जिनेवा वार्ता से पहले खाड़ी में अमेरिकी सैन्य का जमावड़ा, ईरान में बढ़ी जंग की आशंका

 

मेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में होने वाली अहम वार्ता से पहले मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा तेज हो गया है। ट्रंप ने क्षेत्र में बड़ी नौसैनिक ताकत तैनात कर दी है। इसी बीच ईरान में आम लोग बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध को लेकर चिंतित हैं। कई ईरानी इस वार्ता को आखिरी मौका मान रहे हैं, जिससे किसी बड़े टकराव को टाला जा सके।

 

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश निष्पक्ष और सम्मानजनक समझौते के लिए तैयार है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करना चाहता, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। जिनेवा में गुरुवार को होने वाली वार्ता को दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का अवसर बताया जा रहा है।

खाड़ी में अमेरिकी ताकत का प्रदर्शन
पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका ने कम से कम 16 नौसैनिक जहाज क्षेत्र में तैनात किए हैं। इनमें विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड शामिल हैं। इसके अलावा जॉर्डन में एफ-35 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान भी तैनात किए गए हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने फारसी भाषा में संदेश जारी कर ईरानियों को संपर्क करने के निर्देश भी दिए हैं। इस सैन्य जमावड़े को लेकर ईरान में बेचैनी बढ़ी है।

 

ईरान की प्रतिक्रिया और सैन्य अभ्यास
ईरान के सरकारी टीवी ने बताया कि रिवोल्यूशनरी गार्ड ने हाल में मिसाइल और ड्रोन अभ्यास किया। तटीय इलाकों में फायरिंग अभ्यास भी हुए। ईरानी नेतृत्व ने कहा है कि किसी भी हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ कहा कि आत्मसमर्पण शब्द ईरान की शब्दावली में नहीं है। ईरान का कहना है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा।

और पढ़े  ब्रिक्स समिट LIVE: रूसी राष्ट्रपति पुतिन शिष्टमंडल के साथ दिल्ली पहुंचे, ब्राजील समेत कई देशों के मेहमान भी आए

जनता में डर और अनिश्चितता
तेहरान की सड़कों पर लोगों में चिंता साफ दिखाई दे रही है। कुछ लोग मानते हैं कि अगर दोनों पक्ष अपनी बात पर अड़े रहे तो युद्ध हो सकता है। एक टैक्सी चालक ने कहा कि 1980 के दशक का ईरान-इराक युद्ध भी इतना अस्थिर नहीं लगा था। वहीं एक युवा दुकानदार ने कहा कि आर्थिक हालात पहले ही खराब हैं, युद्ध हुआ तो स्थिति और बिगड़ेगी। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि ईरान को झुकना नहीं चाहिए, जबकि अन्य मानते हैं कि समझौता जरूरी है।

वार्ता में मुख्य अड़चनें
सबसे बड़ा विवाद यूरेनियम संवर्धन को लेकर है। ईरान इसे जारी रखना चाहता है, जबकि ट्रंप प्रशासन इसे रोकने की मांग कर रहा है। अमेरिका बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय समूहों को समर्थन पर भी चर्चा चाहता है, लेकिन ईरान इन मुद्दों को वार्ता से बाहर रख रहा है। ऐसे में जिनेवा की बातचीत निर्णायक मानी जा रही है। अगर कूटनीति को प्राथमिकता नहीं मिली तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

  • Related Posts

    महापौर चुनाव: जयपुर, जोधपुर और कोटा में 25 सितंबर को होगा मेयर का चुनाव, इस दिन आएगा परिणाम

    राज्य निर्वाचन आयोग ने राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों के साथ सुकेत नगरपालिका में महापौर/अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इन…

    बंगाल एसटीएफ को बड़ी सफलता: शीर्ष माओवादी नेता असीम मंडल गिरफ्तार, पैसे जुटाने के लिए पहुंचा था ससुराल

    पश्चिम बंगाल में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। करीब दो करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी नेता असीम मंडल उर्फ आकाश को कोलकाता पुलिस की विशेष कार्यबल (एसटीएफ)…