मालेगांव विस्फोट मामले से बरी होने के बाद लेफ्टिनेंट प्रसाद पुरोहित का प्रमोशन, अब बने कर्नल

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मालेगांव विस्फोट मामले में बरी हुए लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित का प्रमोशन हुआ है। वे अब कर्नल बनाए गए हैं। 31 जुलाई को एक विशेष एनआईए अदालत ने 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में ले. कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित समेत सात आरोपियों को बरी किया था।

बता दें कि 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित मालेगांव में रमजान के महीने में एक जबरदस्त धमाका हुआ था। इस ब्लास्ट में छह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। नवंबर 2008 में  लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित को एटीएस ने विस्फोट की साजिश में शामिल होने के आरोपों में गिरफ्तार किया था। 17 साल तक चली सुनवाई के बाद 31 जुलाई को एक विशेष एनआईए अदालत ने कर्नल प्रसाद पुरोहित को बरी किया था। विशेष एनआईए जज एके लाहोटी ने कहा था कि आरोपियों को दोषी करार देने के लिए विश्वसनीय सबूत पेश नहीं किए जा सके। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने मामले को संदेहों से अलग साबित करने में नाकाम रहा।
प्रसाद श्रीकांत पुरोहित पर क्या थे आरोप?
2008 मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोपी रहे प्रसाद पुरोहित सेना में सेवारत अधिकारी हैं। महाराष्ट्र एटीएस का दावा था कि प्रसाद पुरोहित ने 2006 में अभिनव भारत संगठन की स्थापना में भूमिका निभाई थी। इसी संगठन के जरिए बम धमाकों के लिए फंड्स इकट्ठा किए गए। पुरोहित पर भी ब्लास्ट की साजिश रचने के लिए कई बैठकों में हिस्सा लेने का आरोप था। पुरोहित पर आरोप लगा था कि वह इन बैठकों में अलग झंडा और संविधान बनाने की बात कहते थे और इस्राइल या फिर थाईलैंड में एक निर्वासित सरकार बनाने का विचार प्रसारित करते थे। एटीएस ने पुरोहित के खिलाफ केस में एक और आरोपी रमेश उपाध्याय के साथ हुई उनकी बातचीत का हवाला दिया था और फोन टैपिंग को सबूत के तौर पर पेश किया था।

कोर्ट में क्या हुआ?
पुरोहित ने दावा किया कि उनके मालेगांव ब्लास्ट केस से जुड़ी जिन बैठकों में शामिल होने का दावा किया जाता है, उनमें वे सेना के खुफिया अधिकारी के तौर पर हिस्सा लेते थे, ताकि कट्टरवाद के खिलाफ नए सूत्र बनाए जा सकें। पुरोहित ने यह भी दलील दी कि खुफिया इकाई में काम करने वाले सैन्य अधिकारी के लिए आरडीएक्स जैसे विस्फोटक हासिल करना नामुमकिन था।  सुनवाई के दौरान सेना के कई अधिकारियों ने पुरोहित के पक्ष में गवाही देते हुए कहा कि एटीएस ने उन्हें बयान देने के लिए धमकी दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में पुरोहित को जमानत दे दी और इसके बाद वे फिर सेना के साथ जुड़ गए।

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प्रसाद पुरोहित ने क्या कहा
रिहाई के बाद पुरोहित ने कहा था कि न्यायपालिका ने केस को समझा और हम सबको न्याय दिया। इस लड़ाई में भारतीय सशस्त्र बलों ने मेरा पूरा साथ दिया। मैं उनका धन्यवाद करने के लिए शब्द नहीं ढूंढ पा रहा हूं।


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