ओरोपोश वायरस- अलर्ट: नए वायरस का कई देशों में अलर्ट, इससे इंसेफेलाइटिस-गर्भपात का खतरा, जानें विस्तार से

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वैश्विक स्तर पर पिछले एक दशक में कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों का खतरा देखा गया है। कोरोनावायरस का संक्रमण हो या बर्ड फ्लू के मामले, इन सभी ने न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ाया बल्कि इससे बड़ी संख्या में लोगों की मौतें भी हुई हैं।

हाल ही में हुए एक शोध में वैज्ञानिकों की टीम ने इंसानों में तेजी से बढ़ती जूनोटिक बीमारियों को लेकर अलर्ट किया है। शोध में कहा गया है कि इंसानों में देखी जा रही करीब 60% बीमारियां किसी न किसी रूप में जानवरों से आई हैं।

 

इसी क्रम में वैज्ञानिकों ने एक और नए वायरस और कई देशों में इसके बढ़ते मामलों को लेकर अलर्ट किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रिटेन में ओरोपोश वायरस (ओआरओवी) के बढ़ते मामले देखे गए हैं, यहां तीन लोगों को इससे संक्रमित भी पाया गया है। तीन लोगों में ‘स्लोथ फीवर’ का पता चलने के बाद स्वास्थ्य प्रमुखों ने तत्काल चेतावनी जारी की है और सभी लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये पहली बार है जब ब्रिटेन में इस वायरस का संक्रमण देखा गया है। ओआरओवी के मामले आमतौर पर ब्राजील और इसके आसपास के क्षेत्रों में ही देखे जाते रहे थे। ये वायरस ब्रेन पर अटैक करके इंसेफेलाइटिस और कई अन्य गंभीर जानलेवा समस्याओं को बढ़ाने वाला हो सकता है।

 

ओरोपोश के बारे में जान लीजिए

प्राप्त जानकारियों के मुताबिक ओरोपोश, मलेरिया जैसी बीमारी का कारण बनता है, जो पहली बार ब्रिटेन में देखा गया है।

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यूके स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने इस साल जनवरी और जून के बीच तीन मामलों की सूचना दी, ये सभी मामले ब्राजील से लौटे लोगों में पाए गए। आमतौर पर दक्षिण अमेरिका में फैलने वाला यह वायरस तेज बुखार, सिरदर्द जैसे हल्के रोग का कारण बनता है पर दुर्लभ मामलों में इससे मेनिन्जाइटिस (ब्रेन में सूजन), इंसेफेलाइटिस और मृत्यु का भी खतरा हो सकता है।

यह मुख्यरूप से मच्छरों और कुछ प्रकार के कीटों के काटने से फैलता है और अब तक इसका कोई भी पुष्ट इलाज भी नहीं है।

 

संक्रमण का प्रसार और इससे बचाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संपर्क और मां से उसके बच्चे में भी इसके संचरण का खतरा रहता है। ब्राजील और अफ्रीका जैसे प्रभावित क्षेत्रों में जाने वाले यात्रियों को 50 प्रतिशत डीईईटी युक्त रिपलेंट और सुरक्षात्मक कपड़े पहनने की सलाह दी गई है।

यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी (यूकेएचएसए) ने चेतावनी दी कि यदि प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा के बाद किसी व्यक्ति में तेज बुखार, ठंड लगने, सिरदर्द-जोड़ों में दर्द और मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें तत्काल डॉक्टर्स की सलाह लेनी चाहिए।

 

कई देशों में देखा गया है ये संक्रमण 

1950 के दशक से चली आ रही इस बीमारी से पहली बार पिछले साल ब्राजील में दो महिलाओं की मौत हुई थी। इस साल अब तक, दुनियाभर में इस वायरस के 12,000 से ज्यादा पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से ज्यादातर (11,888) उसी क्षेत्र से हैं जहां इन महिलाओं की मौत हुई थी। यह दक्षिण अमेरिका के अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ अमेरिका और कनाडा में भी फैलता देखा गया है, जहां अब तक एक-एक मामला सामने आया है। साल 2024 में इन देशों के साथ-साथ क्यूबा और बारबाडोस में भी कुछ मामले सामने आए वहीं 2025 में, वेनेजुएला में पहली बार मामले सामने आए।

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इस साल की शुरुआत से अब तक ब्राजील में पांच मौतें भी हो चुकी हैं। अच्छी बात ये है कि वायरस के कारण तंत्रिकाओं पर होने वाले अटैक या इससे संबंधित लक्षण केवल 4 प्रतिशत संक्रमित रोगियों में ही दिखाई देते हैं।

 

क्या भारत में भी इसका खतरा?

हालिया चेतावनी में, अधिकारियों ने मध्य और दक्षिण अमेरिका की यात्रा करने वाली गर्भवती महिलाओं से सावधानी बरतने का आग्रह किया है क्योंकि यह वायरस गर्भपात से जुड़ा हो सकता है। यूकेएचएसए ने कहा, ‘यदि आप गर्भवती हैं और प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा करने पर विचार कर रही हैं, तो जाने से पहले अपने सामान्य चिकित्सक या यात्रा क्लिनिक से इस बारे में चर्चा करना जरूरी है।

भारत में अब तक  ओरोपोश वायरस के मामले रिपोर्ट नहीं किए गए है, फिर भी देश में इसके संभावित प्रसार को रोकने के लिए पहले से ही स्वास्थ्य मंत्रालय सक्रिय कदम उठा रहा है। पिछले साल सितंबर में प्रकाशित एक हेल्थ मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत हवाई अड्डों और बंदरगाहों जैसे प्रवेश वाले हिस्सों पर निगरानी बनाए हुए है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) संभावित ओरोपुश बुखार के प्रकोप की तैयारी सुनिश्चित करने के लिए ये कदम उठा रहा है, हालांकि वायरस अभी इस क्षेत्र में मौजूद नहीं है।


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