अयोध्या- राममंदिर चढ़ावा चोरी मामलाः जांच अधिकारी पहुंचे जेल, आरोपी अविनाश शुक्ला से घंटों की पूछताछ

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राममंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच अब निर्णायक चरण की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने अपनी पड़ताल तेज कर दी है। इसी कड़ी में जांच अधिकारी एवं क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष तिवारी मंगलवार को जिला कारागार
पहुंचे और मामले में बंद आरोपी अविनाश शुक्ला से विस्तार से पूछताछ की।
सूत्रों के अनुसार, जेल में हुई पूछताछ के दौरान जांच अधिकारी ने घटना से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर जानकारी हासिल की। विशेष रूप से 5 जून को बरामद किए गए लगभग 20 लाख रुपये नकद और गहनों से जुड़े सवाल पूछे गए। जांच टीम यह जानने का प्रयास कर रही है कि बरामद धनराशि और आभूषणों का स्रोत क्या था और इनका संबंध मंदिर चढ़ावे से है या नहीं।
सूत्र बताते है कि पूछताछ के दौरान आरोपी से धन के लेनदेन, घटनाक्रम में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और कथित रूप से अपनाए गए तरीकों को लेकर भी जानकारी ली गई। जांच टीम आरोपियों के बयानों का दस्तावेजी साक्ष्यों और अन्य तकनीकी तथ्यों के आधार पर सत्यापन कर रही है।
राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे के कथित गबन और चोरी के आरोप सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया था। शुरुआती स्तर पर शिकायत और जांच के बाद पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए कार्रवाई शुरू की। इसके बाद संदिग्ध गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच आगे बढ़ाई गई।
विशेष टीम ने जांच के दौरान पुलिस ने कुछ अहम सुराग जुटाए और प्रमुख सचिव गृह को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद थाना राम जन्मभूमि में एफआईआर दर्ज हुई, कार्रवाई करते हुए आरोपियों को हिरासत में लिया गया। इसके बाद पूछताछ और छानबीन शुरू कर दी पुलिस टीम लगातार आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
पीछे की घटना पर नजर डालें तो आरोपी अनुराग शुक्ला के योग सेंटर से 5 जून को बड़ी मात्रा में नकदी और गहने बरामद किए जाने का मामला सामने आया। इसके बाद 7 जून को अखिलेश यादव ने अपने एक्स हैडल पर पूरा मामला उठाया, इसके बाद से राजनैतिक गलियारे हलचल तेज हो गया। मामले में फूल पड़ा तो विशेष टीम का गठन किया गया, एसआईटी द्वारा प्रारंभिक जांच सौंप जाने के बाद एफआईआर हुई और फिर गिरफ्तारी….
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने जांच को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित न रखते हुए एसआईटी को जिम्मेदारी सौंपी। टीम अब पूरे घटनाक्रम की समय रेखा तैयार कर रही है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि कथित अनियमितता कब और किस स्तर पर हुई।

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जांच अधिकारी आशुतोष तिवारी द्वारा जेल पहुंचकर आरोपी से पूछताछ को जांच की अहम कड़ी माना जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि टीम यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद रकम और कथित चोरी के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं।
इसके साथ ही पुलिस उन लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है जिनका नाम पूछताछ या अन्य माध्यमों से सामने आया है। जांच एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, बैंकिंग गतिविधियों और बयान के आधार पर घटनाक्रम की पुष्टि करने में लगी हैं।
फिलहाल पुलिस और एसआईटी की ओर से आधिकारिक रूप से पूछताछ के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच के आधार पर कुछ और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।


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