Delhi- किसी का कंकाल तो किसी का पेट का हिस्सा ही बचा, पहचान भी कठिन, झुलसने से शवों की हालत हुई खराब

Spread the love

दिल्ली के विवेक विहार हादसे में जान गंवाने वाले सभी नौ लोगों के शवों की पहचान बेहद मुश्किल है। किसी का कंकाल तो किसी का पेट का हिस्सा ही बचा है। जीटीबी अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक, चीफ कैजुअल्टी मेडिकल अधिकारी वरिष्ठ चिकित्सक और प्रशासनिक अधिकारी लगातार मौजूद रहे। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि परिजनों ने शारीरिक बनावट के आधार पर शवों की पहचान कर ली। हालांकि आगे की कार्रवाई के लिए डीएनए सैंपल भी लिया गया है।

 

डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोटोकॉल कोड रेड किया सक्रिय 
जीटीबी अस्पताल को जैसे ही विवेक विहार में अग्निकांड की भयावहता की सूचना मिली तो तुरंत हॉस्पिटल ने अपना डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोटोकॉल कोड रेड सक्रिय कर दिया। संभावित घायलों को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट और चिकित्सा व्यवस्था को युद्धस्तर पर तैयार किया। घटना के दौरान चिकित्सा निदेशक डॉ. विनोद कुमार के नेतृत्व में इलाज संबंधी सभी व्यवस्थाएं की गईं।

 

अस्पताल प्रशासन के अनुसार हादसे में नौ को मृत  गया था जबकि तीन लोग झुलसी हालत में लाए गए थे। इसमें एक को उपचार के लिए भर्ती किया गया। शाम को नवीन जैन को जीटीबी अस्पताल से सफदरजंग अस्पताल में रेफर कर दिया गया। हादसे में नवीन 20 फीसदी तक झुलस गए है।
समय पर मदद न मिलती तो चलीं जाती कई और लोगों की जान
विवेक विहार की इमारत में आग लगने के बाद जैसे ही बिजली बंद हुई। आगे की ओर बने तीसरी और चौथी मंजिलों पर लोग फंस गए। दरअसल परिजनों ने दावा किया है कि सेंट्रल लॉक होने से काफी कोशिशों के बाद भी दरवाजा नहीं खुल रहा था। 
इस बीच आग ने उनके दरवाजे को भी चपेट में ले लिया। आग लगते ही सामने की ओर फ्लैट में मौजूद लोग अपनी-अपनी बालकनी पर आ गए। इन लोगों ने चिल्लाकर मदद की गुहार लगाई। नीचे खड़े पड़ोसी बेबस उन्हें देखते रहे।
इस बीच पुलिस व दमकल की गाड़ियां भी पहुंच गईं। दमकल कर्मियों को रेस्क्यू ऑपरेशन में थोड़ी देर जरूर लगी लेकिन जल्द ही काम शुरू हो गया। तीसरी मंजिल पर मौजूद अर्चित जैन (30) ने बताया कि वह परिवार के साथ गहरी नींद में थे।

और पढ़े  अमित शाह का घुसपैठ पर जीरो टॉलरेंस का आदेश, आतंकवाद से लड़ाई में AI भी अहम
शोर शराबे से नींद खुली तो पिता मनोज जैन, मां अनुराधा जैन और बहन वंशिका को जाकर उठाया। बाहर निकलने की कोशिश नाकाम हुई तो वह बालकनी पर आ गया।

इसके बाद सभी मदद के लिए चिल्लाए। तभी दमकलकर्मी वहां पहुंच गए। उन्होंने सीढ़ी लगाकर पूरे परिवार को नीचे सुरक्षित उतारा। हालांकि रेस्क्यू के दौरान अर्चित के हाथ पर कट लग गया, जिसकी वजह से वह जख्मी हो गए।
चौथी मंजिल पर मौजूद सिल्की ने बताया कि घर पर पति, दो बच्चे और ससुर मौजूद थे। अफरा-तफरी के बीच उनका परिवार बालकनी पर आ गया। कुछ ही देर बाद दमकल की क्रेन के जरिये उनको नीचे सुरक्षित उतार लिया। आग से मनोज और सिल्की का फ्लैट भी जल गया।

हादसे वाली इमारत के ठीक बराबर वाली बिल्डिंग में रहने वाली पड़ोसी महिला समरिका शर्मा ने बताया कि शोर शराबे से उनकी नींद खुली। वह बाहर निकली तो उन्होंने पड़ोसियों की इमारत में आग देखी। सबसे पहले उन्होंने ही पीसीआर कॉल कर पुलिस व दमकल को सूचना दी।
छत के दरवाजे पर नहीं होता ताला तो बच जाती जान
विवेक विहार की जिस इमारत में आग लगी तो देखते ही देखते चौथी मंजिल पर पहुंच गई। चौथी मंजिल पर मौजूद लोगों ने किसी तरह अपने फ्लैट का दरवाजा खोला और सीढ़ियों तक गए लेकिन ममटी (छत पर जाने का दरवाजा) का गेट दोनों ओर से बंद था। इस वजह से परिवार के तीन लोगों की वहीं सीढ़ियों पर झुलसकर मौत हो गई। इनके शव दमकलकर्मियों के यहीं पड़े मिले।

