दोपहर की सामान्य-सी धूप अचानक एक ऐसी काली छाया में बदल गई जिसने जीवन लाल के घर की रौनक हमेशा के लिए छीन ली। खाना खाने बैठे जीवन लाल को नहीं पता था कि आज का निवाला उसके गले में अटक जाएगा। अपनी लाडो कनक की दर्दनाक मौत की खबर सुनते ही कौर मुंह तक पहुंचाते-पहुंचाते उसका हाथ रुक गया। दिल जैसे धड़कना भूल गया। अगले ही पल वह बिना कुछ सोचे सड़क की ओर भागा। जिस बेटी से उसके घर में रौनक थी उसका बेजान शरीर सड़क पर पड़ा देख उसके आंसू बह निकले। जिसे अपनी उंगलियां पकड़कर चलना उसने सिखाया था उसका साथ हमेशा के लिए छूट चुका था।







