसूस किए जाते हैं। इन्हें ‘आफ्टरशॉक’ कहा जाता है। लेकिन अर्थक्वेक स्वार्म, आफ्टरशॉक से अलग होता है। इसमें जरूरी नहीं कि पहले कोई बड़ा भूकंप आए और उसके बाद छोटे झटके महसूस हों। इसमें कम तीव्रता वाले भूकंपों की एक लगातार सीरीज होती है जो थोड़े-थोड़े अंतराल पर आते हैं।

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