NAINITAL- तेज रफ्तार बस ने छीनी मासूम कनक की जिंदगी, खाना खाने बैठे पिता का निवाला धरा का धरा रह गया

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दोपहर की सामान्य-सी धूप अचानक एक ऐसी काली छाया में बदल गई जिसने जीवन लाल के घर की रौनक हमेशा के लिए छीन ली। खाना खाने बैठे जीवन लाल को नहीं पता था कि आज का निवाला उसके गले में अटक जाएगा। अपनी लाडो कनक की दर्दनाक मौत की खबर सुनते ही कौर मुंह तक पहुंचाते-पहुंचाते उसका हाथ रुक गया। दिल जैसे धड़कना भूल गया। अगले ही पल वह बिना कुछ सोचे सड़क की ओर भागा। जिस बेटी से उसके घर में रौनक थी उसका बेजान शरीर सड़क पर पड़ा देख उसके आंसू बह निकले। जिसे अपनी उंगलियां पकड़कर चलना उसने सिखाया था उसका साथ हमेशा के लिए छूट चुका था।

 

पीलीभीत निवासी 35 वर्षीय जीवन लाल परिवार की गुजर बसर चलाने के लिए डेढ़ साल पहले रानीबाग आए और मजदूरी का भरण-पोषण करने लगे। करीब तीन माह पहले ही वह पत्नी, दोनों बेटों और अपनी लाडो कनक को भी यहां ले आया। दिनभर मेहनत के बाद रात में अपनी बेटी को गोद में लेने से उसकी सारी थकान मिट जाती थी लेकिन सोमवार को तेज रफ्तार बस उसकी खुशियों को रौंदते हुए चली गई। पोस्टमार्टम हाउस में खड़े बेबस बाप को हर कोई सांत्वना दे रहा थ लेकिन जीवन बार-बार कनक को याद कर भावुक हो जाता था। बार-बार उसके शब्द टूट रहे थे, सांसें बिखर रही थीं। उसकी आधे में छोड़ी भोजन की थाली देर शाम तक यूं भरी पड़ी थी लेकिन जीवन में अब दर्द ही बचा था।

दो भाइयों की इकलौती बहन थी कनक

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कनक अपने दो भाइयों विशाल (5) और सार्थक (2) की इकलौती बहन थी। जब से गांव से यहां आई थी रोजाना उत्सुकता के साथ आंगनबाड़ी केंद्र जा रही थी। सोमवार को भी वह अपने भाई और मौसी के दो बच्चों के साथ केंद्र से लौट रही थी जब हादसा हुआ। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे जीवनलाल ने बताया कि उसकी पत्नी बच्चों को ले जाने की बात कहकर चली गई और वह खाना खाने लगा तभी कुछ देर बाद ऐसी खबर आई कि उसका सबकुछ छीन गया।

चालक से बस धीरे चलाने को किया था इशारा

सड़क हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि चारों बच्चे सड़क पार कर रहे थे तभी नैनीताल की ओर से तेजी से आ रही बस को जीवनलाल के साथ ही मजदूरी करने वाले राजेंद्र और नरेश ने चालक को बस धीरे-धीरे चलाने को कहा लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और मासूम काल के गाल में समा गई।

पहिए में फंस गई थी मासूमजब पहिए में बच्ची फंसी तो चालक स्पीड की ही वजह से उसके शरीर को घसीटते हुए तकरीबन 20 मीटर तक ले गया। घसीटे जाने की वजह से मासूम के दाहिने पैर के मांस के लोथड़े सड़क पर फैल गए। खून भी फैल गया। जब बस रुकी तो मासूम की आंतें व अन्य अंग निकल गए थे।

एंबुलेंस में पड़ा रहा बच्ची का शव, डेढ़ घंटे तक बिलखती रही मां

तकरीबन सवा 12 बजे के करीब घटना हुई। मां राजकुमारी तौलिये से ढके बच्ची के शव के पास ही रुकी रही। आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पड़ोसी, रिश्तेदार, अपने, पराए सब पहुंच गए। थोड़ी देर में मां से बच्ची का शव लेकर एंबुलेंस में रखा गया। एंबुलेंस के दरवाजे के पास बार-बार राजकुमारी बदहवास होती रही। थोड़ा होश में आती तो मुंह से सिर्फ यही निकलता कि …मेरी बेटी को लौटा दो….। अब मैं उसके बिना कैसे रहूंगी।

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बस रुकी तो यात्री बाहर भागे

जैसे ही बस रुकी उसमें सवार 20 से 22 यात्री बाहर की तरफ निकले। उन्हें भी चालक के लापरवाही पर गुस्सा आ रहा था। जैसे ही सवारी बाहर आई भीड़ ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। बस के शीशे टूट गए। बाएं तरफ का छोटा शीशा भी टूटा। गनीमत थी कि सारी सवारी बाहर आ चुकी थी। ड्राइवर पकड़ में नहीं आ सका।


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