फांसी: 34 मासूम, 74 गवाह और 47 देश, इंटरपोल की शिकायत से खुला राज, जेई और उसकी बीवी को करतूत की सजा

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यूपी के बांदा जिले की विशेष अदालत ने 34 बच्चों के यौन शोषण और उनकी अस्लील तस्वीरें व वीडियो वायरल करने के घूणित मामले में सिंचाई विभाग के निलंबित जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने तीसरे आरोपी की फाइल अलग कर दी। उस पर ई-मेल के माध्यम से जानकारी साझा करने का आरोप है। जमानत मिलने के बाद यह जेल से बाहर है।

विशेष पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 163 पेज के विस्तृत फैसले में इस घिनौने अपराध को जघन्यतम करार दिया। कोर्ट ने कहा, कई जिलों में बड़े पैमाने पर अपराध को अंजाम दिया गया।

दोषियों का नैतिक स्तर पर हद दर्ज तक नीचे गिरना इसे असाधारण और घिनौना अपराध बनाता है। इनमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है, इसलिए कड़ी से कड़ी सजा की जरूरत है। कोर्ट ने यूपी सरकार को पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। 

 

साथ ही, आरोपियों के घर से बरामद राशि को भी पीड़ित बच्चों में समान रूप से वितरित करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने रामभवन को अलग-अलग धाराओं में दोषी पाते हुए 6.45 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जबकि उसकी पत्नी दुर्गाचती पर 5.40 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

 

इंटरपोल की शिकायत से खुला राज: सीबीआई की कार्रवाई
इस पूरे मामले की नींव तब पड़ी जब इंटरपोल ने दिल्ली स्थित सीबीआई कार्यालय में एक विस्तृत ई-मेल से शिकायत भेजी। शिकायत में बताया गया था कि आरोपी रामभवन तीन अलग-अलग मोबाइल नंबरों का उपयोग कर रहा था और डार्कवेब के माध्यम से बच्चों के अश्लील वीडियो और फोटो विदेशों में बेच रहा था। इंटरपोल, जो 195 देशों में सक्रिय है और यह शिकायत इस अंतरराष्ट्रीय बाल यौन शोषण गिरोह के पर्दाफाश की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहला कदम साबित हुई।

 

सीबीआई के लोक अभियोजक दारा सिंह मीणा ने बताया कि इंटरपोल से मिली तीन ई-मेल शिकायतों के बाद, सीबीआई ने महीनों तक इस मामले की गहन जांच-पड़ताल की। इस दौरान, उन्होंने ऐसे पुख्ता साक्ष्य एकत्र किए, जिनसे यह साबित हो सके कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और आरोपी दोषी हैं। सभी साक्ष्य जुटाने के उपरांत, सीबीआई ने 16 नवंबर 2020 को चित्रकूट स्थित एसडीएम कॉलोनी में आरोपी दंपती के आवास पर पुलिस के साथ मिलकर छापा मारा।

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गिरफ्तारी, गवाहों को धमकाने का प्रयास और विस्तृत नेटवर्क
छापे के दौरान रामभवन कुशवाहा और दुर्गावती को गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि, इससे पहले, दुर्गावती ने तीन पीड़ित बच्चों और उनके अभिभावकों को एक वकील के पास ले जाने का प्रयास किया था, ताकि मामले को प्रभावित किया जा सके। जब वह पीड़ित अभिभावकों के साथ जा रही थी, तब भी सीबीआई की टीम उसका पीछा कर रही थी। इसके अतिरिक्त, दुर्गावती ने गवाहों को फोन के माध्यम से धमकी देने का सिलसिला भी जारी रखा था। 

 

सीबीआई को कुछ लोगों द्वारा इस संबंध में लिखित शिकायतें भी प्राप्त हुई थीं। इन सभी सबूतों के आधार पर, सीबीआई ने 28 दिसंबर 2020 को दुर्गावती को गिरफ्तार कर बांदा जेल भेज दिया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी दंपती ने केवल तीन जिलों के बच्चों को ही नहीं, बल्कि अपने भांजे को भी निशाना बनाया था। वे अपने आसपास, रिश्तेदारों और काम के दौरान मिलने वाले मजदूरों के बच्चों पर भी बुरी नजर रखते थे। आरोपी अश्लील सामग्री रूस, अमेरिका, लंदन, ऑस्ट्रेलिया सहित लगभग 12 देशों में भेजता था, और इन देशों को कार्रवाई के लिए ई-मेल भेजे गए हैं।

 

बच्चों के बयान ने खोली हकीकत, किसी की आंख तो किसी का भौं हुई तिरछी
सीबीआई द्वारा की गई जांच में 34 बच्चों के साथ हुए जघन्य यौन शोषण का पर्दाफाश हुआ है। कोर्ट में बयान देते समय बच्चे डरे-सहमे थे लेकिन गहन पूछताछ और दुलार के बाद उन्होंने जो दर्दनाक हकीकत बयां की, उसने समाज को झकझोर कर रख दिया। पीड़ित बच्चों ने बताया कि आरोपी उन्हें पीटता था और उनके साथ गंदा काम करता रहता था। जब वे भागने की कोशिश करते, तो महिला आरोपी दरवाजा बंद कर देती और उन्हें कई दिनों तक बंधक बनाकर रखती थी। एम्स में भर्ती कराए गए बच्चों की हालत अत्यंत चिंताजनक थी। उनमें से कुछ की आंखें तिरछी हो गई थीं, भौंहें अपनी जगह से हट गई थीं, और उनके नाजुक अंग भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त मिले। इन बच्चों का उपचार अब भी जारी है। यह दुखद है कि सर्वाधिक पीड़ित बच्चे हमीरपुर जिले के रहने वाले हैं।

