राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की लापरवाही व निगरानी में नाकामी की पुष्टि हुई है। हालांकि एसआईटी ने स्पष्ट रूप से उनके नाम का जिक्र किए बिना उनकी तरफ इशारा किया है। आपराधिक साजिश में उनकी भूमिका का स्पष्ट जिक्र नहीं है। एसआईटी ने चढ़ावा चोरी के पीछे भर्ती प्रक्रिया और एसओपी के नियमों को बदलकर उन्हें शिथिल करना बड़ी वजह माना है। इसमें अनिल मिश्रा को सबसे अधिक जिम्मेदार ठहराया गया है।
टिन्नू की थी धाक जांच में हुआ साफ
सूत्रों के मुताबिक, विस्तृत जांच में टिन्नू यादव की भूमिका और स्पष्ट हुई। वह भले ही ट्रस्ट व प्रबंधन की लिखापढ़ी में हिस्सा नहीं था, पर हकीकत में वह चंपत के साथ बराबरी से काम देख रहा था। चंपत का जिक्र किए बगैर एसआईटी ने रिपोर्ट में बताया, टिन्नू के पास प्रबंधन की हर संवेदनशील जानकारी रहती थी। उसमें दखल रहता था। हर जगह टिन्नू की पहुंच थी। उसके पास हुंडियों की चाबी रहती थी, जिसके लिए चंपत राय को परोक्ष जिम्मेदार माना गया है।
एसआईटी को ट्रस्ट के ऑडिट में भी कुछ खामियां मिली हैं। उसमें और पारदर्शिता लाने समेत कई सुझाव दिए हैं। चढ़ावे में आए जेवरात को लेकर विशेष सुझाव दिए गए हैं।
ये भी अहम सिफारिशें
- कर्मियों की भर्ती को लेकर पारदर्शिता बरती जाए। नियमों के तहत ही भर्ती हो
- फारिश पर भर्ती न हो। योग्य व्यक्ति चुने जाएं
- थर्ड पार्टी ऑडिट भी हो। गणनाकर्मियों की ड्यूटी रोटेशन से व एसओपी का पूर्ण पालन हो
- कंट्रोल रूम पर तैनात प्रभारी व अन्य कर्मी सक्रियता से निगरानी करें







