परीक्षा पे चर्चा: PM मोदी बोले- सपने न देखना क्राइम है, लेकिन उसे सिर्फ गुनगुनाते रहना भी बेकार है

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रीक्षा पे चर्चा का 9वां संस्करण आज सुबह 10 बजे से शुरू हो चुका है। इस खास कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सीधे संवाद कर रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को परीक्षा से जुड़े तनाव को कम करने, उनका आत्मविश्वास बढ़ाने और करियर से जुड़े सवालों के जवाब देने में मदद करना है।

इस बार परीक्षा पे चर्चा नए अंदाज में आयोजित की जा रही है, जिसमें देशभर के छात्रों को जोड़ने और उनके सवालों के सीधे जवाब देने पर खास जोर दिया जा रहा है।

 

पढ़ाने की गति छात्रों की समझ के अनुसार हो: पीएम मोदी

एक छात्र ने कहा कि कई बार वह स्कूल या शिक्षक की पढ़ाने की गति से मेल नहीं बैठा पाता। जो पाठ छूट जाता है, उसे पूरा करने की कोशिश में आगे की पढ़ाई भी छूटने लगती है। छात्र ने पूछा कि ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए।

इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनका जवाब खास तौर पर शिक्षकों के लिए है। उन्होंने कहा कि शिक्षक को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह छात्रों की गति से सिर्फ एक कदम आगे रहें, उससे ज्यादा नहीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो हमारी पहुंच में हो, लेकिन जिसे पाने के लिए हमें थोड़ा प्रयास करना पड़े। लक्ष्य इतना दूर नहीं होना चाहिए कि हम हताश हो जाएं।

कौन-सी छोटी आदत सपनों को पूरा करने में मदद करती है?

इस सवाल पर एक छात्र ने प्रधानमंत्री मोदी से मार्गदर्शन मांगा। जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहला सुझाव दिया कि महान लोगों की जीवनियां पढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे यह समझ आता है कि आज जो लोग बड़े और सफल हैं, वे भी कभी हमारी ही तरह सामान्य हालात में थे।

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पीएम मोदी ने बताया कि जीवनियां पढ़ने से हमें सही और व्यावहारिक योजना बनाने में मदद मिलती है। साथ ही यह याद रहता है कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि सीढ़ी की तरह कदम-दर-कदम आगे बढ़कर हासिल होती है। हर सफल व्यक्ति भी एक इंसान होता है, जिसने मेहनत और धैर्य से मंजिल पाई होती है।

लेकिन सफलता कर्म से ही मिलेगी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सपने देखना कोई अपराध नहीं है। सपने तो जरूर देखने चाहिए, लेकिन सिर्फ सपनों के बारे में सोचते रहना या उन्हें गुनगुनाते रहना किसी काम का नहीं होता। उन्होंने कहा कि जीवन में कर्म सबसे जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हमें यह सोचकर मेहनत करनी चाहिए कि हम जहाँ हैं, वहीं से सफल होना है। सही मेहनत और लगन से हर जगह से सफलता हासिल की जा सकती है।

आराम से बाहर निकलना ही आगे बढ़ने की कुंजी

एक छात्र ने सवाल किया कि छोटे घर और कामकाज के माहौल में पढ़ाई करना बहुत मुश्किल होता है। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक उदाहरण देकर समझाया। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं है कि सुविधाएं हों तभी क्षमता आती है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे नंबर लाने वाले कई छात्र छोटे-छोटे गांवों से होते हैं, जहां सुविधाएं कम होती हैं। लेकिन मेहनत, लगन और सही सोच से कोई भी छात्र आगे बढ़ सकता है।

 गेमिंग में करियर पर पीएम मोदी की सलाह

एक छात्र ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि उसे गेमिंग में रुचि है, लेकिन समाज और लोग उसे सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देने को कहते हैं। छात्र ने बताया कि उसे लगता है कि उसका भविष्य गेमिंग में है और उसने पूछा कि उसे क्या करना चाहिए।

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इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब दिया कि शुरुआत में माता-पिता अक्सर मना करते हैं, यह सामान्य बात है। लेकिन उन्होंने छात्र को सलाह दी कि शांत रहकर मेहनत करते रहो और खुद को साबित करो। पीएम मोदी ने कहा कि जब आप अपने काम में सफलता पा लेते हैं और कोई मेडल या पहचान हासिल कर लेते हैं, तो वही सफलता माता-पिता और परिवार का सम्मान बन जाती है। इसके बाद कोई आपको रोकता नहीं है।

क्या बोर्ड परीक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षा देना जरूरी है?

इस सवाल पर परीक्षा पे चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को सलाह दी। पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों की पहली प्राथमिकता बोर्ड परीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बोर्ड परीक्षा आपके शैक्षणिक जीवन की नींव होती है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अगर आपने बोर्ड के सिलेबस से जुड़े अध्यायों को अच्छे से समझ लिया है, तो उनके अनुसार प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अलग से बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ती। सही समझ और कॉन्सेप्ट क्लियर होने से बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षा – दोनों की तैयारी साथ-साथ हो सकती है।

 

 

कौशल ज्यादा जरूरी है या नंबर?

परीक्षा पे चर्चा 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सवाल का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि हम अक्सर सोचते रहते हैं कि क्या पढ़ें, क्या करें और क्या सही है। इसका सबसे सरल जवाब है- हर चीज में संतुलन रखना।

प्रधानमंत्री ने बताया कि कौशल दो तरह के होते हैं – जीवन कौशल और काम से जुड़े कौशल। जीवन कौशल में सही दिनचर्या रखना, स्वस्थ रहना, रोज थोड़ा व्यायाम करना और अच्छे से बात करना शामिल है। उन्होंने उदाहरण दिया कि अगर कोई रेलवे स्टेशन जाए और उसे टिकट कहां से लेनी है, यह भी न पता हो, तो यह सही नहीं है।

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काम से जुड़े कौशल पर पीएम मोदी ने कहा कि सिर्फ किताबें पढ़ना काफी नहीं होता। बड़ों से सीखना, हर दिन कुछ नया सीखना और नई तकनीक को समझना भी जरूरी है। उम्र चाहे जो भी हो, सीखते रहना बहुत जरूरी है।


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