एआई-171- एअर इंडिया विमान क्रैश का 1 साल, जानें उस भयावह दिन का पूरा घटनाक्रम, कहां तक पहुंची हादसे की जांच

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12 जून, एक साल पहले यानी वर्ष 2025 में यह वही तारीख थी, जब एअर इंडिया का अहमदाबाद से लंदन जा रहा विमान हवाई अड्डे से उड़ान भरने के चंद पलों के बाद हादसे का शिकार हो गया था। इस दुर्घटना ने पूरी दुनिया को हिला दिया था। दरअसल, इस हादसे में 239 यात्रियों समेत कुल 260 लोगों की जान चली गई थी। मृतकों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे।

 

इस दुर्घटना की कड़वी यादें आज भी देशवासियों के जेहन में हैं। एक साल पूरा होने के बाद भी हादसे में शिकार हुए लोगों के परिजनों को आज तक यह नहीं पता चला कि उनके अपने कैसे एक विमान दुर्घटना का शिकार हो गए? आखिर इस पूरी घटना में चूक किसकी थी? मामले की जांच का क्या हुआ? केंद्र सरकार और अलग-अलग जांच एजेंसियों की तरफ से भी इस मुद्दे पर अब तक कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि, माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही हादसे की वजह बताने वाली रिपोर्ट को सामने रख सकती है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि 12 जून 2025 के दिन आखिर विमान हादसे का पूरा घटनाक्रम क्या था? इस हादसे को लेकर हुई जांच में जो शुरुआती रिपोर्ट जारी हुई, उसमें क्या-क्या कहा गया था? आखिर कैसे उस रिपोर्ट को लेकर विवाद शुरू हो गए? विमान हादसे को लेकर क्या-क्या कॉन्सपिरेसी थ्योरी सामने आईं? केंद्र सरकार की जांच किस मुहाने तक पहुंची? आइये जानते हैं..

पहले जानें- 12 जून 2025 को कैसे क्रैश हो गया था एआई171 विमान?

12 जून 2025 को एअर इंडिया के बोइंग 787 विमान (वीटी-एएनबी) विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का घटनाक्रम सुबह से ही शुरू हुई तकनीकी खामियों और टेकऑफ के बाद महज 32 सेकंड के खौफनाक मंजर से जुड़ा रहा।

सुबह: पिछली उड़ान (एआई 423) में तकनीकी दिक्कतें

सुबह 9:48 बजे: इस विमान ने कैप्टन हरदीप देओल की कमान में उड़ान संख्या एआई 423 के रूप में दिल्ली से अहमदाबाद के लिए उड़ान भरी थी।

सुबह 10:40-10:50 बजे: अहमदाबाद उतरने की प्रक्रिया के दौरान विमान में तकनीकी समस्याएं आईं। विमान के स्टेबलाइजर सेंसर ने गलत संकेत देने शुरू कर दिए और इसके अलावा एयर-कंडीशनिंग सिस्टम भी फेल हो गया था।

दोपहर: मरम्मत और उड़ान की तैयारी

दोपहर 12:10 बजे: जमीन पर इंजीनियरों की तरफ से जांच के बाद विमान को अगली उड़ान यानी एआई-171 के लिए सुरक्षित घोषित करके क्लीयरेंस दे दी गई।

दोपहर 1:00 बजे: इस समय तक विमान में यात्री सवार हो चुके थे। हादसे में मारे गए एक यात्री के पिता ने बताया कि 1 बजे उन्होंने अपने बेटे से वीडियो कॉल पर बात की थी, जब वह फ्लाइट में बैठ चुका था।

टेकऑफ से ठीक पहले की चेतावनी

दोपहर 1:23 बजे: कैप्टन सुमीत सभरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर कॉकपिट में थे और विमान के इंजन चालू करके टैक्सी क्लीयरेंस का इंतजार कर रहे थे। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि उस वक्त भी विमान में कुछ खराबियों की शिकायत सामने आई थीं।

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उड़ान और खौफनाक 32 सेकंड

टेकऑफ: विमान ने अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से लंदन के लिए उड़ान भरी। टेकऑफ के तुरंत बाद: सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक, विमान के हवा में जाते ही इसका आपातकालीन पावर स्रोत रैम एयर टरबाइन (आरएटी) तैनात हो गया था, जो किसी बड़े इलेक्ट्रिकल फेलियर का संकेत था। अगले 32 सेकंड के दौरान विमान केवल 630 फीट की ऊंचाई तक ही पहुंच पाया और धीरे-धीरे नीचे की ओर गिरने लगा।

हादसे में सिर्फ एक यात्री- विश्वकुमार रमेश ही जिंदा बच पाए। वे ब्रिटेन के निवासी हैं। इस मामले में वे पूछताछ में भी शामिल हुए हैं।

हादसे को लेकर जारी शुरुआती रिपोर्ट में क्या कहा गया?    

भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) की तरफ से हादसे के एक महीने बाद (12 जुलाई 2025 को रात 1 बजे) जारी की गई प्रारंभिक रिपोर्ट में दुर्घटना को लेकर कई तकनीकी पहलुओं और घटनाक्रमों का खुलासा किया गया था। इनमें रैम एयर टरबाइन के खुलने से लेकर कॉकपिट की वॉइस रिकॉर्डिंग तक का जिक्र किया गया।

फ्यूल सप्लाई का अचानक कटना: रिपोर्ट में हादसे का मुख्य ट्रिगर टेकऑफ के तुरंत बाद दोनों इंजनों की ईंधन आपूर्ति का रुकना बताया गया। टेकऑफ के कुछ सेकंड के अंदर ही विमान के दोनों इंजन फ्यूल कंट्रोल स्विच रन से कटऑफ यानी चालू से बंद की स्थिति में चले गए। इससे इंजनों तक ईंधन पहुंचना बंद हो गया।

पायलटों के बीच की बातचीत: कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) के हवाले से रिपोर्ट में एक संक्षिप्त बातचीत का जिक्र है, जिसमें एक पायलट दूसरे से पूछता है कि उसने फ्यूल क्यों कट-ऑफ किया और दूसरा पायलट जवाब देता है कि उसने ऐसा नहीं किया है। हालांकि, रिपोर्ट ने स्पष्ट रूप से यह दावा नहीं किया कि पायलटों ने शारीरिक रूप से स्विच को बंद किया था।

इंजन दोबारा चालू करने की कोशिश: डाटा के मुताबिक, टेकऑफ के बाद इंजनों की रफ्तार (एन2 वैल्यू) न्यूनतम स्तर से भी नीचे चली गई थीं। इसके बाद फ्यूल स्विच को वापस रन (चालू) पर लाकर इंजन को हवा में ही दोबारा चालू करने का प्रयास दर्ज किया गया था।

रैम एयर टरबाइन की तैनाती: रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए बताया गया कि उड़ान भरने के तुरंत बाद शुरुआती चढ़ाई के दौरान ही विमान का आपातकालीन पावर स्रोत रैम एयर टरबाइन (आरएटी) तैनात हो गया था।

ब्लैक बॉक्स और ईएलटी को नुकसान: रिपोर्ट में दर्ज किया गया कि विमान के पिछले हिस्से में मौजूद ब्लैक बॉक्स बुरी तरह से थर्मल डैमेज (जलने) और गिरने की वजह से नुकसान से गुजरा। इसके अलावा विमान का इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ईएलटी) भी सक्रिय नहीं हुआ था।

पिछली तकनीकी खामियां: रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उड़ान से पहले विमान के कोर नेटवर्क में एक ज्ञात खराबी मौजूद थी। साथ ही, पिछली उड़ान (एआई 423) के दौरान भी क्रू ने विमान के में स्टेबलाइजर सेंसर की खराबी का संकेत देने वाला मैसेज दर्ज किया था।

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कैसे-क्यों शुरुआती जांच रिपोर्ट को लेकर विवाद शुरू हुए?

एएआईबी की यही वह शुरुआती रिपोर्ट थी जिसके महज दो पैराग्राफ (फ्यूल कटने और पायलटों की बातचीत) ने दुनिया भर में यह बहस छेड़ दी थी कि क्या यह पायलट की गलती थी या फिर विमान में कोई बड़ी इलेक्ट्रिकल-मैकेनिकल दिक्कत आई थी।

1. कॉकपिट की अधूरी बातचीत का बार-बार जिक्र

पश्चिमी मीडिया समूहों ने कॉकपिट वॉय रिकॉर्डर की उस छोटी सी बातचीत का जिक्र करते हुए यह लगभग घोषित कर दिया कि कैप्टन सुमीत सभरवाल ने जानबूझकर फ्यूल काटा था और इसे पायलट की आत्महत्या या जानबूझकर की गई गलती बता दिया। यह तब किया गया था, जब रिपोर्ट में बातचीत का पूरा ट्रांसक्रिप्ट (विवरण) नहीं दिया गया।

2. इंजन दोबरा चालू करने के समय को लेकर विवाद

रिपोर्ट में दावा किया गया कि फ्यूल कटने के बाद जब इंजन की गति न्यूनतम हो गई तो बीच हवा में उन्हें दोबारा चालू करने की कोशिश की। लेकिन विमानन विशेषज्ञों और इंजीनियरों ने इसे भौतिक रूप से असंभव बताया। विशेषज्ञों के अनुसार, विमान उस समय केवल 180 नॉट की गति पर था और सहायक पावर यूनिट (एपीयू) भी चालू नहीं था, ऐसे में इंजन के कोर को दोबारा घुमाना तकनीकी रूप से मुमकिन ही नहीं था।

3. इलेक्ट्रिकल फेलियर को नजरअंदाज करना

पायलट संघों (एआईपी) और सुरक्षा विशेषज्ञों का आरोप है कि रिपोर्ट में विमान की बड़ी तकनीकी और इलेक्ट्रिकल खामियों को छिपाया गया।

  • विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि एक बड़े इलेक्ट्रिकल फेलियर की वजह से फ्लाइट के कंप्यूटर मिड-एयर रीबूट होना हादसे की एक वजह हो सकता है। इसके कारण सिस्टम के इंजन कंप्यूटर ने खुद ही फ्यूल की सप्लाई काट दी थी।
  • फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) ने इसे फ्यूल स्विच कट-ऑफ के रूप में दर्ज किया, भले ही पायलटों ने स्विच को शारीरिक रूप से छुआ भी न हो। यानी कोई इलेक्ट्रिक फेलियर भी इसका जिम्मेदार हो सकता है।

4. रैम एयर टरबाइन की तैनाती का समय

रिपोर्ट में कहा गया कि टेकऑफ के तुरंत बाद आपातकालीन पावर स्रोत आरएटी तैनात हो गया था। विश्लेषकों के मुताबिक, सिमुलेटर टेस्ट से पता चला है कि आरएटी को हाइड्रोलिक पावर देने में 14-18 सेकंड लगते हैं, जिसका अर्थ है कि यह फ्यूल कटने से काफी पहले ही तैनात हो गया था। यह इस बात का बड़ा संकेत है कि विमान में पहले ही कोई गंभीर इलेक्ट्रिकल खराबी आ चुकी थी, जिसने इस आपातकालीन प्रणाली को ट्रिगर किया।

5. रिपोर्ट जारी करने का समय और ‘बोइंग’ का दबाव

एएआईबी की तरफ से इस रिपोर्ट को रात 1 बजे जारी करने के समय को लेकर भी विवाद हुआ। आरोप लगे कि ऐसा भारत में हादसे की रिपोर्ट को लेकर अटकलों से बचने और विमान निर्माता कंपनी बोइंग को बचाने के लिए यह समय चुना गया। पायलटों संगठनों और कई लोगों ने बाद में कहा कि 787 ड्रीमलाइनर विमान की प्रतिष्ठा और बोइंग जैसी बड़ी कंपनी को बचाने के लिए मृत पायलटों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, क्योंकि मृतक पायलट अपना बचाव नहीं कर सकते।

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इन सभी विवादों और खामियों के बाद ही फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स और कैप्टन सभरवाल के पिता ने एएआईबी की जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और एक स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की थी।

केंद्र सरकार की जांच किस मुहाने तक पहुंची?

न्यूज एजेंसियों और अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक,  केंद्र सरकार की विमानन जांच एजेंसी एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की जांच अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस हादसे को 12 जून 2026 को ठीक एक साल पूरा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) के नियमों के मुताबिक, जांच एजेंसी को 12 महीने के अंदर अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करनी होती है। ऐसे में माना जा रहा है कि आज या अगले कुछ दिन में ही एएआईबी की फाइनल रिपोर्ट आ सकती है।

क्यों हुई रिपोर्ट आने में देरी?
मई में नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने कहा था कि जांच आखिरी दौर में है और अंतिम रिपोर्ट एक महीने में आ सकती है। लेकिन कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अंतिम जांच निष्कर्ष आने में अभी कुछ और महीनों की देरी हो सकती है। बताया गया है कि अमेरिका में दुर्घटनाग्रस्त विमान के इंजनों का विस्तृत तकनीकी विश्लेषण अभी पूरा नहीं हुआ है। इसके अलावा इंजन कंट्रोल सिस्टम और इंजन मैनेजमेंट यूनिट के अहम हिस्सों का अध्ययन करने के लिए जांचकर्ताओं की एक टीम पिछले महीने ही फ्रांस गई थी।

अंतरिम रिपोर्ट कब तक?
आईसीएओ के नियम कहते हैं कि अगर एक साल में अंतिम रिपोर्ट नहीं बन पाती है, तो जांच एजेंसी को हादसे की बरसी पर एक अंतरिम रिपोर्ट जारी करनी होगी, जिसमें जांच की अब तक की प्रगति और सुरक्षा संबंधी जानकारी का ब्योरा हो।

पायलट संघों की क्या मांग?
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने केंद्र सरकार से स्पष्ट अपील की है कि वह कोई भी अंतरिम रिपोर्ट’ जारी न करे और सीधे अंतिम रिपोर्ट ही लाए। पायलट संघ का तर्क है कि अधूरी जांच के बीच जारी की गई किसी भी रिपोर्ट से केवल अनावश्यक भ्रम और कॉन्सपिरेसी थ्योरी को ही बढ़ावा मिलेगा।

जांच रिपोर्ट में किन चीजों पर रहेगी नजर?
इस अंतिम या अंतरिम रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद ईंधन की आपूर्ति बंद करने वाले फ्यूल कटऑफ स्विच वास्तव में कैसे और क्यों घूमे। साथ ही जांचकर्ताओं को रैम एयर टरबाइन के तैनात होने का सटीक समय भी बताना होगा। इसके अलावा विमान का पिछला ब्लैक बॉक्स इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त क्यों हुआ और इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ईएलटी) ने काम क्यों नहीं किया, इसका तकनीकी जवाब भी जांच में खोजा जा रहा है।


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