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सीबीआई की 990 पन्नों की रिपोर्ट, बाल यौन शोषण गिरोह का खुलासा
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने करीब पांच वर्षों तक चली एक विस्तृत जांच के बाद 990 पन्नों की एक रिपोर्ट अदालत में पेश की है। इस रिपोर्ट ने एक गंभीर बाल यौन शोषण रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें एक निलंबित जेई और उसकी पत्नी मुख्य आरोपी हैं। जांच टीम इस मामले में दिल्ली से 100 से अधिक बार बांदा, हमीरपुर और चित्रकूट जैसे इलाकों का दौरा कर चुकी है, जहां से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए हैं।
जांच में सामने आया है कि निलंबित जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती इस घिनौने अपराध के मुख्य सूत्रधार थे। सीबीआई द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों में एक वीडियो शामिल है, जिसमें यह दंपती पांच बच्चों के साथ समूह में अश्लील हरकतें करते हुए पाया गया है। पत्नी दुर्गावती, बच्चों को अपनी बातों में लेने के लिए खिलौनों और खाने-पीने की चीजों का लालच देती थी। गरीब और असहाय बच्चों को विश्वास में लेने के बाद, दंपती उनका यौन शोषण करते थे।
कई बार, वे दोनों मिलकर बच्चों के साथ अश्लील हरकतें करते थे और इन कृत्यों का वीडियो बनाते थे। वहीं आरोपी के घर से 10 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, काम उत्तेजक वस्तुएं, छह मेमोरी कार्ड, छह पेन ड्राइव, एक डिजिटल वीडियो रिकॉर्डिंग कैमरा और भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई। पेन ड्राइव में 34 वीडियो और 679 तस्वीरें मिलीं, जो अपराध की भयावहता को दर्शाती हैं। इसके अलावा, नाइट विजन कैमरा, यौन वर्धक दवाएं और विभिन्न प्रकार के तेल भी बरामद हुए। आरोपी यह सामग्री विभिन्न जगहों पर भेजता था और सोशल मीडिया व वेबसाइटों के माध्यम से अच्छी खासी आमदनी भी करता था।
न्यायालय का सख्त रुख ,दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी का अपराध
बांदा में पाक्सो एक्ट के न्यायाधीश ने नाबालिगों के यौन शोषण मामले में दो अभियुक्तों को सजा सुनाते हुए कहा कि यह दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी का अपराध है। कोर्ट ने माना कि समाज की रक्षा करने वाले एक सरकारी पद पर तैनात व्यक्ति ने न केवल मासूमों का बचपन छीना, बल्कि मानवता को भी शर्मसार किया। ऐसे अपराध न केवल पीड़ित बच्चों के जीवन को बर्बाद करते हैं, बल्कि समाज की नैतिक नींव को भी हिला देते हैं। न्यायालय ने कहा कि नरमी बरती गई तो यह समाज के लिए खतरनाक संदेश होगा। सभी पीड़ितों की उम्र तीन वर्ष से 18 वर्ष से कम थी।
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दोषी का बयान
रामभवन के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। बातचीत के दौरान उसने बताया कि इतनी भी जल्दी क्या है, अभी फैसला निचली अदालत से आया है। इसके बाद हाईकोर्ट में अपील करेंगे। मैंने कोई अपराध नहीं किया। मुझे जबरन फंसाया जा रहा है। हालांकि सजा सुनाए जाने से पहले वह घंटों किसी सोच में डूबा था। कभी अपनी पत्नी दुर्गावती को इशारे से कुछ समझाता तो कभी पास रखे कागजों को पढ़ने लगता। वहीं दुर्गावती उसे दिलासा देती नजर आई। बातचीत के दौरान उसने बताया कि मैं तो निर्दोष हूं। यह न्याय सही नहीं हुआ है। बल्कि जबरन थोपा गया है। इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में जाऊंगी। इधर प्रयागराज से आईं दुर्गावती की मां ने भी फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा कि दामाद व बेटी को मेरे ही नजदीक के रिश्तेदार ने फंसाया है। जबकि मैंने उसकी हमेशा मदद की है। उसने सबके साथ मिलकर हमें फंसाया है। हालांकि उन्होंने अपना नाम बताने से इन्कार कर दिया।

यह मामला साइबर अपराध की दुनिया में बच्चों की सुरक्षा के लिए मौजूद गंभीर खतरों और समाज के भीतर पनप रहे अंधेरे को उजागर करता है। डार्कवेब जैसे माध्यमों का उपयोग करके, अपराधी अपनी गतिविधियों को छिपाने का प्रयास करते हैं, जिससे ऐसे जघन्य अपराधों का पर्दाफाश करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। जेई दंपती को मिली फांसी की सजा एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय है, जो ऐसे अपराधों के प्रति समाज की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाता है। यह सजा ऐसे अपराधों को अंजाम देने वालों के लिए एक कड़ी चेतावनी है और भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में सहायक सिद्ध हो सकती है।– कमल सिंह गौतम, विशेष लोक अभियोजक, बांदा

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