फिर छिड़ेगी जंग?: पश्चिम एशिया में युद्धविराम पर संकट के बादल,अधर में युद्धविराम का भविष्य; जानें कहां फंसा पेच

मेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद में 21 घंटों तक चली शांति वार्ता बेनतीजा रही। इस कूटनीतिक प्रयास के विफल होने के साथ ही पश्चिम एशिया में संकट गहराने की संभावना बढ़ गई है। शांति वार्ता असफल होने के बाद से अमेरिका-इस्राइल के एक बार फिर से आक्रामक रुख अपनाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

 

जेडी वेंस बोले- ये ईरान के लिए बुरी खबर 
बैठक खत्म होने के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, ”बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं। मुझे लगता है कि यह अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है। हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं। हमने इसे जितना हो सके उतना स्पष्ट कर दिया है, लेकिन ईरान ने हमारी शर्तों को स्वीकार नहीं किया है।”

ईरान बोला- जो संघर्ष से हासिल नहीं कर सके, वो सबकुछ मांगा
फार्स समाचार एजेंसी ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के करीबी एक सूत्र के हवाले से बताया कि अमेरिका ने संघर्ष के दौरान जो कुछ भी हासिल नहीं कर सका, वह सब कुछ मांगा। एजेंसी ने बताया कि ईरान ने कई मोर्चों पर अमेरिका की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। तेहरान ने कहा, “ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु कार्यक्रम पर रोक और कई अन्य मुद्दों पर अमेरिका की शर्तों को स्वीकार नहीं किया।”

कहां लगा अड़ंगा?
अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता बिना किसी नतीजे पर खत्म होने की बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का मुद्दा रहा। ईरान बैठक के दौरान होर्मुज पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की मांग पर डटा रहा, जबकि अमेरिका की ओर से इसे पूरी तरह से खोलने की मांग की गई।

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दूसरी वजह परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की ओर से रोक की मांग रही। ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। ईरान का स्पष्ट कहना रहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, लेकिन यूरेनियम संवर्धन को नहीं रोकेगा। वहीं, अमेरिका ने मांग की कि ईरान की परमाणु सुविधाओं को नष्ट किया जाए और यूरेनियम भंडार को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को सौंपा जाए।

पाकिस्तान ने की युद्धविराम जारी रखने की मांग
21 घंटों तक चली बातचीत के विफल होने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने दोनों देशों का बातचीत की मेज पर आने के लिए धन्यवाद किया। इसी के साथ उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम समझौता जारी रहना चाहिए।  उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं, युद्धविराम की समयसीमा बढ़े और दोनों पक्ष युद्धविराम का पालन करें।

अब आगे क्या होगा?
शांति वार्ता असफल होने के बाद ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ अगले दौर की वार्ता की फिलहाल कोई योजना नहीं है। ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम ने एक जानकार सूत्र के हवाले से कहा है कि गेंद अमेरिका के पाले में है और ईरान को बातचीत करने की कोई जल्दी नहीं है। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी है।

इन स्थितियों के हिसाब से पश्चिम एशिया में एक बार फिर से संघर्ष छिड़ने के आसार नजर आने लगे हैं। इनका असर होर्मुज जलडमरूमध्य से लेकर खाड़ी देशों पर हमलों के रूप में सामने आ सकता है। वहीं, अगर दो हफ्तों के युद्धविराम के दौरान अमेरिका-ईरान थोड़ी नरमी अपनाते हैं, तो एक बार फिर से बातचीत की मेज पर आ सकते हैं।

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