बांग्लादेश में हिंदू संत ब्रह्मचारी चिन्मय कृष्ण दास को बड़ा झटका लगा है। देश के हाईकोर्ट ने रविवार को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि चटग्राम की निचली अदालत में 2024 के एक वकील की हत्या से जुड़े मामले की सुनवाई जारी है, इसलिए फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती।
चिन्मय कृष्ण दास पर 2024 में देशद्रोह के आरोप भी लगे थे और उन्हें 25 नवंबर 2024 को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था।
चटग्राम हत्या मामले में चल रहा ट्रायल
हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ न्यायमूर्ति केएम जाहिद सरवर और न्यायमूर्ति शेख अबू ताहेर ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, इसलिए हस्तक्षेप उचित नहीं है। संत के वकील अपूर्वा कुमार भट्टाचार्य ने बताया कि अदालत ने चार अन्य मामलों में जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख तय की है।
क्या है पूरा मामला?
- 19 जनवरी को चटग्राम डिविजनल स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल ने चिन्मय कृष्ण दास समेत 39 लोगों पर आरोप तय किए थे
- यह मामला वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की हत्या से जुड़ा है
- 23 आरोपी हिरासत में हैं, जबकि 16 अभी फरार बताए जा रहे हैं
पहले भी मिल चुकी थी जमानत, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
इससे पहले अप्रैल 2024 में हाईकोर्ट ने उन्हें देशद्रोह मामले में जमानत दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय डिवीजन ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी। चिन्मय कृष्ण दास के संगठन ‘साम्मिलित सनातन जागरण जोट’ ने शेख हसीना सरकार के हटने के बाद हिंदू समुदाय पर कथित हमलों और भेदभाव के खिलाफ कई प्रदर्शन किए थे।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी असर
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की आबादी लगभग 8 प्रतिशत है, जो कुल 17 करोड़ जनसंख्या का हिस्सा है (2022 आंकड़ों के अनुसार)। चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी को लेकर भारत ने भी चिंता जताई थी, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हलचल देखी गई थी।







