राज्यसभा- हरिवंश नारायण सिंह फिर बने राज्यसभा सांसद, राष्ट्रपति ने किया मनोनीत

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नता दल (यूनाइटेड) नेता हरिवंश नारायण सिंह एक बार फिर से राज्यसभा सांसद बन चुके हैं। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  ने हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा का नामित सदस्य के रूप में मनोनीत किया है। इस बार जदयू की ओर से हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा चुनाव में मौका नहीं दिया गया था।

हालांकि, हरिवंश का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब उन्हें दोबारा नामित सदस्य के रूप में राज्यसभा भेज दिया गया है। हरिवंश का उच्च सदन के सदस्य के रूप में कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त हो गया।

पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई की जगह मिला मौका
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की सेवानिवृत्ति के बाद राज्यसभा की सीट रिक्त होने पर उन्हें राज्यसभा सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। 69 वर्षीय हरिवंश बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा के सदस्य के रूप में अपने दो कार्यकाल पूरे कर चुके हैं। वे उच्च सदन के उपसभापति के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

नियुक्ति पर जारी हुई अधिसूचना
सरकार की एक आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (1) के उपखंड (क) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, उसी अनुच्छेद के खंड (3) के साथ पढ़ा जाए, तो राष्ट्रपति मनोनीत सदस्यों में से एक की सेवानिवृत्ति के कारण हुई रिक्ति को भरने के लिए हरिवंश नारायण सिंह को राज्य परिषद में मनोनीत करने की कृपा करती हैं।

राजनीति और पत्रकारिता के प्रमुख नाम
भारतीय राजनीति और पत्रकारिता के एक प्रमुख नाम हैं, जिन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका जन्म 30 जून 1956 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों में गहरी रुचि विकसित की।

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जदयू से बने थे पहली बार राज्यसभा सांसद
हरिवंश नारायण सिंह ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करते हुए अपनी पहचान एक गंभीर और निष्पक्ष पत्रकार के रूप में बनाई। पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वे जनता दल (यूनाइटेड) से जुड़े और राज्यसभा के सदस्य बने।

राज्यसभा में पक्ष-विपक्ष दोनों से मधुर संबंध
साल 2018 में हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा का उपसभापति चुना गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने सदन की कार्यवाही को संतुलित और गरिमापूर्ण ढंग से संचालित करने का प्रयास किया। वे विभिन्न दलों के बीच संवाद बनाए रखने और संसदीय परंपराओं को मजबूत करने के लिए जाने जाते हैं।


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