भाजपा विधायक दिलीप रावत ने पौड़ी गढ़वाल जिले में लैंसडाउन छावनी बोर्ड का नाम बदलने की चल रही प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। उन्होंने अपनी चिंताओं को व्यक्त करने के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को एक पत्र लिखा है।
विधायक ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लैंसडाउन एक फलता-फूलता पर्यटन केंद्र है, जो दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करता है। उन्होंने तर्क दिया कि इस पर्यटन शहर का नाम बदलने से क्षेत्र के बढ़ते पर्यटन उद्योग पर बुरा असर पड़ेगा।
वहीं लैंसडौन का नाम बदलकर जसवंत गढ़ छावनी करने के प्रस्ताव का विरोध लगातार बढ़ रहा है। विभिन्न स्थानीय संगठनों ने इस प्रस्ताव को जनभावनाओं के विपरीत बताया है। संगठनों ने आगामी 28 अप्रैल को सांकेतिक बाजार बंदी के साथ ही धरना-प्रदर्शन व जुलूस निकालने का फैसला किया है।
यह निर्णय लैंसडौन होटल एसोसिएशन, कैंट होटल एसोसिएशन, व्यापार मंडल, होटल एसोसिएशन जीएम ग्रुप और नागरिक मंच के पदाधिकारियों की बैठक में लिया गया। संगठनों ने सुझाव दिया कि वीर योद्धा हीरो ऑफ द नेफा राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की स्मृति में युवाओं को रोजगार देने वाला संस्थान या आधुनिक चिकित्सालय स्थापित किया जाना चाहिए जिसका लाभ आमजनों को मिल सके।
कैंट बोर्ड ने 10 अप्रैल को पारित किया था प्रस्ताव
केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत छावनी परिषद ने लैंसडौन का नाम जसवंत गढ़ करने के संबंध में बीती 10 अप्रैल को आयोजित बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित किया था। इस बारे में आम जनता से 30 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। कैंट बोर्ड के प्रस्ताव के विरोध में विभिन्न संगठन लामबंद होने लगे हैं।
लैंसडौन के नाम परिवर्तन को लेकर रक्षा मंत्री से मिलेंगे कांग्रेस नेता धीरेंद्र प्रताप
लैंसडौन का नाम बदलकर जसवंतगढ़ छावनी किए जाने के छावनी बोर्ड लैंसडौन द्वारा पारित प्रस्ताव के जनविरोध को लेकर कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने रक्षा मंत्री से मिलने का समय मांगा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उनके द्वारा लैंसडौन की जनता की बातें सुनकर रक्षा मंत्री से मिलने का समय मांगा गया है। रक्षा मंत्री के विदेश यात्रा से वापस आने पर लैंसडौन के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात का समय मिलेगा। बताया कि उनके नेतृत्व में लैंसडौन के लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में रक्षा मंत्री से मुलाकात कर नाम परिवर्तन से पैदा होने वाली कठिनाइयों की ओर उनका ध्यान आकृष्ट कर नगर का नाम यथावत रखने का अनुरोध करेगा।








