पश्चिम बंगाल में चुनाव भले ही हो गए हो लेकिन विवाद अभी भी जारी है। एक मीडिया रिपोर्ट के बाद से तो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी तेज हो गई। कई राज्यों में लगातार इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहा है। इसी बीच चुनाव आयोग ने एक बड़ा फैसला किया। अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या हटाए गए मतदाताओं की श्रेणी में रखे गए लोगों की सूची ऑनलाइन उपलब्ध करा दी है। इस सूची को एएसडीडी सूची कहा गया है। अगर कोई पात्र व्यक्ति एसआईआर के बाद मतदाता सूची में अपना नाम नहीं पाता है, तो वह पहले एएसडीडी सूची में अपना नाम देख सकता है।
इस सुविधा का लाभ उन पात्र लोगों को मिलेगा, जिनका नाम SIR के दौरान मतदाता सूची से छूट गया है। चुनाव आयोग ने नए और पहली बार मतदान करने वाले पात्र युवाओं के लिए भी फॉर्म-6 से आवेदन करने का रास्ता खुला रखा है। जो युवा निर्धारित तारीख को 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके हैं, वे भी मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आयोग ने बीएलओ को ऐसे पात्र मतदाताओं की पहचान करने का निर्देश दिया है, जिनका नाम SIR के दौरान सूची में शामिल नहीं हो पाया। इसके लिए बीएलओ एसआईआर से पहले और बाद की मतदाता सूचियों की तुलना करेंगे। फिर पात्र लोगों की पहचान करेंगे।
एएसडीडी मतदाताओं की सूची मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है। संबंधित जिलों के निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट पर दिए गए लिंक से भी सूची देखी जा सकती है। जिन पात्र लोगों का नाम सूची में छूट गया है, उनकी पहचान के लिए बीएलओ घर-घर भी जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, बीएलओ को हर सप्ताह कम से कम 20 से 25 घरों का दौरा करने को कहा गया है। इस पूरी कवायद को एक महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पहचान किए गए मतदाताओं के घर सरकारी प्रतिनिधि जाकर उनकी स्थिति की पुष्टि करेंगे और पात्र लोगों को फॉर्म-6 भरने में भी मदद करेंगे।
नाम जुड़वाने की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की क्या भूमिका होगी?
चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को भी शामिल किया है। बीएलओ की ओर से तैयार की गई सूचियां राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट यानी बीएलए को सत्यापन के लिए दी जाएंगी। सत्यापन के बाद रिपोर्ट और भरे हुए फॉर्म-6 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों यानी ईआरओ के पास भेजे जाएंगे। नाम को मतदाता सूची में शामिल करने का अंतिम फैसला ईआरओ कानून के अनुसार करेंगे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद बूथ के हिसाब से तैयार सूचियां राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी साझा की जाएंगी। इससे पात्र मतदाताओं के छूटे हुए नामों का मामला सामने लाने का मौका मिलेगा।
विशेष कैंप कहां लगेंगे और फॉर्म-6 को लेकर विवाद क्या है?
- चुनाव आयोग ने नाम जोड़ने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मोहल्लों, रैन बसेरों, मजदूर बस्तियों और बेघर तथा वंचित लोगों के इलाकों में विशेष कैंप लगाने का भी फैसला किया है। शिक्षण संस्थानों और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। एसवीईईपी कार्यक्रम के जरिए भी लोगों को मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की जानकारी दी जाएगी। वरिष्ठ चुनाव अधिकारी पूरी प्रक्रिया की रोजाना निगरानी करेंगे। फॉर्म-6 को लेकर विवाद भी सामने आया है।
- यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उसने एसआईआर के दौरान इस्तेमाल हो रहे फॉर्म-6 में किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को जारी बयान में मई 2026 के बिहार एसआईआर से जुड़े फैसले के आधार पर फॉर्म-6 में घोषणा को शीर्ष अदालत की मंजूरी मिलने की बात कही थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 में किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है।






