डीटीसी बस चालकों की हड़ताल रविवार को छठे दिन भी जारी रही। निजी एजेंसी के करीब 5,000 चालक 2,000 रुपये दैनिक वेतन, मेडिकल सुविधा, बोनस और सामाजिक सुरक्षा समेत विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर हैं। सरकार ने दूसरे कामों में लगे 2,700 चालकों को बस संचालन में लगाया है, लेकिन इसके बावजूद डीटीसी की कुल 6,300 बसों में से आधी से अधिक बसें डिपो में खड़ी हैं।
एक से डेढ़ घंटे तक बस का करना पड़ा इंतजार
रविवार को छुट्टी के कारण कुछ ही रूटों पर परेशानी नजर आई। हर्ष विहार-केंद्रीय टर्मिनल रूट संख्या 210 पर बसें चलीं, लेकिन वजीराबाद रोड, नंद नगरी डिपो और शास्त्री पार्क समेत कई स्थानों पर यात्रियों को 1 से 1.5 घंटे तक बस का इंतजार करना पड़ा।
बाहरी दिल्ली में भी असर
बवाना, नरेला और नजफगढ़ में यात्रियों को ई-रिक्शा और ऑटो पर निर्भर रहना पड़ा। ई-रिक्शा चालकों ने करीब दो किलोमीटर के सफर के लिए 15-20 रुपये तक किराया लिया। वहीं, आईटीओ, मंडी हाउस, कृषि भवन, करोल बाग, चाणक्यपुरी, दरियागंज, प्रगति मैदान, इंडिया गेट और लक्ष्मी नगर जैसे इलाकों में बसें नहीं मिलने पर यात्रियों ने मेट्रो का रुख किया।
मेट्रो की फेरे बढ़ाने की तैयारी
रविवार को छुट्टी के कारण हड़ताल का असर अपेक्षाकृत कम रहा, लेकिन सोमवार को कार्यालय खुलने के साथ यात्रियों की मुश्किल बढ़ सकती है। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के लिए भी एडवाइजरी जारी की गई है। यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए मेट्रो ने भी फेरे बढ़ाने की तैयारी की है।
डीटीसी कर्मचारियों की हड़ताल के बीच आप ने भाजपा सरकार पर परिवहन व्यवस्था संभालने में विफल रहने का आरोप लगाया। रविवार को आप मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हड़ताल से लोग परेशान हैं और मेट्रो स्टेशनों पर भी यात्रियों का दबाव बढ़ गया है। उन्होंने सीएम से कर्मचारियों से बातचीत कर हड़ताल खत्म कराने की मांग की। बुराड़ी विधायक संजीव झा ने वेतन संबंधी पूर्व कैबिनेट फैसले को लागू करने की मांग की। वहीं, कोंडली विधायक कुलदीप कुमार ने भी उनकी मागों पर बात की।







