भारत के कई राज्य भारी कर्ज में डूबे, क्या भारत में श्रीलंका जैसे हालात बनते नजर आ रहे है? क्या सरकार को मुफ्त की योजनाओं पर प्रतिबंध लगाना होगा ?

राज्यों की तरह केंद्र सरकार भी कर्ज के जाल में लगातार उलझती जा रही है। देश को आर्थिक बदहाली से बचाने के लिए आर्थिक विशेषज्ञ कृषि और स्वास्थ्य जैसे मदों में सब्सिडी धीरे-धीरे कम करने और मुफ्त की योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन क्या भारत जैसे देश में गरीबों को मिल रही योजनाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना सही निर्णय होगा?      आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि कर्ज लेना केवल तभी लाभप्रद होता है, जब कर्ज ली गई राशि का उपयोग आर्थिक संसाधन पैदा करने में लगाया जाए। लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि ज्यादातर राज्य अपने बजट का बड़ा हिस्सा पिछली देनदारियों को चुकाने और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने में लगा रहे हैं। इससे उन्हें लोकप्रियता तो प्राप्त होती है, लेकिन उससे राज्यों के लिए कोई आय प्राप्त नहीं होती। इस तरह ये कर्ज लगातार राज्यों के लिए बोझ बनते जा रहे हैं।
रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2014-15 से 2018-19 के बीच पंजाब ने केवल पांच फीसदी रकम आर्थिक संसाधन बनाने में खर्च की, जबकि इसी दौरान उसने लगभग 45 फीसदी रकम को आवश्यक देनदारियों पर खर्च किया। आंध्र प्रदेश ने केवल 10 प्रतिशत के करीब पैसा आर्थिक संसाधन पैदा करने वाले मदों में लगाया, जबकि इसी दौरान उसने लगभग 25 फीसदी पैसा आवश्यक देनदारियों पर खर्च किया। अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार आर्थिक संसाधन पैदा करने पर कम, जबकि देनदारियों और कल्याणकारी योजनाओं पर भारी खर्च किया गया। खर्च करने के इस तरीके को आर्थिक दृष्टि से  सही नहीं कहा जा सकता।

और पढ़े  राजस्थान: स्कूल की छत का प्लास्टर गिरा, तीन बच्चे घायल, जर्जर भवन पर लगा ताला

राज्यों पर कितना कर्ज

वित्त वर्ष 2020-21 में देश के विभिन्न राज्यों का औसतन कर्ज उनके सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक तिहाई यानी लगभग 31.3 फीसदी तक के ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है। सबसे खराब स्थिति पंजाब की है जिसका कर्ज उसके जीएसडीपी (ग्रास स्टेट डोमेस्टिक प्रॉडक्ट) का रिकॉर्ड 53.3 फीसदी तक पहुंच चुका है। दूसरे सबसे खराब हालत में राजस्थान है, जिसका कर्ज उसके जीएसडीपी का 39.8 फीसदी हो चुका है। इसी प्रकार पश्चिम बंगाल का कर्ज 38.8 फीसदी, केरल का 38.3 फीसदी, गुजरात 23 फीसदी, महाराष्ट्र 20 फीसदी और आंध्र प्रदेश का कर्ज उसके जीएसडीपी का 37.6 फीसदी हो चुका है।

कल्याणकारी राज्य का कर्तव्य

वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और आर्थिक मामलों के जानकार गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि भारत एक कल्याणकारी राज्य है। इसकी मूल संकल्पना में गरीब नागरिकों का हित करना शामिल है। इसलिए समाज में जो लोग रोटी, कपड़ा और मकान से वंचित हैं, केंद्र-राज्य सरकारों की जिम्मेदारी होती है कि वे उन लोगों को ये सुविधाएं प्राप्त करने में मदद करें। हालांकि, ऐसा करने में यह ध्यान अवश्य दिया जाना चाहिए कि मदद केवल जरूरतमंदों तक पहुंचनी चाहिए, केवल वोट प्राप्त करने के लिए गैरजरूरी लोगों को मदद करने से देश पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा। इससे बचने की कोशिश की जानी चाहिए।

भाजपा प्रवक्ता के मुताबिक, आईएमएफ की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि यदि भारत की केंद्र सरकार ने कोरोना काल में गरीबों को अन्न योजना और अन्य तरह से आर्थिक मदद न की होती, तो इससे भारी आबादी गरीबी के बेहद निचले स्तर पर पहुंच जाती। इससे गरीब लोगों को मदद करके उन्हें गरीबी रेखा के नीचे जाने से बचाया जा सका है।

और पढ़े  ऑस्ट्रेलिया में बड़ा हादसा: रग्बी फैंस की भीड़ में घुसी कार, कई लोग घायल, टीम बस का इंतजार कर रहे थे प्रशंसक

उन्होंने कहा कि गरीबों को आर्थिक मदद देना हमेशा गलत नहीं होता। गरीबों के हाथ तक पैसा पहुंचने से निचले स्तर पर खर्च बढ़ता है, इससे वस्तुओं की मांग बढ़ती है जिससे बाजार में गति पैदा होती है। इससे रोजगार के संसाधन बढ़ते हैं। इस तरह गरीबों पर पैसा खर्च करके भी सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने की कोशिश करती है।  

सामाजिक सुरक्षा टैक्स लगे

लेकिन डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा कहते हैं कि किसी देश के आर्थिक संसाधन की पूरी परिकल्पना केवल इस बात पर आधारित है कि सरकार सक्षम वर्ग से उचित मात्रा में टैक्स ले, उससे राष्ट्र में आर्थिक संसाधनों और मूलभूत ढांचे का विकास करे, और इसके साथ देश के गरीब या जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाए। इस प्रकार समाज के गरीब लोगों, बेरोजगार युवाओं को मदद दी जानी चाहिए। लेकिन इसके लिए टैक्स भी समाज के लोगों के माध्यम से ही आना चाहिए।

उन्होंने बताया कि चीन में सामाजिक सुरक्षा के नाम पर सभी नागरिकों से 10 फीसदी और रूस में 11 फीसदी का टैक्स लिया जाता है। अनेक यूरोपीय और अमेरिकी देशों में भी सामाजिक सुरक्षा टैक्स लिया जाता है। इस पैसे से समाज के उन लोगों को मदद दी जाती है जो आर्थिक तौर पर सक्षम नहीं होते। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार भारत में भी सामाजिक सुरक्षा टैक्स लगाया जाना चाहिए और इससे कल्याणकारी योजनाओं को संचालित किया जाना चाहिए। समाज को समझना चाहिए कि उसके गरीब लोगों की मदद करना भी उसी की जिम्मेदारी है। इस प्रकार यह देश पर बोझ नहीं पैदा करेगा और गरीब लोगों की मदद भी होती रहेगी।

  • Related Posts

    काशी में नितिन नवीन का कांग्रेस पर हमला: शहजादे विरासत से राजनीति में पहुंचे, नरेंद्र मोदी जनादेश से बने PM

    भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को काशी में पहली जनसभा की और कांग्रेस के दिल्ली प्रदर्शन पर निशाना साधा। वाराणसी में नितिन नवीन बोले कि कांग्रेस राजपरिवार…

    वायुसेना का 94वां स्थापना दिवस: हिंडन पर परेड, आईएएफ चीफ ने ली सलामी, प्रदर्शनी में पहली बार ब्रह्मोस मिसाइल

    भारतीय वायुसेना का 94वां स्थापना दिवस समारोह बुधवार को हिंडन एयरबेस में मनाया गया। इस अवसर पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह समारोह में शामिल हुए। जहां भारतीय वायु…