वैश्विक अनिश्चितता के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति
वैश्विक अनिश्चितता और आपूर्ति शृंखला में बाधाओं के बीच भारत और यूरोपीय संघ (ने आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों पक्षों ने कहा कि भारत-ईयू के बीच घनिष्ठ आर्थिक संबंध विकास, रोजगार सृजन, हरित संक्रमण, औद्योगिक विकास और टिकाऊ व भरोसेमंद सप्लाई चेन के लिए पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।
दोनों पक्षों के नेताओं ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के पूर्ण क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही उन्होंने अपनी-अपनी टीमों को निवेश संरक्षण समझौते (IPA) और भौगोलिक संकेतक (GI) समझौते पर बातचीत जल्द से जल्द पूरी करने का निर्देश दिया। भारत और यूरोपीय संघ ने द्विपक्षीय निवेश को बढ़ाने और चयनित वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इसके तहत ‘ब्लू वैलीज’ जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की योजना है। दोनों पक्षों ने तीसरे देशों में संयुक्त निवेश बढ़ाने और त्रिपक्षीय सहयोग को मजबूत करने का भी संकल्प लिया। इसमें विकास सहायता के क्षेत्र में भारत और यूरोपीय संघ के अनुभव का उपयोग किया जाएगा, जिसमें यूरोपीय संघ की ग्लोबल गेटवे रणनीति भी शामिल है।
दोनों पक्षों के बीच व्यापार और सुरक्षा को मिलेगा नया अध्याय
यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने भी इस समझौते को ऐतिहासिक बताया। ईयू के नेता एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि यह दिन ऐतिहासिक है और इससे व्यापार, सुरक्षा तथा लोगों के आपसी संबंधों में नया अध्याय खुल रहा है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से दो अरब लोगों का साझा बाजार तैयार हो रहा है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत-ईयू एफटीए को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताते हुए कहा कि यह समझौता दोनों पक्षों में लाखों नौकरियों के अवसर पैदा करेगा।
समझौते पर पीएम मोदी क्या बोले?









