अयोध्या- सरयू में आस्था की डुबकी, हनुमानगढ़ी में उमड़ा जन सैलाब

रामनगरी में बृहस्पवितार को आस्था, उल्लास और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। चैत्र पूर्णिमा, हनुमान जन्मोत्सव और रामलला के छठ उत्सव के दुर्लभ संयोग ने पूरे शहर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। तड़के ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा, किसी ने सरयू में आस्था की डुबकी लगाई तो कोई सीधे मंदिरों की ओर बढ़ चला।

 

भक्तों ने पहले सरयू स्नान कर पुण्य अर्जित किया, फिर रामलला के दरबार, कनक भवन और हनुमानगढ़ी में दर्शन कर अपनी श्रद्धा अर्पित की। दिनभर मंदिरों में जय श्रीराम और बजरंगबली के जयकारों की गूंज सुनाई देती रही। देर शाम तक करीब 80 हजार श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए थे। हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट की गई। हनुमानजी को सोने-चांदी के आभूषणों से अलंकृत किया गया। जगह-जगह सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ हुआ, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। कालेराम मंदिर में परंपरा के अनुसार हनुमान जी की पूजा देवी स्वरूप में की गई, जो रामायण से जुड़ी विशेष मान्यता को दर्शाती है। जानकी महल ट्रस्ट में भी भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया और बधाई गान की धूम रही। राम मंदिर में स्थापित हनुमान मंदिर में भी विभिन्न अनुष्ठान हुआ।

 

नाका हनुमानगढ़ी में विशेष आयोजन

नाका हनुमानगढ़ी में जन्मोत्सव का उत्साह चरम पर रहा। महंत रामदास ने बताया कि सुबह विधिवत पूजन के बाद हनुमान जी का आकर्षक शृंगार किया गया। सवा मन देशी घी के लड्डुओं का भोग लगाया गया और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। दोपहर में विशेष आरती के दौरान भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। वहीं शाम होते-होते सरयू तट पर भव्य नजारा देखने को मिला, 1051 दीपों से मां सरयू की महाआरती उतारी गई। दीपों की रोशनी और भक्ति संगीत ने माहौल को और भी दिव्य बना दिया।

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