खबर ज्ञान की : – क्या आपको पता है भारत के राष्ट्रपति 25 जुलाई को ही क्यों शपथ लेते हैं, कैसा होता है देश के महामहिम का चुनाव ?

राष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है। बुधवार को इसे लेकर अधिसूचना भी जारी हो जाएगी। 25 जुलाई को देश के नए राष्ट्रपति शपथ ले लेंगे। बीते 45 साल में ये लगातार 10वां मौका होगा जब 25 जुलाई को देश के नए राष्ट्रपति शपथ लेंगे।

25 जुलाई को ही क्यों शपथ लेते हैं राष्ट्रपति? 1977 से पहले किस राष्ट्रपति ने किस तारीख को शपथ ली थी? कितने राष्ट्रपति अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके? कौन से उप-राष्ट्रपति ऐसे जिन्होंने संभाली कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी? आइये जानते हैं…

क्या हमेशा 25 जुलाई को ही शपथ लेते रहे हैं राष्ट्रपति?

नहीं, ऐसा नहीं है। देश में 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र लागू हुआ। उसी दिन डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने। डॉक्टर प्रसाद 12 साल तक इस पद पर रहे। 13 मई 1962 को डॉक्टर राधाकृष्णन देश के दूसरे राष्ट्रपति बने। उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया।

पांच साल बाद 13 मई 1967 को डॉक्टर जाकिर हुसैन देश के तीसरे राष्ट्रपति बने। डॉक्टर हुसैन अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। 3 मई 1969 को उनका निधन हो गया। हुसैन के निधन के बाद उप-राष्ट्रपति वीवी गिरि कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। इसके बाद होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

वीवी गिरि के इस्तीफे के बाद उस वक्त सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद हिदायतउल्ला कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त हुए। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद 24 अगस्त 1969 को वीवी गिरि नए राष्ट्रपति बने। गिरि ने अपना कार्यकाल पूरा किया।

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गिरि के बाद 24 अगस्त 1974 को फखरुद्दीन अली अहमद नए राष्ट्रपति बने। अहमद कार्यकाल पूरा नहीं कर पाने वाले दूसरे राष्ट्रपति बने। 11 फरवरी 1977 को उनका निधन हो गया। अहमद के निधन के बाद उप-राष्ट्रपति बीडी जत्ती कार्यवाहक राष्ट्रपति बने।
इसके बाद चुनाव हुए। चुनाव के बाद 25 जुलाई 1977 को नीलम संजीव रेड्डी देश के नए राष्ट्रपति बने। तब से लेकर अब तक हर राष्ट्रपति ने अपना कार्यकाल पूरा किया है। हर राष्ट्रपति के पांच साल कार्यकाल 24 जुलाई को पूरा होता है। इसी वजह से 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति शपथ लेते हैं। तब से अब तक नौ राष्ट्रपति 25 जुलाई को शपथ ले चुके हैं।

आम चुनाव में ईवीएम मशीन का इस्तेमाल होता है। वहीं, राष्ट्रपति चुनाव के लिए बैलट पेपर का इस्तेमाल होता है। इसकी वजह है राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया का आम चुनाव से अलग होना। दरअसल आम चुनाव में वोटर को अपनी पसंद के उम्मीदवार को चुनना होता है। उस उम्मीदवार के सामने की बटन दबने पर उसका वोट संबंधित उम्मीदवार को मिल जाता है।

राष्ट्रपति चुनाव में वोटर एक से ज्यादा उम्मीदवार को वोट कर सकता है। इसके लिए उसे वरीयता देनी होती है। यानी, सबसे पसंदीदा उम्मीदवार के सामने उसे एक लिखना होता है। दूसरी पसंद वाले के सामने दो और अगर तीसरा उम्मीदवार भी है तो उसके सामने वो तीन लिख सकता है।

अगर वोटर चाहे तो सिर्फ एक उम्मीदवार को भी वोट कर सकता है। इसके लिए भी उसे अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने एक लिखना होगा। ईवीएम को आम चुनाव में इस्तेमाल के हिसाब से बनाया गया है। अगर इनका इस्तेमाल राष्ट्रपति चुनाव में भी करना है तो पहले इसमें तकनीकि तौर पर बदलाव करने होंगे। इसी वजह से राष्ट्रपति का चुनाव बैलट पेपर से होता है।

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राष्ट्रपति चुनाव में वोटर्स को चुनाव आयोग की ओर से एक विशेष पेन दी जाती है। उसी पेन से उम्मीदवारों के आगे वोटर को नंबर लिखने होते हैं। एक नंबर उसे सबसे पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के आगे डालना होता है। ऐसे दूसरी पसंद वाले उम्मीदवार के आगे दो लिखना होता है। अगर आयोग द्वारा दी गई विशेष पेन का इस्तेमाल नहीं होता तो वह वोट इनवैलिड हो जाता है।

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