पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर अयोध्या धाम में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा, श्रीमद्भागवत गीता प्रवचन एवं नाम संकीर्तन महोत्सव में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना से सराबोर इस आयोजन में जहां कथा व्यास श्री कृष्ण प्रिय जी महाराज अपनी अमृतमयी वाणी से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान कर रहे हैं, वहीं व्यवस्थाओं को लेकर विनय शुक्ला की कार्यशैली भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिदिन प्रातः 8:15 बजे से 10:15 बजे तक श्रीमद्भगवद्गीता एवं श्रीमद्भागवत पर प्रवचन, दोपहर 1:15 बजे से 4:15 बजे तक श्रीराम कथा तथा रात्रि 8:15 बजे से 9:15 बजे तक भागवत नाम संकीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। कथा स्थल पर पहुंचने वाले श्रद्धालु कथा और भजन-कीर्तन का आनंद लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
कथा व्यास श्री कृष्ण प्रिय जी महाराज अपने प्रवचनों में भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, सेवा, त्याग, मर्यादा और मानव कल्याण के संदेश को सरल भाषा में प्रस्तुत कर रहे हैं। उनकी वाणी से श्रद्धालु भाव-विभोर हो रहे हैं और बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन कथा स्थल पर पहुंच रहे हैं।
वहीं मणिराम दास छावनी के धर्म मंडपम की व्यवस्थाओं की भी सभी ओर प्रशंसा हो रही है। धर्म मंडपम के व्यवस्थापक विनय शुक्ला पूरे आयोजन की कमान संभाले हुए हैं। श्रद्धालुओं के आवास, भोजन, सुरक्षा, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था पर वह स्वयं लगातार नजर बनाए हुए हैं। विशेष रूप से सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से पूरे परिसर की निगरानी कर व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखा जा रहा है।
श्रद्धालुओं और संत-महात्माओं का कहना है कि विनय शुक्ला की सक्रियता, अनुशासन और सेवा भावना के कारण हजारों श्रद्धालुओं के बीच भी व्यवस्थाएं व्यवस्थित और सुचारु रूप से संचालित हो रही हैं। आयोजन स्थल पर आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है, जिससे उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ रहा।
इस कार्य में मैनेजर विष्णु शुक्ला और काका मिस्त्री भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन श्रद्धालुओं का कहना है कि व्यवस्थापक विनय शुक्ला की व्यक्तिगत निगरानी और समर्पण ने पूरे आयोजन को सफल बनाने में विशेष योगदान दिया है।
पुरुषोत्तम मास में आयोजित यह धार्मिक महोत्सव न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान कर रहा है, बल्कि सेवा, संगठन और समर्पण की उत्कृष्ट मिसाल भी प्रस्तुत कर रहा है, जिसमें कथा व्यास श्री कृष्ण प्रिय जी महाराज और व्यवस्थापक विनय शुक्ला दोनों ही अपनी-अपनी भूमिकाओं के कारण विशेष रूप से सराहे जा रहे हैं।







