पाकिस्तान में 2026 में खसरे की वजह से 71 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि सरकार ‘विश्व टीकाकरण सप्ताह’ के दौरान स्वास्थ्य साक्षरता और वैक्सीन के बारे में जानकारी बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चला रही है।
2025 में पहले ही यह अनुमान लगाया गया था कि कम टीकाकरण दर की वजह से दुनिया भर में रोकथाम योग्य बीमारियों को रोकने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों पर असर पड़ेगा। खसरा एक बहुत तेजी से फैलने वाला वायरल रोग है और यह दुनिया भर में छोटे बच्चों की मौत का एक बड़ा कारण बना हुआ है। इस बीमारी से बचाव वैक्सीन लगवाकर किया जा सकता है।
टीकाकरण अभियानों के दौरान पाकिस्तान सरकार सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर एमआर (खसरा और रूबेला) वैक्सीन मुफ्त में देती है। लेकिन कई लोग वैक्सीन लगवाने से हिचकिचाते हैं, जिससे समस्या बढ़ जाती है। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के एक संपादकीय में यह बात कही गई है।
संपादकीय में कहा गया है कि पाकिस्तान में अभी भी दस लाख से ज्यादा ‘जीरो-डोज’ बच्चे हैं, यानी ऐसे बच्चे जिन्हें कभी कोई वैक्सीन नहीं लगी। कुछ इलाकों में इसका कारण स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है, लेकिन कई बार लोगों के मन में वैक्सीन को लेकर डर और गलत धारणाएं भी इसकी वजह बनती हैं। पाकिस्तान उन दस देशों में शामिल है जहां सबसे ज्यादा ‘जीरो-डोज’ बच्चे पाए जाते हैं। इसलिए वहां और बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि हर बच्चा टीका लगवा सके।
अखबार ‘डॉन’ ने सरकारी आंकड़ों के हवाले से बताया कि 2026 के पहले चार महीनों में पाकिस्तान में खसरे से 71 बच्चों की मौत हुई है। इनमें सबसे ज्यादा 40 मौतें सिंध में हुईं। इसके बाद पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में 12-12 मौतें हुईं, जबकि बलूचिस्तान में चार मौतें दर्ज की गईं।
2026 के पहले चार महीनों में पाकिस्तान में खसरे के कुल 4,541 मामले सामने आए हैं। इनमें से 1,712 मामले खैबर पख्तूनख्वा में, 1,198 पंजाब में, 1,183 सिंध में, 17 बलूचिस्तान में, 55 इस्लामाबाद में, 151 पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में और 45 पाकिस्तान-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में दर्ज किए गए हैं।