इमारत में रहने वाले मनोज जैन ने बताया कि इस पूरी इमारत में 400-400 गज के फ्लैट में सामने की ओर चार परिवार पुनीत जैन, राजकुमार अरोड़ा, मनोज जैन और डॉ. सुधीर मित्तल के परिवार रहते हैं। वहीं जहां लोग हताहत हुए वहां पीछे की ओर कमल कुमार गोयल, लखमी चंद जैन, अरविंद जैन और नितिन जैन के परिवार रहते थे। इमारत के सामने की ओर मौजूद लोगों की सामान्य बालकनी बनी है।

और पढ़े  बच्चों को फोन के बाद हो रही सुरक्षा की चिंता? मोबाइल में आज ही करें ये सेटिंग्स..
पीछे की ओर बने फ्लैटों की बालकनी पिछली ओर मौजूद सर्विस रोड पर खुलती है। सिक्योरिटी और बंदरों से बचने के लिए सभी चारों फ्लैट मालिकों ने मिलकर लोहे का मजबूत और भारी भरकम जाल बनाकर उसे पूरी तरह पैक किया हुआ है। इमारत में आग लगी तो पहली मंजिल के आगे और पीछे वाले फ्लैट के लोग तुरंत सुरक्षित निकल गए जबकि दूसरी मंजिल के बाद ज्यादातर लोग वहीं पर फंस गए।

सामने की ओर मौजूद लोगों को दमकल कर्मियों ने निकाल लिया जबकि पीछे मौजूद लोगों की जान चली गई। पुलिस जांच में पता चला कि चौथी मंजिल के दोनों ओर के फ्लैट मालिकों ने छत पर जाने के लिए मुमटी के दरवाजों को लॉक किया हुआ था। ममटी का दरवाजा खुला होता तो शायद नितिन जैन का परिवार बच जाता। स्थानीय लोगों ने बताया कि बिल्डिंग में आग की बजह से बिजली नहीं थी, पूरी बिल्डिंग में चारों तरफ अंधेरा था। लोगों के चीखने और बचाओ-बचाओ की आवाजें सुनाईं दे रहीं थी।

धुआं, इतना ज्यादा था कि फंसे लोगों की आंखों में जलन व दम घुट रहा था। जान बचाने के लिए सब इधर उधर भागे लेकिन धुंऐ के कारण लोगों का दम घुट गया। दर्जनों लोग जो झुलसने व दम घुटने के कारण अचेत पड़े थे, उन्हें मौके पर पहुंची दमकल की टीम ने निकाल कर जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया जहां उनका इलाज चल रहा है। वहीं मृतकों की पहचान के लिए परिजनों के डीएनए सैम्पल लिए गए हैं। ताकि शवों की शिनाख्त की जा सके।

और पढ़े  राहुल गांधी का धरना: जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, यहां से नहीं हिलेंगे
चोरों की आशंका से बचने के इंतजाम ने ही ले ली जान
सी-ब्लॉक के एक आरडब्ल्यूए अधिकारी ने बताया कि विवेक विहार जैसे पॉश एरिया में लोगों ने सर्विस लेन में किसी वारदात की आशंका से बचने के लिए पीछे की ओर जाल लगाकर उसे पैक किया हुआ है। 10-15 साल पहले कई वारदातें हुई, जिसमें चोरों ने पीछे से मकान में घुसकर वारदात को अंजाम दिया। ऐसे में उससे बचने के लिए लोगों ने जाल लगवाए हैं। यही जाल जानलेवा साबित हुआ।

Spread the love
  • Related Posts

    दिल्ली लक्ष्मी योजना: रक्षाबंधन से पहले महिलाओं को मिला उपहार, cm रेखा ने सौंपा 2500 रुपये का लाभार्थी पत्र

    Spread the love

    Spread the loveदिल्ली की महिलाओं के लिए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा घोषित दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत लाभ मिलने का इंतजार खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता 26…


    Spread the love

    बढ़ रहा स्वाइन फ्लू का प्रकोप,दिल्ली में 2308 मरीज, नोएडा में 24 घंटे में बढ़े आठ गुना केस,अस्पताल अलर्ट मोड पर

    Spread the love

    Spread the loveदिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। दिल्ली में बीमारी के मामले बढ़कर 2,308 व इन्फ्लुएंजा ए+बी के 3,000 हो गए हैं। वहीं, गौतमबुद्ध नगर जिले में मंगलवार…


    Spread the love