होर्मुज में शुरू हुई नाकेबंदी-: अमेरिकी सेना ने ईरान पर फिर बरसाए बम, आईआरजीसी के ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों के पास समुद्री नाकेबंदी लागू कर दी है। इससे एक घंटा पहले अमेरिकी सेना ने ईरान में सैन्य ठिकानों पर एक और दौर के हमले किए हैं। एक अमेरिकी अधिकारी इस संवेदनशील सैन्य अभियान पर चर्चा करने के लिए नाम न बताने की शर्त पर कहा कि इन हमलों का उद्देश्य उभरते खतरों को खत्म करना था।

ये हमले अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य कार्रवाई की ताजा कड़ी हैं। दोनों देशों के बीच यह तनाव पिछले सप्ताह होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर ईरानी हमलों के बाद शुरू हुआ था। सेंट्रल कमांड ने बताया कि हमलों का उद्देश्य होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ईरानी क्षमताओं को कमजोर करना था।
होर्मुज में वर्चस्व की छिड़ी जंग
ये हमले ऐसे समय में हो रहे हैं जब अमेरिकी सेनाएं ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी फिर से शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। यह नाकाबंदी अमेरिकी समयानुसार शाम चार बजे से प्रभावी हुई। वहीं, अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
इससे पहले भी अमेरिकी सेना ने ईरान के बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास में आईआरजीसी की रक्षा प्रणाली, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों के साथ समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया था।

अंतरिम शांति समझौते पर संकट
हाल के दिनों में लगातार हो रहे हमलों ने अंतरिम शांति समझौते पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह समझौता 60 दिनों के भीतर स्थायी समझौते तक पहुंचने के उद्देश्य से किया गया था, जिसमें ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम सहित अन्य मुद्दों का समाधान भी शामिल था। समझौते के तहत अमेरिका ने अप्रैल के मध्य में लगाई गई नाकेबंदी हटा ली थी। हालांकि, अमेरिकी सेना ने कहा है कि वह दुबई समयानुसार बुधवार आधी रात से इसे फिर लागू किया जाएगा।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज में 20 फीसदी शुल्क वसूलने की योजना पर यू-टर्न ले लिया है। ट्रंप की यह  शुल्क लगाने की योजना अमेरिका की उस पुरानी नीति से अलग थी, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के सभी जहाजों के लिए खुला रखने की बात कही जाती रही है। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी क्षेत्र के दौरे के दौरान इसी नीति का समर्थन किया था।

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अंतरिम समझौते के तहत ईरान ने 60 दिनों तक जलडमरूमध्य से बिना शुल्क के आवाजाही की अनुमति देने पर सहमति जताई थी। हालांकि, इसके बाद की व्यवस्था को लेकर समझौते में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। ईरान का कहना है कि उसे इस मार्ग पर यातायात नियंत्रित करने और शुल्क लेने का अधिकार है, जबकि अमेरिका इससे असहमत है।
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