मोदी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं। 2014 में सत्ता में आने के बाद उनकी कैबिनेट में कई बदलाव हो चुके हैं। ये बदलाव सिर्फ तीन बार चुनाव जीतने के बाद नए मंत्रियों को कैबिनेट में लाने और पुरानों को हटाने तक ही सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि कई बार कार्यकाल के बीच में भी हुए हैं।
मोदी के तीन कार्यकालों में केंद्रीय मंत्रिमंडल में कब-कब किए जा चुके हैं बदलाव?
1. पहला कार्यकाल (2014-2019)
प्रधानमंत्री मोदी ने 26 मई 2014 को अपने पहले कार्यकाल की शपथ ली थी, जिसके बाद तीन प्रमुख फेरबदल किए गए।
9 नवंबर 2014 (पहला फेरबदल): सरकार बनने के छह महीने बाद हुए पहले विस्तार में 21 नए चेहरों को शामिल किया गया था, जिनमें चार कैबिनेट मंत्री, तीन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 14 राज्य मंत्री थे।
5 जुलाई 2016 (दूसरा फेरबदल): इस विस्तार में 19 नए मंत्रियों को राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया और प्रकाश जावड़ेकर को प्रमोट करके कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
3 सितंबर 2017 (तीसरा फेरबदल): 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले इस बड़े फेरबदल में नौ नए राज्य मंत्रियों को शपथ दिलाई गई और चार जूनियर मंत्रियों- निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान और मुख्तार अब्बास नकवी को कैबिनेट रैंक में पदोन्नत किया गया।
2. दूसरा कार्यकाल (2019-2024)
30 मई 2019 को दूसरे कार्यकाल की शपथ लेने के बाद, मंत्रिमंडल में एक बड़ा फेरबदल और कुछ छोटे बदलाव हुए।
7 जुलाई 2021 (सबसे बड़ा फेरबदल): यह दूसरे कार्यकाल का पहला और सबसे बड़ा फेरबदल था, जिसमें 43 मंत्रियों ने शपथ ली। 36 नए चेहरे और 7 को प्रमोशन मिला। इस दौरान रविशंकर प्रसाद, डॉ. हर्षवर्धन और प्रकाश जावड़ेकर समेत 12 प्रमुख मंत्रियों की मंत्रिमंडल से छुट्टी कर दी गई थी।
6 जुलाई 2022: राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के कारण मुख्तार अब्बास नकवी और आरसीपी सिंह के इस्तीफे के बाद एक छोटा फेरबदल हुआ, जिसमें स्मृति ईरानी को अल्पसंख्यक मामलों का और ज्योतिरादित्य सिंधिया को इस्पात मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
18 मई 2023: एक बड़े और चौंकाने वाले बदलाव में किरेन रिजिजू को कानून मंत्रालय से हटाकर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय दिया गया और अर्जुन राम मेघवाल को कानून व न्याय मंत्रालय सौंपा गया।
7 दिसंबर 2023: राज्यों के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल और रेणुका सिंह सरुता के इस्तीफे के कारण अर्जुन मुंडा और राजीव चंद्रशेखर सहित अन्य मंत्रियों को रिक्त हुए मंत्रालयों के अतिरिक्त प्रभार दिए गए।
19 मार्च 2024: पशुपति कुमार पारस के इस्तीफे के बाद किरेन रिजिजू को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
3. तीसरा कार्यकाल (2024 से अब तक)
9 जून 2024 को तीसरे कार्यकाल की शपथ लेने के बाद, नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में अब तक कोई कैबिनेट विस्तार नहीं हुआ है। जल्द ही इस कार्यकाल के पहले कैबिनेट विस्तार की अटकले हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो मोदी सरकार में अब तक कुल चार बड़े कैबिनेट फेरबदल कार्यकाल के बीच में हुए हैं। वहीं, बीच-बीच में कुछ मंत्रियों के इस्तीफा देने या छिटपुट बदलावों को पूरे मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल से नहीं जोड़ा जा सकता।
चार बड़े फेरबदल में कब-किसे मंत्री बनाया गया, किसे बाहर किया गया?
