दिल्ली धमाका- चैरिटी के नाम पर डॉक्टरों का जासूसी जाल, ISI ने खड़ा कर दिया नेटवर्क..

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चैरिटी के नाम पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने नेपाल में फिर सक्रियता बढ़ाई है। उद्देश्य भारत पर दोतरफा नजर रखने के साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों की खुफिया जानकारी जुटाना है। सूत्रों के अनुसार, इनमें सबसे संवेदनशील गोरखपुर और लखनऊ बताया जा रहा है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ पर भी नजर है। दिल्ली धमाके की कड़ियां तुर्किए और फिर नेपाल से जुड़ने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती से सीमावर्ती जिलों के पांच संदिग्ध डॉक्टरों पर कार्रवाई हुई है। अभी एक विदेश भाग गया है।

नवंबर में केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई आईबी की रिपोर्ट में भी सीमावर्ती जिलों में चैरिटी के नाम पर चल रहे खेल का जिक्र है। 15 नवंबर को बहराइच से पकड़े गए दो संदिग्ध ब्रिटिश नागरिक भी चैरिटी के लिए ही नेपाल पहुंचे थे। इनमें पाकिस्तानी मूल के हस्सन अमान सलीम की पत्नी बांग्लादेश की है। वह भी पति के साथ पहले नेपाल जा चुकी है।

 

पाकिस्तानियों की आवाजाही बढ़ी

इनसे पहले पाकिस्तानी सेना का पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल हबीब भी चैरिटी के नाम पर भारत से सटे लंबिनी क्षेत्र में सक्रिय रहा। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार चैरिटी, मेडिकल कैंप, रिसर्च व सेमिनार के नाम पर पाकिस्तानियों की आवाजाही बढ़ी है।

नेपाल सीमा पर काम कर चुके आईबी के पूर्व अधिकारी संतोष सिंह बताते हैं कि यह गतिविधि सिर्फ मानवीय सेवा तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से भारत पर दोतरफा नजर रखने, सीमावर्ती क्षेत्रों की सूचनाएं जुटाने और नेटवर्क तैयार करने की आशंका है।

जांच रिपोर्ट का आधार 

पीलीभीत, लखमीपुर खीरी, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर व महराजगंज से लगते नेपाली क्षेत्रों में पता लगाया जा रहा है कि पाकिस्तानी व तुर्किए से सेमिनार, फेलोशिप व रिसर्च प्रोजेक्ट के नाम पर कौन-कौन से लोग नेपाल की बार-बार यात्रा कर रहे हैं या फिर यात्रा प्रस्तावित है।

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बॉर्डर क्षेत्र में संबंधित की कहां सक्रियता रही ? किस प्रतिष्ठान से जुड़ाव रहा? इनसे जुड़ी संस्था क्या काम करती है? फंडिंग कैसे मुहैया कराई जाती है। सूत्रों के अनुसार इन बिंदुओं के आधार पर दो चिकित्सक संदेह के घेरे में आए हैं, जिनमें से एक हाल ही में अचानक दुबई चला गया। उसके यात्रा कार्यक्रम और दिल्ली धमाके के बाद अचानक विदेश यात्रा ने संदेह गहरा दिया है।


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