अयोध्या- श्रीरामायण वेला में भव्य प्राण प्रतिष्ठा एवं वाल्मीकि रामायण कथा : 26 फरवरी से मुख्य प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान, 28 फरवरी को विशाल भंडारा

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 श्रीधाम अयोध्या की पावन धरा एक बार फिर आध्यात्मिक उल्लास से आलोकित होने जा रही है। नव निर्मित देवस्थान श्रीरामायण वेला में भगवान श्रीसीताराम, लक्ष्मण तथा श्रीहनुमानजी की भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं वाल्मीकि रामायण कथा महोत्सव का शुभारंभ गुरुवार, 19 फरवरी से हो रहा है। यह दिव्य आयोजन 27 फरवरी तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ चलेगा तथा 28 फरवरी को विशाल भंडारे के साथ संपन्न होगा।श्रीरामायण वेला के संस्थापक एवं सुप्रसिद्ध कथा प्रवाचक जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने बताया कि 19 फरवरी को बाल्मीकि रामायण की कथा में मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का विधिवत प्रारंभ होगा। प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य अनुष्ठान 26 फरवरी से आरंभ किया जाएगा।यज्ञ अनुष्ठान के लिए नौ कुंडीय यज्ञशाला को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य विशेष अनुष्ठान संपन्न होंगे।
उन्होंने बताया कि महोत्सव के अंतर्गत उत्तराह ब्राह्मणों द्वारा वास्तु पूजन, विधि पूजन एवं यज्ञादि कार्यक्रम संपन्न किए जाएंगे, जबकि प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य संस्कार दक्षिणात्य शैली पूजा पद्धति के ब्राह्मणों के करकमलों से संपन्न होगा। आयोजन को लेकर अयोध्या में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं और देश के विभिन्न प्रांतों से संत-धर्माचार्यों एवं श्रद्धालुओं का आगमन आरंभ हो चुका है।समारोह में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं महंत नृत्य गोपाल दास की गरिमामयी उपस्थिति प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त जगतगुरु रामानुजाचार्य विद्याभास्कर स्वामी वासुदेवाचार्य महाराज, जगतगुरु स्वामी कुरेशाचार्य ,जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण के किलाधीश महंत मैथिली रमणशरण , जगतगुरु कृपालु राम भूषण दास, वृंदावन की पुंडरीक गोस्वामी, कृष्ण चंद्र ठाकुर तथा अनिरुद्धाचार्य सहित अनेक प्रतिष्ठित संतों को आमंत्रित किया गया है।महाराज जी के अनुसार महाराष्ट्र, राजस्थान, जयपुर, गुजरात और अहमदाबाद सहित देश के कोने-कोने से भक्तजन इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने अयोध्या पहुंच रहे हैं। संपूर्ण आयोजन को वैदिक परंपरा, भक्ति और मर्यादा के अनुरूप संपन्न करने की तैयारी है।अयोध्या की आध्यात्मिक गरिमा के मध्य यह महोत्सव न केवल श्रद्धा का उत्सव बनेगा, बल्कि रामकथा और वैदिक संस्कारों के माध्यम से जनमानस को धर्म, संस्कृति और आस्था के सूत्र में पिरोने का भी कार्य करेगा।

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