उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार को आई भयानक आपदा की वजह बादल फटना नहीं है। क्योंकि मौसम विभाग के मुताबिक 4-5 अगस्त को वहां पर 8 से 10 मिमी ही बारिश हुई जबकि बादल फटने के समय 100 मिमी से ज्यादा बारिश होती है। यह कहना है वैज्ञानिकों का। उनका कहना है कि इसकी वजह भूस्खलन से पानी का प्रवाह रुकने से अस्थाई झील बनना, पर्वत की तलहटी पर रुके पानी में ग्लेशियर या चट्टान का गिरना या फिर फ्लैश फ्लड हो सकती है।
धराली की तबाही के वीडियो को देखें तो ऐसा लग रहा है कि सैलाब किसी चीज के अचानक टूटने से बहुत तेजी से नीचे आया। इसमें पानी के साथ लूज मटीरियल (बर्फ, पत्थर, रेत, बजरी) भी है जो खड़ी ढलान होने की वजह से ऊपर के सारे पदार्थ को नीचे ले आया।
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ मनीष मेहता का कहना है कि इस आपदा की वजह सेटेलाइट इमेज के आने पर ही समझी जा सकती है। हालांकि पूर्व के अनुभवों व अध्ययन से इसके तीन-चार कारण माने जा सकते हैं। जिसमें ग्लेशियर टूटना, भूस्खलन से बनी अस्थाई झील का टूटना, फ्लैश फ्लड हो सकते हैं।
जब तक सेटेलाइट तस्वीरें नहीं आती और वैज्ञानिकों का दल वहां का दौरा नहीं करता, इसकी ठोस वजह बताना मुश्किल है। हालांकि अब तक आपदा के किए गए अध्ययन से माना जा रहा है कि ग्लेशियर टूटना, भूस्खलन से बनी झील का टूटना, फ्लैश फ्लड इसकी वजह हो सकती है। – डॉ विनीत कुमार गहलोत, निदेशक वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान








