अंकिता हत्याकांड- देहरादून में सड़कों पर उतरा जन सैलाब, किया CM आवास कूच, 11 को उत्तराखंड बंद का एलान

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अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच और सोशल मीडिया पर नाम सार्वजनिक हुए वीआईपी नेताओं पर कार्रवाई की मांग के लिए रविवार को जनसैलाब दून की सड़कों पर उतर आया। विभिन्न सामाजिक संगठन और विपक्षी राजनीतिक दलों ने मुख्यमंत्री आवास कूच किया। हालांकि पहले से तैनात भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को हाथीबड़कला पर बैरिकेडिंग लगा रोक दिया।

इस बीच पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर झड़प भी हुई। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ही बैठ सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में भारी संख्या में महिलाओं और पुरुषों के साथ युवाओं ने भी भाग लिया। सभी ने एक सुर में अंकिता को न्याय देने की मांग की और सीबीआई जांच नहीं कराए जाने पर नाराजगी जताई। रविवार सुबह करीब 11 बजे उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच, कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल, सीपीआई, बेरोजगार संघ, उत्तराखंड मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति, गढ़वाल सभा महिला मंच और अलग-अलग सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग परेड ग्राउंड में एकत्रित हुए।

 

यहां से विशाल रैली निकालते हुए लोग मुख्यमंत्री आवास कूच के लिए बढ़े। जैसे ही प्रदर्शनकारी हाथीबड़कला पहुंचे, पुलिस ने सभी को बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने कहा, अंकिता हत्याकांड में नए आरोपों के बाद अब इस मामले की नए सिरे से जांच होनी जरूरी है। अंकिता भंडारी की हत्या कोई साधारण अपराध नहीं था बल्कि संरक्षण में पनपे अपराध तंत्र का परिणाम है। उन्होंने कहा, पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी की ओर से कथित वीआईपी का नाम सामने आने के बावजूद सरकार इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

इस मामले में नए आरोप सामने आने के बाद संलिप्त लोगों को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए। उधर सामाजिक और विपक्षी राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों ने कहा, सरकार शुरुआत से ही वीआईपी को बचाने का प्रयास कर रही है। ऐसे में इस मामले की पूरी तरह से सीबीआई जांच होनी चाहिए। सत्ता पक्ष इतना मदहोश है कि उन्हें सामाजिक और जन संगठनों की आवाज सुनाई नहीं दे रही है।

11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का एलान
प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के मोहित डिमरी ने एलान करते हुए कहा, 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद रहेगा। इसके लिए सभी व्यापार संगठन, सामाजिक संगठनों से वार्ता की जाएगी। वहीं उन्होंने सरकार को सप्ताहभर का समय देते हुए कहा, वीआईपी को जांच के दायरे में लाया जाए और सभी वीआईपी के नाम सार्वजनिक करें, जिन पर भी आरोप लगे हैं। वहीं, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने कहा, सरकार को जल्द सीबीआई जांच की संस्तुति करनी चाहिए।

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