Militants: संदिग्ध उग्रवादियों ने मणिपुर में फूंकीं पुलिस चौकियां: 70 से अधिक घरों को लगाई आग, भेजे गए कमांडो।

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Militants: संदिग्ध उग्रवादियों ने मणिपुर में फूंकीं पुलिस चौकियां: 70 से अधिक घरों को लगाई आग, भेजे गए कमांडो।

मणिपुर के जिरीबाम में संदिग्ध उग्रवादियों ने दो पुलिस चौकियों, वन विभाग के बीट ऑफिस सहित 70 से अधिक घरों को आग के हवाले कर दिया। आग लगाने के बाद हथियारों से लैस संदिग्ध उग्रवादी गांवों में बेखौफ घूमते नजर आए। हालात की गंभीरता को देखते हुए मणिपुर पुलिस की एक कमांडो टुकड़ी को शनिवार सुबह इंफाल से हवाई मार्ग से जिरीबाम भेजा गया। अन्य जिलों से भौ सुरक्षाबल भेजे गए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उग्रवादियों ने शुक्रवार मध्यरात्रि करीब 12:30 बजे बराक नदी के किनारे चोटोबेकरा और जिरी पुलिस चौकी में आग लगा दी। उग्रवादियों ने लमताई खुनौ, मोधुपुर इलाके में अंधेरे का फायदा उठाकर कई हमले किए और जिले के बाहरी इलाकों में 70 से ज्यादा घरों को आग लगा दी।

गौरतलब है कि एक बुजुर्ग व्यक्ति की कथित तौर पर, दूसरे समुदाय के उग्रवादियों के हत्या किए जाने के बाद हिंसा फैली थी। जिरीबाम प्रशासन ने छह तारीख से बेमियादी कर्फ्यू लगा दिया। इस बीच, जिरी के विधायक और मणिपुर के नवनिर्वाचित सांसद डॉ. बिमोल अकोइजाम ने बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई है।

नवनिर्वाचित सांसद का आरोप, शहर के बाहरी इलाकों में सुरक्षा नहीं
मणिपुर के जिरीबाम में एक व्यक्ति की हत्या के बाद से भड़की हिंसा के बीच शनिवार की सुरक्षाबलों ने जिरीबाम जिले में मैतेई समुदाय के 239 से अधिक लोगों को उनके गांवों से निकाला गया है। गांव से सुरक्षित निकाले गए लोगों को जिरीं स्पोटर्स कॉम्प्लेक्स के राहत शिविर में रखा गया है। पुलिस अधीक्षक ए घनश्याम शर्मा का तबादला कर दिया गया है। राहत शिविर में आए अधिकांश लोग जिरीबाम शहर से 30 किमी से अधिक दूर ग्रामीण क्षेत्रों के रहने वाले हैं। इसबीच, इनर मणिपुर लोकसभा सीट से नवनिर्वाचित कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने राज्य सरकार से जिरीबाम जिले के लोगों के जीवन और संपत्तियों की रक्षा करने का आग्रह किया है।

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बाहरी लोगों को नहीं दी जा रही सुरक्षा
अकोइजाम ने कहा, कुछ अतिरिक्त बल पहुंच गए हैं। शहर के लोगों को सुरक्षा प्रदान की जा रही है, लेकिन बाहरी क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षा प्रदान नहीं की जा रही है। मणिपुर में मैतेई समुदाय और कुकी आदिवासी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष पिछले वर्ष तीन मई से शुरू हुआ था।


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