दहेज हत्या केस: SC में पति की जमानत रद्द, कहा- मामला गंभीर, हाईकोर्ट में निर्णय मशीनी ढंग से हुआ

देश की सर्वोच्च अदालत ने दहेज हत्या के एक मामले में बड़ी बात कही है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि समाज को दीमक की तरह चाट रही दहेज हत्या जैसी कुरीतियों के खिलाफ न्यायपालिका का रुख बेहद सख्त रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें एक दहेज हत्या के आरोपी पति को महज इस आधार पर जमानत दे दी गई थी कि वह कुछ समय से जेल में था।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला बिहार के गोपालपुर थाना क्षेत्र का है। 1 सितंबर 2024 को दर्ज एफआईआर के मुताबिक, मृतका की शादी को मात्र डेढ़ साल हुए थे। मृतका की मां लाल मुनी देवी ने आरोप लगाया कि शादी के समय 20 लाख रुपये नकद और करीब 6 लाख के जेवर देने के बावजूद, ससुराल पक्ष की भूख कम नहीं हुई। आरोपी पति और उसके परिवार ने लगातार गाड़ी और अन्य सामान को लेकर उनकी बेटी को प्रताड़ित किया। इतना ही नहीं, शादी के छह महीने के भीतर ही पति के किसी अन्य महिला के साथ संबंधों की बात भी सामने आई थी। जब मृतका ने इसका विरोध किया तो उसकी मौत हो गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने दहलाया
आरोपी पति की जमानत रद्द करते हुए जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का विशेष जिक्र किया। रिपोर्ट के अनुसार, महिला की मौत सामान्य नहीं थी। उसके सिर की हड्डी टूटी हुई थी, दिमाग की नसों में गंभीर चोट थी और यहां तक कि उसका सीना और दिल तक फट चुका था।

प्रताड़ना के कारण आत्महत्या भी हुई है, तो भी वह दहेज हत्या-सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की फैसले पर सवाल उठाया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद महत्वपूर्ण सबूतों को नजरअंदाज कर एक ‘मैकेनिकल अप्रोच’ अपनाई। बेंच ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज के समाज में दहेज हत्याएं एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। ऐसे में अदालतों की जिम्मेदारी है कि वे सबूतों की गहराई से जांच करें। केवल जेल की अवधि और ट्रायल की धीमी गति को आधार बनाकर जमानत देना जनता का न्याय प्रणाली से भरोसा कम करता है।

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शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर प्रताड़ना के कारण आत्महत्या भी हुई है, तो भी वह कानूनन दहेज हत्या की श्रेणी में ही आता है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि आरोपी पति एक सप्ताह के भीतर सरेंडर करे। साथ ही, निचली अदालत को निर्देश दिया गया है कि इस मामले का ट्रायल अगले 6 महीने में प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।

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