भारत की ड्रग तस्करी के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। पहले जहां सीमा पार से नशे की खेप सुरंगों, मानव नेटवर्क या वाहनों के जरिए भेजी जाती थी, वहीं अब ड्रोन सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरे हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की 2025 की रिपोर्ट बताती है कि ड्रोन के जरिए ड्रग्स की तस्करी अब भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है।
पांच साल में 100 गुना बढ़े ड्रोन वाले मामले
एनसीबी के अनुसार, 2021 में ड्रोन के जरिए ड्रग तस्करी के केवल तीन मामले दर्ज हुए थे। 2024 में जहां इनकी संख्या बढ़कर 179 हो गई, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 305 हो गई। यानी पांच वर्षों में करीब 100 गुना बढ़ोतरी हुई। इस दौरान ड्रोन के जरिए बरामद मादक पदार्थों की मात्रा भी पिछले साल की तुलना में 98 प्रतिशत बढ़कर 468 किलोग्राम तक पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक यह अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। इन ड्रोन के जरिए मुख्य रूप से हेरोइन और अफीम जैसी मादक पदार्थों की खेप भारत भेजी जा रही थी।
आखिर ड्रग तस्कर ड्रोन का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं?
रिपोर्ट बताती है कि ड्रोन ने सीमा पार तस्करी के पुराने तरीकों की जगह ले ली है। ड्रोन कम समय में सीमा पार कर सकते हैं, इनमें ड्रग्स की छोटी लेकिन बेहद शुद्ध खेप भेजी जा सकती है और इन्हें पकड़ना भी पहले के मुकाबले ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियों के सामने यह एक नई तकनीकी चुनौती बन गई है।
कौन सा राज्य बना ड्रग का सबसे बड़ा निशाना?
- ड्रोन से जुड़े 305 मामलों में से 298 मामले अकेले पंजाब में दर्ज किए गए।
- भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे पंजाब के अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और गुरदासपुर जैसे जिले ड्रोन तस्करी के सबसे बड़े हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं।
- इन ड्रोन के जरिए मुख्य रूप से हाई-प्योरिटी हेरोइन और मेथामफेटामाइन की खेप भेजी जा रही है।
- रिपोर्ट के अनुसार, भारत-पाकिस्तान सीमा अब इस हवाई तस्करी का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है।
ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई कितनी बढ़ी?
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मुताबिक, 2004 से 2014 के बीच देशभर में 40,000 करोड़ रुपये मूल्य के 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स जब्त किए गए थे। वहीं 2014 से 2026 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 1.18 करोड़ किलोग्राम ड्रग्स तक पहुंच गया।
- इसी तरह, 2004-2014 के दौरान 8,000 करोड़ रुपये मूल्य के 3.26 लाख किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए गए थे, जबकि 2014-2026 के बीच 89,896 करोड़ रुपये मूल्य के 42.47 लाख किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए गए।
- अवैध अफीम की खेती के खिलाफ कार्रवाई भी तेज हुई है। 2020 में 10,000 एकड़ में लगी अवैध अफीम की फसल नष्ट की गई थी, जो 2025 में बढ़कर 42,282 एकड़ हो गई।
- वहीं, 2004-2014 के दौरान 1.73 लाख मामले दर्ज किए गए और 1.95 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 2014-2026 के बीच 8.75 लाख मामले दर्ज हुए और 10.97 लाख लोगों की गिरफ्तारी हुई। सरकार का कहना है कि ये आंकड़े ड्रग्स के खिलाफ अभियान के दायरे और कार्रवाई में आई तेजी को दर्शाते हैं।






