रेबीज का खतरा: रेबीज होने के बाद कैसे रहें सुरक्षित?

 

 

भारत में रेबीज की रोकथाम को लेकर तमाम प्रयास किए गए हैं, बावजूद इसके अभी भी यहां प्रतिवर्ष अनुमानित 5,700 लोगों की मौतें हो जाती हैं।

रेबीज और इसका खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, रेबीज एक घातक वायरस है जो संक्रमित जानवरों की लार से लोगों में फैलता है। रेबीज वायरस आमतौर कुत्ते और बंदरों के काटने से फैलता है। इसके अलावा चमगादड़, लोमड़ी और रैकून के कारण भी इसका संक्रमण फैल सकता है।

सबसे गंभीर बात ये है कि एक बार जब किसी व्यक्ति में रेबीज के लक्षण दिखने लगते हैं, तो यहां से जान बचा पाना लगभग कठिन हो जाता है। यही कारण है कि जिन लोगों को रेबीज होने का खतरा हो सकता है (जैसे कुत्ते और अन्य जानवरों के संपर्क में रहने वाले लोग) उन्हें सुरक्षात्मक रूप से रेबीज के टीके लगवाने की सलाह दी जाती है।

 

 

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

इस समस्या के बारे में समझने के लिए हमने ग्रेटर नोएडा स्थित एक अस्पताल में एमडी, इंटरनल मेडिसिन, डॉ श्रेय श्रीवास्तव से संपर्क किया। डॉ श्रेय बताते हैं, रेबीज वायरस आमतौर पर गली के कुत्ते, बंदर, लोमड़ी और बिल्लियों में पाया जाता है। इन जानवरों के काटने से संक्रमण के प्रसार का खतरा हो सकता है।

सबसे गंभीर बात ये है कि रेबीज के कारण मृत्युदर 100 फीसदी के करीब रहता है, मतलब अगर किसी को रेबीज हो जाए तो इसका इलाज लगभग असंभव हो जाता है।

रेबीज के कारण रोगियों को हाइड्रोफोबिया होने का खतरा अधिक रहता है, जिसमें व्यक्ति को पानी से डर लगने लगता है, इसके अलावा कुछ भी खाने में दिक्कत होने लगती है।

 

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रेबीज के कारण क्या दिक्कतें होती हैं?

डॉ श्रेय बताते हैं, ये मस्तिष्क की परतों में संक्रमण करता है जिसके कारण कुछ स्थितियों में व्यक्ति बहुत अजीब सा व्यवहार करने लगता है, जैसे शरीर में बहुत ज्यादा ऐंठन या भ्रम की दिक्कत होना।

रेबीज के शुरुआती लक्षण फ्लू के लक्षणों से बहुत मिलते-जुलते हो सकते हैं और कई दिनों तक रह सकते हैं। इसमें भ्रम-अति सक्रियता, निगलने में कठिनाई, अत्यधिक लार आने, अनिद्रा और आंशिक रूप से लकवा की भी समस्या हो सकती है।

 

 

रेबीज के जोखिमों को कम करने के लिए टीकाकरण

इस गंभीर और घातक स्थिति से बचाव के बारे में डॉक्टर श्रेय बताते हैं, रेबीज के जोखिमों को कम करने के लिए प्री और पोस्ट दोनों वैक्सीनेशन उपलब्ध होती हैं।

  • अगर आप जानवर पालते हैं या किसी ऐसे इलाके में रहते हैं जहां पहले किसी को रेबीज हो चुका है तो इसके लिए प्री-एक्सपोजर वैक्सीन लगवानी चाहिए। ये पहले डोज के बाद सातवे, 21वें और 28वें दिन लगाई जाती है।
  • वहीं अगर आपको किसी रेबीज संभावित जानवर ने काट लिया है तो खास ध्यान देना चाहिए, इसके लिए वैक्सीन की पांच खुराक दी जाती है।
अगर आपको किसी जानवर ने काट लिया है या आप किसी ऐसे जानवर के संपर्क में आए हैं जिसके रेबीज होने का संदेह है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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