West Asia- ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, सऊदी ने यमन में बरसाए बम

ईरान पर अमेरिकी सेना के हमलों का दायरा बढ़ गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि फिलहाल युद्ध रोकने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने अमेरिकी सैनिकों के बलिदान के संबंध में कहा कि कुल 14 सैनिक हताहत हुए हैं। हालांकि, पहले ये संख्या 17 बताई गई थी। अब अमेरिका ने आंकड़े संशोधित किए हैं। ईरान भी पलटवार कर रहा है।

 

 

ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश में व्यापारिक जहाज, अमेरिका ने की गोलीबारी

अमेरिकी सेना ने एक अन्य व्यापारिक पोत पर गोलीबारी की। रिपोर्ट के मुताबिक जहाज ईरानी बंदरगाह की नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। अमेरिका और ईरान ने पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दे रहे हैं। या। दोनों पक्षों ने ऐसे कदम उठाए जिनसे तनाव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी दूतावासों ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकियों को आगाह करना शुरू कर दिया कि वहां से निकलने के विकल्प सीमित हो सकते हैं, वहीं ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने पड़ोसी देशों के निवासियों को अमेरिकी सैनिकों वाले ठिकानों से दूर रहने की सलाह दी।

विदेश मंत्री अराघची बोले- नहीं झुकेगा ईरान

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के सामने न झुकने का संकल्प दोहराया है। उन्होंने अमेरिका के साथ अक्सर मतभेद रखने वाली दो वैश्विक शक्तियों – चीन और रूस – के साथ चल रही बातचीत का जिक्र करते हुए कहा, ईरान अमेरिकी धमकियों के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, इस्लामी गणराज्य ‘न तो धमकियों से डरता है और न ही दबाव के आगे झुकेगा।’

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ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, सऊदी ने यमन के बंदरगाह पर बम बरसाए

अमेरिकी सेना की तरफ से लगातार 13वें दिन हुई बमबारी का जवाब देते हुए ईरान की सेना ने भी पलटवार किया। ईरान ने शुक्रवार को फारस की खाड़ी के आसपास अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस इलाके में ईरान के हमलों से तिलमिलाए क्षेत्रीय मुल्क भी आक्राम रुख दिखा रहे हैं। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने यमन के बंदरगाह शहर होदेइदाह पर हमला किया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने स्थिति को और बिगाड़ने की धमकी दी है।

सऊदी परमाणु समझौते से मुकरे ट्रंप कहा-अब्राहम समझौते के तहत इस्राइल को देनी होगी मान्यता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ हुए परमाणु समझौते को रद्द या अनिश्चित स्थिति में डालते हुए एक नई शर्त रख दी है कि यह सौदा तभी लागू होगा जब सऊदी अरब अब्राहम समझौते में शामिल होकर इस्राइल को मान्यता दे और उससे राजनयिक संबंध स्थापित करे।  ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर साफ किया कि इस नागरिक परमाणु समझौते के तहत सऊदी अरब को किसी भी तरह से यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि बिना इस्राइल को मान्यता दिए और संबंध सामान्य किए यह परमाणु समझौता आगे नहीं बढ़ेगा।  अमेरिका के ऊर्जा विभाग द्वारा इस डील की घोषणा के 24 घंटे के भीतर ही ट्रंप के इस नए अल्टीमेटम ने इस समझौते के भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। वॉशिंगटन में हुए हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट शामिल हुए थे।

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रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प इस बात से नाराज थे कि राइट ने उनकी मंजूरी के बिना समझौते की घोषणा कर दी। इसके बाद फॉक्स न्यूज और वॉल स्ट्रीट जर्नल में हुई आलोचना से उनकी नाराजगी और बढ़ गई। रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस ने ऊर्जा विभाग से समझौते की घोषणा टालने को कहा था, लेकिन विभाग ने हस्ताक्षर समारोह भी किया और मीडिया में इसकी जानकारी भी दी। अब्राहम समझौता पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए इस्राइल और अरब देशों के बीच हुआ एक ऐतिहासिक राजनयिक समझौता है। सितंबर 2020 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में इस पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसका मुख्य उद्देश्य दशकों पुरानी दुश्मनी को खत्म कर इस्राइल और मुस्लिम देशों के बीच सामान्य संबंध स्थापित करना है।

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