1. पहला कैबिनेट विस्तार
9 नवंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल का पहला कैबिनेट विस्तार हुआ था। इस विस्तार में कैबिनेट में 21 नए चेहरों को शामिल किया गया था, जिससे सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या 45 से बढ़कर 66 हो गई थी। वहीं, किसी भी चेहरे को बाहर नहीं किया गया था। हालांकि, कई प्रमुख मंत्रियों के मंत्रालयों में बड़े बदलाव (फेरबदल) किए गए थे।
- इस कैबिनेट विस्तार में जहां मनोहर पर्रिकर को रक्षा मंत्रालय सौंपा गया। वहीं, सुरेश प्रभु रेल मंत्री बने। जेपी नड्डा को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। इसके अलावा चौधरी बीरेंद्र सिंह ग्रामीण विकास, पंचायती राज तथा पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय के प्रभारी बने।
- इन चार नामों के अलावा तीन नए राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) में बंडारू दत्तात्रेय, राजीव प्रताप रूडी और डॉ. महेश शर्मा का नाम शामिल रहा। इसके अलावा 14 नए राज्य मंत्रियों में मुख्तार अब्बास नकवी, राम कृपाल यादव, राज्यवर्धन सिंह राठौर और बाबुल सुप्रियो के नाम शामिल रहे।
इन मंत्रियों के पोर्टफोलियो में हुआ बदलाव
डीवी. सदानंद गौड़ा: उनसे रेल मंत्रालय ले लिया गया और कानून एवं न्याय मंत्रालय सौंपा गया।
डॉ. हर्षवर्धन: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय लेकर विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय दिया गया।
रविशंकर प्रसाद: कानून मंत्रालय वापस ले लिया गया, लेकिन संचार व आईटी मंत्रालय उनके पास बरकरार रहा।
प्रकाश जावड़ेकर: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का प्रभार वापस ले लिया गया।
दूसरी तरफ ग्रामीण विकास मंत्री गोपीनाथ मुंडे का 3 जून 2014 को एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था, जिसके बाद उनका प्रभार अस्थायी रूप से नितिन गडकरी को सौंपा गया था। इस कैबिनेट विस्तार में उनका प्रभार चौधरी बीरेंद्र सिंह को दिया गया।
2. दूसरा कैबिनेट फेरबदल
5 जुलाई 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल का दूसरा कैबिनेट विस्तार और फेरबदल हुआ था। इस विस्तार में 19 नए चेहरों को राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया था, जबकि पांच मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया था।
किसे मंत्रिमंडल का हिस्सा बनाया गया?
इस विस्तार में जिन 19 नेताओं को राज्य मंत्री के तौर पर सरकार में शामिल किया गया, उनमें अर्जुन राम मेघवाल से लेकर, एमजे अकबर और अनिल माधव दवे से लेकर विजय गोयल तक के नाम शामिल थे। इसके अलावा मनसुख मंडाविया, अनुप्रिया पटले, रामदास अठावले और परषोत्तम रूपाला को भी राज्य मंत्री का जिम्मा सौंपा गया।
किसका हुआ प्रमोशन?
प्रकाश जावड़ेकर को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) से प्रमोट करके कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था।
कौन हुआ मंत्रिमंडल से बाहर?
इस विस्तार से ठीक पहले पांच मंत्रियों ने अपना इस्तीफा सौंप दिया था और उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था। इनमें निहालचंद मेघवाल, डॉ. राम शंकर कठेरिया, सांवर लाल जाट, मनसुखभाई डी. वसावा और मोहनभाई कल्याणजीभाई कुंदरिया के नाम शामिल थे।
स्मृति ईरानी: इन्हें मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय से हटाकर कपड़ा मंत्रालय का प्रभार दिया गया।
प्रकाश जावड़ेकर: प्रमोशन के बाद इन्हें स्मृति ईरानी की जगह नया मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया गया।
डीवी. सदानंद गौड़ा: इनसे कानून एवं न्याय मंत्रालय वापस लेकर सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय भेजा गया।
रविशंकर प्रसाद: इन्हें संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी के साथ-साथ वापस कानून व न्याय मंत्रालय का प्रभार भी सौंप दिया गया।
3. तीसरा कैबिनेट विस्तार
3 सितंबर 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल का तीसरा कैबिनेट विस्तार और फेरबदल हुआ था। 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले हुए इस अहम विस्तार में नौ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, चार जूनियर मंत्रियों को पदोन्नत करके कैबिनेट मंत्री बनाया गया और छह मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया।
किसे मंत्रिमंडल का हिस्सा बनाया गया?
इस विस्तार में जिन नौ नेताओं को राज्य मंत्री और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में सरकार में शामिल किया गया था, उनमें अश्विनी कुमार चौबे, गजेंद्र सिंह शेखावत, अनंत कुमार हेगड़े और हरदीप सिंह पुरी जैसै बड़े नाम शामिल रहे।
इस फेरबदल में चार जूनियर मंत्रियों को पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया। इनमें मुख्तार अब्बास नकवी को अल्पसंख्यक कार्य मंत्री बनाया गया, जबकि निर्मला सीतारमण रक्षा मंत्री बनीं। पीयूष गोयल को कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त प्रभार के साथ रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। दूसरी तरफ धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री बनाया गया। उन्हें कौशल विकास मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया।
इस विस्तार से पहले छह मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया। इनमें 75 वर्ष की आयु पार कर चुके कलराज मिश्र ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय छोड़ा था। वहीं बंडारू दत्तात्रेय ने श्रम मंत्रालय छोड़ दिया था। इसके अलावा राजीव प्रताप रूडी, फग्गन सिंह कुलस्ते, संजीव बालियान और महेंद्र नाथ पांडे ने भी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। महेंद्र नाथ को उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जो कि कैबिनेट से उनके हटने का कारण बना।
4. चौथा और अंतिम प्रमुख कैबिनेट विस्तार
7 जुलाई 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल का पहला और सबसे बड़ा कैबिनेट फेरबदल हुआ था। इस महा-विस्तार में कुल 43 मंत्रियों ने शपथ ली थी, जिनमें 36 नए चेहरे शामिल थे और सात जूनियर मंत्रियों को प्रमोट कर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था। इसके साथ ही, कई बड़े नामों सहित कुल 12 मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया गया।
किसे मंत्रिमंडल का हिस्सा बनाया गया?
