बंगाल की खाड़ी में चक्रवात अर्नब तेजी से मजबूत हो रहा है और भारतीय तट की ओर बढ़ रहा है। इस चक्रवात को देखते हुए मौसम विभाग ने कई राज्यों में रेड अलर्ट जारी किया है। कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका है।
चक्रवात अर्नब का नाम किसने रखा?
चक्रवात अर्नब का नाम बांग्लादेश ने प्रस्तावित किया था। यह नाम अप्रैल 2020 में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और एशिया एवं प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) के चक्रवात संबंधी पैनल द्वारा अपनाई गई आधिकारिक सूची में शामिल है। वैसे अर्नब एक संस्कृत मूल का नाम है, जिसका अर्थ समुद्र या महासागर होता है।
इस सूची में 13 देशों के नाम शामिल हैं। ये देश हैं- बांग्लादेश, भारत, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन।
हर देश ने 13 नाम दिए थे। इस तरह कुल 169 नामों की सूची तैयार की गई। उत्तर हिंद महासागर में बनने वाले चक्रवातों के लिए इन नामों का क्रम से इस्तेमाल किया जाता है। इसमें बंगाल की खाड़ी और अरब सागर शामिल हैं।
कब रखा जाता है चक्रवात का नाम?
किसी चक्रवात को नाम तब दिया जाता है, जब उसकी सतह पर चलने वाली अधिकतम निरंतर हवा की रफ्तार 34 नॉट यानी लगभग 62 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाती है। इसका मतलब है कि समुद्र के ऊपर मौसम संबंधी हलचल होने या बारिश का अनुमान लगने भर से किसी सिस्टम को चक्रवात का नाम नहीं दिया जाता। इसके लिए हवा की रफ्तार का निर्धारित मानक पूरा होना जरूरी है।
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के चक्रवातों का नाम कौन रखता है?
उत्तर हिंद महासागर में बनने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का नाम रखने की जिम्मेदारी नई दिल्ली स्थित भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र की है। इसमें बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवात शामिल हैं।
चक्रवात का नाम इस आधार पर नहीं रखा जाता कि वह किस देश से टकराने वाला है। नाम तय करने के लिए क्षेत्रीय देशों द्वारा सहमति से तैयार की गई आधिकारिक सूची और उसके क्रम का पालन किया जाता है।
तूफान के दौरान कितनी तेज चलेंगी हवाएं?
मौसम विभाग के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में 27 अक्तूबर की शाम से हवाओं की रफ्तार बढ़ने लगेगी। 27 अक्तूबर की आधी रात से कृष्णा से अनकापल्ली तक के तटीय जिलों में हवा की रफ्तार 90 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
28 अक्तूबर की सुबह से दोपहर से पहले तक हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है। इस दौरान हवा के झोंके 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।
इतनी तेज हवाओं से तटीय इलाकों में जनजीवन प्रभावित होने और पेड़ों, बिजली के खंभों और संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
समुद्र में उठ सकती हैं ऊंची लहरें
चक्रवात के तट से टकराने के दौरान आंध्र प्रदेश के निचले तटीय इलाकों में समुद्र की लहरों से जलभराव होने का खतरा है।
आईएमडी ने काकीनाडा के आसपास पूर्वी गोदावरी जिले और यानम में खगोलीय ज्वार के स्तर से 1 से 1.5 मीटर ऊपर तक तूफानी लहरें उठने का अनुमान जताया है। विभाग ने समुद्र की स्थिति बेहद खराब रहने और छोटी नावों के संचालन को असुरक्षित बताया है।
चक्रवात से क्या नुकसान हो सकता है?
तेज हवाओं और भारी बारिश से कच्चे मकानों को व्यापक नुकसान पहुंच सकता है। बिजली और संचार के खंभे उखड़ सकते हैं, पेड़ गिर सकते हैं और खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है।
निचले इलाकों में जलभराव और तटीय बाढ़ का खतरा है। कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन भी हो सकता है। इसके अलावा सड़कों, रेलवे, बिजली लाइनों और सिग्नल व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।
आंध्र प्रदेश सरकार ने क्या तैयारियां की हैं?
चक्रवात अर्नब के संभावित प्रभाव को देखते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने और हर स्तर पर अधिकतम तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है, ताकि तूफान से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
खराब मौसम के पूर्वानुमान के मद्देनजर मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करने और यह सुनिश्चित करने को कहा है कि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
ओडिशा सरकार ने क्या तैयारियां की हैं?
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि राज्य सरकार ने चक्रवात के संभावित प्रभाव की समीक्षा की है। उन्होंने बताया कि तूफान से निपटने की तैयारियों के लिए अलग-अलग विभागों को विशिष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। वहीं ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) की लगभग 20 टीमें तैनात हैं और उन्होंने जमीन पर आपदा की तैयारी पर काम करना शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने आने वाले साइक्लोन से निपटने के लिए तीन चरण का प्लान बनाया है। इन तीन चरणों में कुल 60 टीमें तैनात की जाएंगी। राज्य सरकार ने तैयारियों के तहत शून्य जनहानि का लक्ष्य रखा है।
इस बीच केंद्र सरकार ने तैयारियों की समीक्षा की है। कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन ने राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति की बैठक की अध्यक्षता की। एनडीआरएफ और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमों को तैयार रखा गया है।







