भारत में पहली बार इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू, एम्स में अब धीरे-धीरे हटेगा हरीश का लाइफ सपोर्ट

13 साल के संघर्ष के बाद हरीश राणा सुप्रीम कोर्ट के इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) के फैसले के बाद शनिवार को एम्स में शिफ्ट किए गए। उन्हें बेहद ही गोपनीय तरीके से एम्स के पैलिएटिव केयर विभाग में शिफ्ट किया गया है। विभाग में विशेषज्ञों की निगरानी में हरीश का लाइफ सपोर्ट हटाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

 

बेटे को मिलेगी एक सम्मानजनक मृत्यु मिलेगी
इस मामले में शुक्रवार को अमर उजाला की टीम हरीश राणा के घर पहुंची थी। जहां परिवार से बात के साथ हरीश की हालत की भी जानकारी ली गई। पिता अशोक राणा ने बताया कि हरीश को सांस लेने, फीड कराने के साथ मल त्याग के लिए नली लगी हुई हैं। पूरा परिवार उनके साथ रहा है। अब इस घड़ी में उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि किस प्रकार से प्रतिक्रिया देनी है। कुछ भी हो उनका बेटा अब छोड़कर ही जा रहा है। राहत सिर्फ इतनी है कि उसे एक सम्मानजनक मृत्यु मिलेगी।

 

सुबह आठ बजे निकला था परिवार
हरीश को लेकर परिवार शनिवार सुबह आठ बजे एम्स के लिए रवाना हो गया। बेहद गोपनीय तरीके से बिना प्रशासन को सूचना दिए परिवार के लोग निजी वाहन से निकले। पूरे परिवार संग कुछ सगे-संबंधी और बेटों के दोस्त तीन गाड़ियों से रवाना हुए। इस मामले में सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि परिवार ने जाने से पहले सूचना नहीं दी है। उन्हें कई बार कॉल किया, इसके बाद एक कर्मचारी को भी फ्लैट पर भेजा गया, जहां ताला लगा मिला।

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पड़ोसी क्या बोले
राज एंपायर सोसायटी के लोगों से मिली जानकारी के अनुसार अशोक राणा का परिवार 13वें फ्लोर पर रहता है। उनके फ्लैट के पास ही लिफ्ट है। उस लिफ्ट से व्हीलचेयर पर बैठाकर हरीश को बेसमेंट-2 में ले जाया गया। इसके बाद वही व्हीलचेयर छोड़कर निजी गाड़ी से परिवार रवाना हुआ। यहां से जाते हुए सभी की आंखें नम थीं।

कौन-कौन गया साथ
पड़ोसी नरेंद्र ने बताया कि वह आठ बजे निकले और साढ़े नौ बजे तक एम्स पहुंच गए। साथ में पिता अशोक राणा, मां निर्मला देवी, छोटा बेटा आशीष, बहन भावना और उसके पति संग आशीष के दोस्त और एकाध हरीश के दोस्त भी गए। कुछ अन्य रिश्तेदार भी गए।

यह है मामला
जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित है।

हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हुए, जीवन भर बिस्तर पर रहने को मजबूर
इस स्थिति में उसके हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और वह जीवन भर बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गए। हरीश के असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता के कारण माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की अपील की, जिसे 8 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। करीब आठ महीने बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी।

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