इस विस्तार में 36 नए मंत्रियों को शामिल किया गया, जिनमें कुछ प्रमुख कैबिनेट और राज्य मंत्री शामिल रहे। जहां कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया को नागरिक उड्डयन मंत्री बनाया गया। वहीं, असम से मुख्यमंत्री पद छोड़कर आए सर्बानंद सोनोवाल बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग तथा आयुष मंत्री बने। नारायण राणे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री बनाए गए। इसी कैबिनेट फेरबदल में अश्विनी वैष्णव को रेल, संचार और आईटी मंत्री का पद दिया गया।
किसका हुआ प्रमोशन?
इस विस्तार में सात राज्य मंत्रियों को पदोन्नत करके कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था। इनमें अनुराग ठाकुर का नाम शामिल रहा, जिन्हें सूचना एवं प्रसारण और युवा मामले और खेल मंत्रालय सौंपा गया। इसके अलावा जी. किशन रेड्डी को संस्कृति, पर्यटन और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री बनाया गया। इसी फेरबदल में किरेन रिजिजू को कानून और न्याय मंत्री बनाया गया था।
साथ ही मनसुख मंडाविया को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय दिया गया। हरदीप सिंह पुरी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा आवास और शहरी मामलों के मंत्री बने। इनके अलावा आरके सिंह को बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री बनाया गया, वहीं परषोत्तम रूपाला को मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया।
2021 का यह कैबिनेट फेरबदल शामिल किए गए मंत्रियों से ज्यादा हटाए गए मंत्रियों की वजह से चर्चा में रहा था। दरअसल, इस विस्तार से पहले जिन मंत्रियों को हटाया गया उनमें रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर और डॉ. हर्षवर्धन जैसे दिग्गज शामिल थे।
रविशंकर प्रसाद: कानून और आईटी मंत्री का पद छिना।
प्रकाश जावड़ेकर: पर्यावरण, सूचना एवं प्रसारण और भारी उद्योग मंत्रालय वापस लिया गया।
डॉ. हर्षवर्धन: स्वास्थ्य मंत्री, कोरोना वायरस की दूसरी लहर से निपटने में सरकार की आलोचना के बीच इस्तीफा दिया।
रमेश पोखरियाल ‘निशंक’: शिक्षा मंत्रालय का प्रभार छोड़ा।
थावरचंद गहलोत: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थे। इन्हें हटाकर कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।
डीवी. सदानंद गौड़ा: रसायन और उर्वरक मंत्रालय वापस लिया गया।
बाबुल सुप्रियो: पर्यावरण राज्य मंत्री। पद से हटाए गए। कुछ समय बाद वे भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल हो गए।
संतोष गंगवार: श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पद से हटाए गए।
इन बड़े नामों के अलावा संजय धोत्रे, देबश्री चौधरी, रतन लाल कटारिया और प्रताप चंद्र सारंगी को भी मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया।
विपक्षी दलों से आए कौन से प्रमुख नेताओं को मिली है मोदी कैबिनेट में जगह?
अब तक हुए कैबिनेट फेरबदल में विपक्षी दलों से भाजपा में आए ज्यादा नेताओं को शामिल नहीं किया गया। हालांकि, कुछ प्रमुख नामों को भाजपा में शामिल होने के कुछ ही समय में कैबिनेट मंत्री बना दिया गया।
1. ज्योतिरादित्य सिंधिया: इन्होंने अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में 20 साल तक रहने के बाद मार्च 2020 में पार्टी इस्तीफा दे दिया था और भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके बाद 2021 में हुए कैबिनेट फेरबदल में उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई।
2. चौधरी बीरेंद्र सिंह: हरियाणा के इस पूर्व कांग्रेसी नेता ने करीब चार दशक तक कांग्रेस के साथ रहने के बाद 2014 में पार्टी छोड़ दी थी। इन्हें भी मोदी कैबिनेट में शामिल किया गया था। सरकार में उन्हें ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेयजल मंत्रालय का प्रभार दिया गया था।
3. सुरेश प्रभु: शिवसेना नेता सुरेश प्रभु ने भी नवंबर 2014 में अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था, जिसके बाद उन्हें मोदी मंत्रिमंडल का हिस्सा बनाते हुए रेल मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था।





